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फिजियोथेरेपी का चमत्कार, मुंह के कैंसर से जाम हुआ जबड़ा फिर खुला, खाना खाने लगा मरीज

करीब तीन महीने के उपचार के बाद अब मरीज का मुंह इतना खुलने लगा है कि उसमें जा सकती हैं तीन उंगलियां.

locked jaw opened physiotherapy
कैंसर से जाम हुआ जबड़ा फिर खुला (Getty Images)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 1, 2026 at 8:10 PM IST

3 Min Read
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भोपाल: मुंह के कैंसर के कारण पूरी तरह जाम हो चुके जबड़े को खोलने में जहां आधुनिक मेडिकल साइंस के तमाम प्रयास सीमित साबित हुए, वहीं फिजियोथेरेपी ने उम्मीद की नई राह दिखाई है. राजधानी के एक 50 वर्षीय मरीज का मुंह, जो कैंसर सर्जरी और रेडिएशन के बाद पूरी तरह बंद हो गया था, अब विशेष फिजियोथेरेपी उपचार से फिर से खुलने लगा है. मरीज अब खुद भोजन करने में सक्षम हो गया है.

तंबाकू खाने से हो गया था कैंसर

राजधानी के रहने वाले 50 वर्षीय मरीज कई वर्षों से तंबाकू का सेवन कर रहे थे. लगातार तंबाकू खाने से उनके मुंह में छाला हुआ, जो समय के साथ मुंह के कैंसर में बदल गया. कैंसर की चपेट में पूरा जबड़ा आ गया. इलाज के लिए मरीज मुंबई के एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां सर्जरी कर कैंसर की गांठ निकाली गई और इसके बाद रेडिएशन थैरेपी दी गई.

खाना-पीना हो गया था मुश्किल

रेडिएशन के दुष्प्रभाव से मरीज का जबड़ा पूरी तरह जाम हो गया. हालात इतने गंभीर हो गए कि मरीज न तो खाना खा पा रहे थे और न ही ठीक से पानी पी पा रहे थे. कई महीनों तक परेशानी झेलने के बाद मरीज इंदौर में एक मैक्सिलोफेशियल सर्जन से मिले. यहां जबड़े की ग्राफ्टिंग की गई, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया. इसके बाद मरीज को फिजियोथेरेपी की सलाह दी गई और उन्हें डॉ. सुनील पांडे के पास रेफर किया गया.

तीन महीने तक चली फिजियोथेरेपी

डॉ. सुनील पांडे ने मरीज की स्थिति को देखते हुए विशेष फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट सेशन तैयार किए. नियमित व्यायाम और थेरेपी के जरिए जबड़े की जकड़न को धीरे-धीरे कम किया गया. करीब तीन महीने के उपचार के बाद अब मरीज का मुंह इतना खुलने लगा है कि उसमें तीन उंगलियां जा सकती हैं, जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.

डॉ. सुनील पांडे ने बताया कि कई मरीजों में ओरल कैंसर के ऑपरेशन और रेडिएशन के बाद टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट जाम होने की समस्या हो जाती है. इसे ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस भी कहा जाता है. इस स्थिति में मुंह के अंदर के सॉफ्ट टिश्यू, लार ग्रंथियां, मांसपेशियां और टीएमजे जॉइंट का लचीलापन कम या खत्म हो जाता है. डॉ. पांडे बताया कि फिजियोथेरेपी के माध्यम से जबड़े की नियमित कसरत कराई जाए तो मांसपेशियों और जाम हो चुके जॉइंट को फिर से सक्रिय किया जा सकता है.