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पहाड़ की पीड़ा! एक कहानी, दो तस्वीरें, मरीज को डोली का सहारा, कहीं सड़क ही गायब

ग्रामीण आज भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डोली के भरोसे हैं. वहीं, कई ऐसे गांव हैं जहां आज तक सड़क नहीं पहुंच पाई है.

Pithoragarh Munsyari
पहाड़ की पीड़ा! (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 20, 2026 at 3:25 PM IST

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पिथौरागढ़/उत्तरकाशी: आज के आधुनिक युग में उत्तराखंड के सीमांत जिलों से आदम युग की तस्वीरें सामनें आ रही हैं. कहीं कंधों पर जीवन के लिए मौत का सफर, तो कहीं, एक अदद रोड के लिए सालों से संघर्ष करते लोगों के दर्द की तस्वीरें दिल को कटोच जाती हैं. आंखों में व्यवस्थाओं की उम्मीद लिये ये लोग आज भी दिन बहुरने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

पहला मामला पिथौरागढ़ जिले का है. सीमांत जिला पिथौरागढ़ विकास से कोसों दूर है. सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी विकासखंड में एक बीमार महिला को इलाज के लिए डोली के सहारे 10 किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ा. कंधे पर डोली उठाए ग्रामीण इस दूरी को तय करने के लिए उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर चले. इसके बाद बीमार महिला को मदकोट से वाहन से जिला अस्पताल भेजा गया.

पहाड़ की पीड़ा! एक कहानी, दो तस्वीरें (ETV Bharat)

बताया गया कि मुनस्यारी के गांधीनगर गांव निवासी सरुली देवी (50) के पेट में अचानक तेज दर्द हुआ. गांव में उपचार की कोई सुविधा नहीं है. ऐसे में परिजनों के अनुरोध पर गांव के युवा जुटे और बीमार महिला को डोली में बिठाकर बेहद कठिन रास्ते से होते हुए सड़क तक पहुंचाया. पहले बीमार महिला को मदकोट के रास्ते 28 किमी दूर मुनस्यारी स्वास्थ्य केंद्र में दिखाया. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए. सीमांत मुनस्यारी ब्लाक का गांधीनगर गांव आजादी के सात दशक बाद भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है. विडंबना यह है कि गांधीनगर गांव देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नरीराम का गांव है.

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गांधीनगर गांव में डोली के सहारे मरीज (ETV Bharat)
गांधीनगर गांव की ग्राम प्रधान तारा विश्वकर्मा कहती हैं गांव में लगभग 250 परिवार निवास करते हैं. उनके गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी सुविधाओं का अभाव है. उनका कहना है कि गांव तक सड़क बननी चाहिए. जिससे ग्रामीणों को इस तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े. पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने बताया कई बार सड़क की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, मगर अभी तक हालात नहीं बदले हैं.

ऐसी ही मामला उत्तरकाशी का भी है. उत्तरकाशी जिले के पंचगांई की पट्टी सावणी और सटूड़ी गांव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाये हैं. सड़क सुविधा के अभाव का खामियाजा सटूड़ी के 72 परिवार आज भी भुगतने को मजबूर हैं. हालात इस कदर हैं कि गांव की आवाजाही रूपिन नदी पर बनी जर्जर लकड़ी की अस्थायी पुलिया पर ही निर्भर है. यह हर वर्ष बरसात में नदी के उफान से बह जाती है.

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उत्तरकाशी में सड़क ही गायब (ETV Bharat)

ग्राम प्रधान सुरेंद्र रावत ने बताया वर्ष 2014-15 में लोनिवि द्वारा झूला पुल व सड़क निर्माण का प्राक्कलन शासन को भेजा गया था. वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ने खेड़ा से सटूड़ी–सांवणी तक पांच किलोमीटर मोटर मार्ग निर्माण की घोषणा भी की. दो वर्ष पूर्व लोनिवि द्वारा सड़क का सर्वेक्षण कर भूमि प्रतिकर भी वितरित किया गया, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है.उन्होंने कहा सड़क निर्माण में हो रही देरी से ग्रामीणों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी: इस संबंध में पीएमजीएसवाई के कनिष्ठ अभियंता अनंतराम शर्मा ने बताया मोटर मार्ग को लेकर ग्रामीणों के अलग-अलग सुझाव सामने आ रहे हैं. कुछ ग्रामीण पुराने सर्वे के अनुसार बैंचा पुल से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ ग्रामीण सुनकुंडी से सड़क निर्माण के पक्ष में हैं. प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेज दिया गया है.

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