जानें कब है फाल्गुन अमावस्या? पितरों की आत्मा की शांति के लिए करें ये विशेष उपाय
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों के आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है. आईए जानते हैं कब है अमावस्या...

Published : February 13, 2026 at 2:11 PM IST
करनाल: सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है. फाल्गुन महीने की अमावस्या का महत्व और भी अधिक माना जाता है. इस बार फाल्गुन अमावस्या 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे शुरू होगी और 17 फरवरी को शाम 5:30 बजे समाप्त होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या को उदया तिथि के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए इस बार इसे 17 फरवरी को मुख्य रूप से मनाया जाएगा.
पवित्र नदी में स्नान का महत्व: कुरुक्षेत्र के पंडित विश्वनाथ के अनुसार फाल्गुन अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है. गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:16 से लेकर 6:07 तक है. वहीं, अमृत कल का शुभ मुहूर्त सुबह 10:39 से दोपहर 12:00 तक रहेगा.
पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपाय: फाल्गुन अमावस्या पर सबसे अधिक महत्व पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा और तर्पण में है. पिंडदान और तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख समृद्धि आती है. पवित्र नदी में स्नान करते समय काले तिल जल में अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है. इससे पितरों की प्यास बुझती है और वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं.
दान का महत्व:अमावस्या के दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देने से पितृ दोष दूर होता है. इस दिन काले तिल, गुड़, अन्न और गर्म कपड़े दान करना सबसे अधिक लाभकारी है. इसके अलावा, कौवों और कुत्तों को भोजन देने से भी पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
पीपल के पेड़ की पूजा: फाल्गुन अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा भी विशेष महत्व रखती है. पीपल के पेड़ में देवी-देवताओं और पितरों का वास माना जाता है. इस दिन पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं और कच्चा दूध अर्पित करें. पेड़ की परिक्रमा करके सुख-समृद्धि की कामना करना शुभ माना जाता है.
भगवान विष्णु की पूजा: इस अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ है. विष्णुजी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. इसके साथ ही गाय को भोजन खिलाना भी शुभ होता है. ऐसा करने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व: फाल्गुन अमावस्या पितरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या मानी जाती है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति और पितृदोष से मुक्ति के लिए विशेष विधि-विधान से पूजा और तर्पण किए जाते हैं. साथ ही इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से धार्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टियों से लाभ होता है.
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