मैं 2 किमी दूर से मटकी भरकर पानी लाती थी, विभाग की परफॉर्मेंस के साथ पीएचई मंत्री ने सुनाई अपनी कहानी
संपतिया उईके बोलीं- गांव में पानी भरने जाने वाली महिलाओं के बाल तक झड़ जाते थे, आज 81 लाख परिवारों के घर पहुंचा जल

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 24, 2025 at 9:07 AM IST
भोपाल : '' वो दिन भी मुझे याद है, जब महिलाएं डेढ़-दो किलोमीटर दूर से कुंए और तालाब से पानी लाती थीं. सिर पर रोज मटकी रखकर लाने में बाल तक झड़ जाते थे. मैं भी उन्हीं में शामिल रही हूं.'' ये कहना था मध्य प्रदेश सरकार की पीएचई मंत्री संपतिया उईके का. पीएचई मंत्री ने ये बातें विभाग की परफॉर्मेंस रिपोर्ट बताते वक्त पत्रकारों से साझा की और तुलनात्मक ढंग से बताया कि कैसे उस दौर में पीने के पानी के लिए भी दूर-दूर जाना पड़ता था और आज सरकर हर घर नल जल लेकर आई है.
आज घर के आंगन तक पहुंच रहा पानी
संपतिया उईके ने कहा,'' मैं भी उस गांव की रहने वाली हूं, हम लोगों के यहां कोई पानी का संसाधन नहीं होता था. तालाब का पानी ही पीते थे और जंगलों में रहते थे. दो किलोमीटर दूर से एक गुंडी के उपर एक गुंडी (बर्तन) रखकर दो किलोमीटर दूर से पानी लेकर आती थी. लेकिन आज मध्यप्रदेश में घर बैठे आंगन में शुद्ध पानी मिल रहा है, जिससे महिलाओं को बड़ी बीमारियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है. इससे महिलाओं और बच्चियों का समय भी बच रहा है.''

मंगलवार को मंत्री उइके ने पीएचई विभाग के कार्यों का लेखा-जोखा पत्रकार वार्ता में सामने रखा. इस दौरान उन्होंने विभाग द्वारा बीते 2 वर्षों में किए गए कार्यों और आगामी 3 वर्षों के रोड मैप पर चर्चा की.
81 लाख परिवारों के घर पहुंचा जल
मंत्री उइके ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 81 लाख 21 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जो कुल लक्षित परिवारों का लगभग 73 प्रतिशत है. प्रदेश के 10 हजार 440 ग्रामों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है और भारत सरकार द्वारा बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 13 लाख 69 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं.
मोबाइल ऐप से की जा रही निगरानी
मंत्री उइके ने बताया कि जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य की समस्त प्रयोगशालाओं का शत-प्रतिशत एनएबीएल प्रमाणीकरण कराया गया है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बना है. मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में 156 प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है. प्रदेश में 10 लाख से अधिक जल नमूनों का परीक्षण किया गया है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है. मंत्री ने बताया कि योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता के लिए जल रेखा मोबाइल ऐप, जलदर्पण पोर्टल, शत-प्रतिशत जियो टैगिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और ई-प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है.
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके की जल भवन, भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता#डॉ_मोहन_यादव_का_विकसित_MP@SampatiyaUikey #अभ्युदय_मध्यप्रदेशhttps://t.co/D6x0oEU8P4
— Public Health Engineering Department, MP (@minphemp) December 23, 2025
ग्रामीण क्षेत्रों में 24x7 होगी पानी की सप्लाई
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में पायलट आधार पर 64 ग्रामों में 24Û7 जल प्रदाय की व्यवस्था लागू की गई है. इसके साथ ही प्रदेश में 15 हजार 238 नवीन हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं. उज्जैन संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों में एकल नल जल योजनाओं का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है, जिससे सात लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है. मंत्री ने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में हर घर नल और 24 घंटे जल की व्यवस्था की जा रही है.
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मंत्री ने बताया अगले 3 वर्षों का लक्ष्य
पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने कहा, '' समूह जल प्रदाय योजनाओं में बिजली की पूर्ति के लिए नवकरणीय ऊर्जा आधारित प्लांट स्थापित कर 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना की कार्ययोजना तैयार की गई है. आगामी तीन वर्षों में सभी ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को क्रियाशील नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे.''

