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मौत हो तो ऐसी... रूपनगर के दविंदर ने मरने के बाद 6 लोगों को दी नई जिंदगी

रूपनगर के दविंदर सिंह के अंगदान से छह लोगों को नई जिन्दगी मिली.

PGIMER CHANDIGARH ORGAN DONATION
मौत हो तो ऐसी (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 28, 2026 at 9:49 AM IST

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चंडीगढ़: चंडीगढ़ PGIMER में इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी. दरअसल, रूपनगर के 36 वर्षीय दविंदर सिंह के निधन के बाद उनके परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया. इस फैसले से चार लोगों को नया जीवन मिला, जबकि दो लोगों की आंखों की रोशनी वापस आई. परिवार के इस फैसले से कुल 6 लोगों को नया जीवन मिला है.

सड़क हादसे में गई जान: पेशे से इलेक्ट्रीशियन दविंदर सिंह 21 फरवरी को सड़क हादसे का शिकार हो गए. उनकी बाइक को एक स्कूटी ने टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. पहले उन्हें रोपड़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर PGIMER रेफर किया गया. डॉक्टरों ने लगातार चार दिन तक प्रयास किए. हालांकि 25 फरवरी को उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया गया.

दुख के बीच लिया फैसला: ऐसे कठिन समय में दविंदर की पत्नी गुरप्रीत कौर और पिता अमर सिंह ने बड़ा निर्णय लिया. उन्होंने अंगदान के लिए सहमति दे दी. इस बारे में परिवार का कहना था कि अगर दविंदर वापस नहीं आ सकते, तो कम से कम उनके अंग किसी और की जिंदगी बचा लें. यह फैसला भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने दूसरों की खुशियों को प्राथमिकता दी.

इन लोगों को मिली नई जिन्दगी: परिवार की सहमति के बाद दविंदर का लीवर ILBS दिल्ली भेजा गया, जहां 54 वर्षीय मरीज का सफल ट्रांसप्लांट हुआ. उनके फेफड़े को गुरुग्राम के एक अस्पताल में 72 वर्षीय मरीज को लगाए गए. समय की संवेदनशीलता को देखते हुए अंगों को फ्लाइट से भेजा गया, ताकि सर्जरी में देरी न हो और मरीजों को समय पर नई जिंदगी मिल सके. वहीं, PGIMER में ही 29 वर्षीय युवक को किडनी और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे उसे डायलिसिस और इंसुलिन पर निर्भरता से राहत मिलेगी. दूसरी किडनी 37 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित की गई.वहीं, उनकी आंखों की कॉर्निया से दो लोगों की रोशनी लौटेगी.डॉक्टरों ने पूरी प्रक्रिया सावधानीपूर्वक पूरी की.

पिता बोले- "दूसरों की जिन्दगी में जिंदा रहेगा बेटा": दविंदर के पिता ने भावुक होकर कहा कि, "बेटे को खोने का दुख कभी कम नहीं होगा, लेकिन यह संतोष है कि वह दूसरों की जिंदगी में जीवित रहेगा." वहीं, पत्नी ने भी माना कि फैसला आसान नहीं था, पर सही लगा. एक परिवार के साहस ने छह जिंदगियों में नई सुबह ला दी और अंगदान के महत्व को फिर से उजागर कर दिया.

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