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कोंडागांव के कोनगुड़ में गारमेंट फैक्ट्री से बदली तस्वीर, आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार

गारमेंट फैक्ट्री में शुरुआती तौर पर 100 लोग काम कर रहे हैं. दूसरा यूनिट शुरू करने की भी चर्चा है. अनुज कुमार नहारिया की रिपोर्ट

KONDAGAON EMPLOYMENT
कोंडागांव गारमेंट फैक्ट्री (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 24, 2026 at 2:02 PM IST

4 Min Read
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कोंडागांव: जिले के सुदूरवर्ती ग्राम कोनगुड़ में गार्मेंट फैक्ट्री का शुभारंभ किया गया है. इस गारमेंट फैक्ट्री की खास बात है कि यहां स्थानीय महिलाओं, युवाओं के साथ साथ आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार का अवसर मिल रहा है.

गारमेंट फैक्ट्री में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार

नीति आयोग से मिले करीब 5 करोड़ रुपये की राशि से गार्मेंट फैक्ट्री तैयार की गई है. रविवार को कांकेर सांसद भोजराज नाग, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित जिला प्रशासन की टीम की मौजूदगी में फैक्टी का शुभारंभ किया गया. फैक्ट्री में काम करने वाले कुछ आत्मसमर्पित नक्सली कभी इसी इलाके में हथियार उठाकर नक्सली गतिविधियों से जुड़े हुए थे, लेकिन अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर रोजगार को अपना भविष्य बनाया है.

कोंडागांव गारमेंट फैक्ट्री में सरेंडर नक्सलियों को रोजगार (ETV Bharat Chhattisgarh)

नक्सली कमांडर रजनु कोर्राम और कुलसाय कावड़े ने बताया कि साल 2013 में उन्होंने नक्सल संगठन ज्वाइन किया. साल 2025 तक नक्सल संगठन से जुड़े रहे. बस्तर के सभी जिलों में सक्रिय रहे. कई नक्सली घटनाओं में भी शामिल रहे. साल 2025 में सरकार की पुर्नवास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया था. अब अपने गांव में ही गारमेंट्स फैक्ट्री में सिलाई सीखने का मौका मिल रहा है. सरेंडर नक्सलियों ने सरकार को धन्यवाद दिया है.

पनुर्वास के जरिए इस गारमेंट फैक्ट्री में काम मिला है. हमारे साथियों के लिए भी सरकार काम करें तो बहुत अच्छा रहेगा. अभी बहुत अच्छा लग रहा है. पहले खाना नहीं मिलता था. सोने को नहीं मिलता था, हमेशा सिर्फ ये चिंता लगी रहती थी कि कहीं पुलिस न आ जाए- रजनु कोर्राम, पुनर्वासित नक्सली

नक्सलमुक्त क्षेत्र में समाधान शिविर और गारमेंट फैक्ट्री का शुभारंभ

सांसद भोजराज नाग ने कहा- गार्मेंट फैक्ट्री के संचालन से क्षेत्र के स्थानीय लोगों को अपने ही गांव और क्षेत्र में रोजगार का अवसर मिल रहा है. इससे महिलाएं और युवा आत्मनिर्भर बनेंगे, साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों को भी रोजगार के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा. प्रशासन का उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में रोजगार के साधन विकसित कर लोगों को स्थायी रूप से विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है.

नक्सलवाद मुक्त होने के बाद पहली बार कोनगुड़ में जिला स्तरीय समाधान शिविर का आय़ोजन किया गया. गारमेंट फैक्ट्री में सरेंडर नक्सली और अन्य युवक युवती सिलाई का कम सीख रहे हैं. आने वाले समय में ये युवा आत्मनिर्भर होकर भारत देश को विकसित राष्ट्र बनाने के पीएम मोदी के सपने को पूरा करेंगे -भोजराज नाग, सांसद कांकेर लोकसभा

स्थानीय स्तर पर रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा- जब मैं कोंडागांव में कलेक्टर के रूप में पदस्थ था, उस दौरान नीति आयोग की ओर से जिले को 10 करोड़ रुपये की राशि मिली थी. उसी समय इस गार्मेंट फैक्ट्री की नींव रखी गई थी और अब इसका विधिवत संचालन शुरू हो गया है. आने वाले समय में कोनगुड़ और आसपास के लोगों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के और अधिक अवसर पैदा होंगे. यह पहल सुदूर क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगी.

रजनू कभी इस क्षेत्र में आतंक का पर्याय हुआ करता था. बहकावे में आकर नक्सल संगठन ज्वाइन किया. हमारा ही भाई बंधू है. आज ये कह रहे हैं कि दोबारा कभी उस तरफ नहीं जाना है- नीलकंठ टेकाम, विधायक

कोंडागांव कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि गारमेंट फैक्ट्री अंडर ट्रेनिंग है. कुछ दिनों बाद इसमें प्रोडेक्शन शुरू होगा. सरेंडर नक्सली पुरुषों को भी इस गारमेंट फैक्ट्री में ट्रेनिंग दी जा रही है. इस गारमेंट फैक्ट्री में 340 लोगों को रोजगार की व्यवस्था है. गांव में ही ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा.

वहीं कोंडागांव एसपी पंकज चंद्रा ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनुर्वास के लाभ के अंतर्गत रोजगार का जरिया बन रहा है. यहां अलग अलग थानों के 154 सरेंडर कैडर को लाया गया था, इस अभियान से उन्हें जोड़ा गया है. प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़ने पर दूसरा यूनिट भी शुरू किया जाएगा. प्रशिक्षण लेने वाले कमांडर कैडर के नक्सली रहे हैं.

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