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पिपरा कोठी में वाटर पार्क के लिए जमीन अधिग्रहण पर बवाल, सांसद सुधाकर सिंह ने खेत जोतकर जताया विरोध

पिपरा कोठी में वाटर पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हुआ, सुधाकर सिंह ने भी आंदोलन में पहुंचे. पढ़ें-

खुद ट्रैक्टर चलाकर सुधाकर सिंह ने किया विरोध
खुद ट्रैक्टर चलाकर सुधाकर सिंह ने किया विरोध (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 3, 2026 at 3:20 PM IST

5 Min Read
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मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के पिपरा कोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव गहराता जा रहा है. अपनी पुश्तैनी और खेती योग्य जमीन बचाने की मांग को लेकर किसान एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं. आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. इस दौरान जोरदार हंगामा भी देखने को मिला.

प्रदर्शन में शामिल हुए आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह : शुक्रवार को पूर्व मंत्री एवं विधायक सुधाकर सिंह आंदोलन में शामिल हुए और सरकार पर किसानों की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया.

पिपरा कोठी में किसान आंदोलन में बवाल (ETV Bharat)

'जमीन हमारी, नहीं चलेगा जबरन अधिग्रहण' के लगे नारे : आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने "जमीन हमारी है, किसी की जागीर नहीं", "नहीं चाहिए वाटर पार्क, बचाओ हमारी खेती" और "जबरन भूमि अधिग्रहण बंद करो" जैसे नारे लगाए.

सरकार पर किसानों की जमीन छीनने का आरोप : किसानों का कहना है कि वे वर्षों से इसी जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं और यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है. प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनने का प्रयास कर रही है.

'किसी कीमत पर भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं' : सुधाकर सिंह ने कहा कि किसानों की सहमति के बिना किसी भी कीमत पर भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा. उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसानों की राय और अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती. यदि सरकार ने जबरदस्ती भूमि अधिग्रहण की कोशिश की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

भूमि अधिग्रहण का विरोध करते सुधाकर सिंह
भूमि अधिग्रहण का विरोध करते सुधाकर सिंह (ETV Bharat)

22 जून की पुलिस कार्रवाई का भी उठाया मुद्दा : सुधाकर सिंह ने 22 जून 2026 की घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अपनी जमीन बचाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से खेतों में बैठे किसानों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया था. उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई किसान और ग्रामीण घायल हुए. उन्होंने कहा कि अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने की मांग करना कोई अपराध नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

जमाबंदी रद्द करने और नापी शुरू करने का आरोप : किसानों का आरोप है कि जिस भूमि पर वाटर पार्क बनाने की योजना है, वह वर्षों से उनकी खेती योग्य जमीन है. उनका कहना है कि पहले उनकी जमाबंदी रद्द कर दी गई और इसके बाद भूमि की नापी का काम शुरू कर दिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और सहमति की प्रक्रिया पूरी किए उन पर जमीन खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है.

'खेती ही आजीविका का आधार' : प्रदर्शन में शामिल किसानों ने बताया कि जब प्रशासन भूमि सर्वेक्षण के लिए पहुंचा था, तब बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी जमीन बचाने के लिए खेतों में लेट गए थे. उनका कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का आधार है और जमीन चली गई तो उनके सामने रोजी रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा.

सरकार पर किसानों की जमीन छीनने का आरोप
सरकार पर किसानों की जमीन छीनने का आरोप (ETV Bharat)

'विकास चाहिए, लेकिन किसानों की कीमत पर नहीं' : आंदोलनकारी किसानों ने कहा कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन छीनना स्वीकार नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि यदि सरकार कोई परियोजना लागू करना चाहती है तो पहले किसानों से संवाद करे, उनकी सहमति प्राप्त करे और कानून के अनुरूप सभी प्रक्रियाओं का पालन करे.

''किसान सभा किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी. यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो इस आंदोलन को पूरे बिहार में व्यापक रूप दिया जाएगा. किसान शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखें.''- सुधाकर सिंह, आरजेडी सांसद

प्रदर्शन में शामिल हुए आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह
प्रदर्शन में शामिल हुए आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह (ETV Bharat)

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार : फिलहाल पिपराकोठी का भूमि विवाद एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है. किसान भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकने, जमाबंदी बहाल करने और 22 जून की पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हैं. वहीं, इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

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