हाल-ए-रोहतास! गंदगी और शहर का ट्रैफिक जाम, निपटने का क्या है इंतजाम?
रोहतास में विभिन्न गली-मोहल्लों में कचरे का ढेर लगा है. वहीं ट्रैफिक जाम से भी लोग परेशान हैं. पढ़ें

Published : February 14, 2026 at 10:28 AM IST
रिपोर्ट: रवि कुमार
रोहतास: बिहार के रोहतास के विभिन्न गली मोहल्लों में कूड़े का ढेर लगा है. कचरा का उठाव नहीं होने से जगह-जगह गंदगी का अंबार लगने से लोगों का सांस लेना भी दूभर हो रहा है. वहीं ट्रैफिक जाम की समस्या से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है. ऑफिस और स्कूल जाने के समय शहर के सभी मुख्य मार्ग जाम हो जाते हैं. इस दौरान निकलने वाले लोग घंटों जाम में फंस रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी एंबुलेंस को पास देने को लेकर होती है.
रोहतास का हाल बेहाल: इस जिले में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. यही कारण है कि यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं का दंश झेल रहे हैं. तकरीबन 30 की लाख आबादी वाला यह जिला कई ऐतिहासिक व धार्मिक धरहरों के लिए प्रसिद्ध है. पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण रोहतास जिला भारत के मानचित्र में विशेश स्थान बना सकता है, लेकिन फिलहाल यहां के लोग मूलभूत समस्याओं से जद्दोजहद कर रहे हैं.
ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन: शेरशाह सूरी के मकबरे से लेकर प्राचीन रोहतास किला, चौरासन मंदिर, गुप्ता धाम की गुफाएं, ताराचण्डी धाम, तुतला भवानी धाम, शेरगढ़ किला ,पायलट बाबा का आश्रम, खरवारों के राजा के समय का बाबा झारखण्डी महादेव मंदिर, सोन नदी का किनारा, ब्रिटिश काल का एनी कट, दुर्गावती डैम, इंद्रपुरी डैम जिले में खास है. इन पर्यटक स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन ट्रैफिक जाम और गंदगी के अलावा अन्य समस्याओं ने जिले की विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया है.

डालमियानगर और जलजमाव: रोहतास के डालमियानगर जैसे ऐतिहासिक औद्योगिक क्षेत्र में जल निकासी की खराब स्थिति से स्थानीय लोग खासे परेशान हैं. इसके समाधान के लिए नगर परिषद, डेहर डालमियानगर के स्तर पर आधुनिक सीवरेद सिस्टम और पंपिंग स्टेशनों की जरूरत है.

स्कूली बच्चों के लिए ट्रैफिक बनी मुसीबत: शहर के लोग बताते हैं कि जिले की सबसे बड़ी समस्या जाम की है. यहां जाम की समस्या को लेकर हमेशा दो-चार होना पड़ता है. लोग बताते हैं कि घर से निकलते समय भगवान का नाम लेकर निकलना पड़ता है, ताकि समय पर गंतव्य तक पहुंचा जा सके. सबसे बड़ी परेशानी तो स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है. कई बार तो ऐसा होता है कि जाम की समस्या इतनी विकराल हो जाती है कि स्कूली बच्चे जाम में फंसकर बिलबिलाने लगते हैं.

हाईवे पर हमेशा रहता है जाम: रोहतास की महिला चिकित्सक डॉक्टर नीलम बताती हैं कि डेहरी में ही उनका क्लीनिक है. जब वह अपने घर से आती हैं तो कभी हाईवे पर जाम का सामना करना पड़ जाता है. वहीं पाली मोड़ के पास तो अक्सर जान की समस्या लगी रहती है.
"खानापूर्ति के नाम पर ट्रैफिक पुलिस को लगाया तो गया है पर यह लोग कम ही दिखाई देते हैं. वही कुछ यही हाल शहर का हृदय कहे जाने वाले थाने चौक का भी है, जहां अक्सर ट्रैफिक पुलिस नदारत होती है. ऐसे में अगर मुख्य बाजार होते अंबेडकर चौक जाना पड़े तो आप सौ बार सोचने पर मजबूर होंगे. क्योंकि यह रास्ता ठेले, खोमचे वालों ने अतिक्रमण कर लिया है."- डॉ नीलम, स्थानीय

अतिक्रमण के कारण जाम: उन्होंने आगे कहा कि सड़क के डिवाइडर के दोनों ओर और कट वाले रास्ते पर भी ठेले वाले इस कदर कब्जा जमाए होते हैं कि अगर आप उन्हें जरा भी हटने को कहे तो आपसे भिड़ने को तैयार होंगे. हां इतना जरूर है कि अगर किसी वीआईपी का आगमन हो तो सड़कें एकदम चौड़ी हो जाती हैं या फिर हूटर बजाती साहबों की गाड़ियां आराम से निकल जाती हैं. परेशानी आम लोगों को होती है. कभी-कभी तो जाम में घंटों एंबुलेंस भी फंस जाते हैं.

"स्थानीय विधायक और सांसद का यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि मूलभूत समस्याओं से जनता को निजात दिलाने के लिए पहल करें. प्रशासनिक अधिकारी भी इस जवाबदेही से पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं. ट्रैफिक जाम, सड़कों पर अतिक्रमण से जनता पस्त है और अधिकारी अपने आप में मस्त हैं."- डॉ नीलम, स्थानीय
खुले नाले से बदबू: स्थानीय महिला सुनीता यादव कहती हैं कि मूलभूत सुविधाएं पाने का हक हर आम नागरिक को है. शहर में कई खुले नाले पड़े हैं, जिससे आए दिन बड़ी घटना होने की आशंका बनी होती है. कई मोहल्ले में जलजमाव का नजारा होता है. हालांकि समय-समय पर बेहतर सुविधाएं और साफ सफाई का अधिकारी दावा तो जरूर करते हैं, पर यह नाकाफी है.

बंद पड़ा है रेलवे ओवरब्रिज: सुनीता यादव कहती है कि कई सालों से बंद पड़ा रेलवे ओवरब्रिज भी आज तक चालू नहीं हो पाया है. सिर्फ जल्द चालू होने के वादे किए जाते हैं, लेकिन इसके लिए पहल कोई जनप्रतिनिधि नहीं करता है. गंतव्य तक जाने के लिए 3 किलोमीटर का फासला तय करना पड़ता है.
सोन नदी के किनारे से वैकल्पिक रास्ता: वहीं जिस सोन नदी के किनारे से वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है, वहां से रात में आने-जाने के क्रम में डर लगता है. यह रास्ता संकीर्ण है, जिसके कारण बड़े वाहनों का दबाव नहीं झेल सकता है. अब ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक परेशानी झेलनी होगी? जवाब किसी के पास नहीं है.
"कुछ यही हाल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट नल जल योजना का है. सात निश्चय योजना के तहत इस योजना को प्राथमिकता दी गई है. नगर और पंचायत में कई ऐसे घर हैं, जहां आज तक नल का जल नहीं पहुंचा है.कई जगहों पर तो गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं और सिर्फ नल का टोटी लगा कर छोड़ दिया गया है."- सुनीता यादव, स्थानीय निवासी
रोहतास चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सच्चिदानंद प्रसाद बताते हैं कि मुख्यतः यहां चार बड़ी समस्याएं ट्रैफिक जाम, सड़कों का चौड़ीकरण, वेंडर जोन और उद्योग हैं. नई सरकार के गठन के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उनका भाग्य चमकेगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं बल्कि निराशा ही हाथ लगी है. शहरों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है. सड़कें संकरी होती जा रही हैं.
"सड़क चौड़ीकरण को लेकर नापी तक हो गई, लेकिन फंड रिलीज नहीं हो रहा है. कई बार स्थानीय विधायक से बात भी की गई लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया. थक हारकर किसी तरह पत्र विभागीय मंत्री को भेजी गई, लेकिन आज भी संचिका पड़ी हुई है. चार करोड़ 44 लाख का फंड रिलीज होगा तो काम होगा पर कोई सुध लेने वाला नहीं है."- सच्चिदानंद प्रसाद, अध्यक्ष, रोहतास डिस्ट्रिक्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स
ठंडे बस्ते में वेंडिंग जोन का निर्माण कार्य: सच्चिदानंद प्रसाद कहते है कि सिंचाई विभाग के मनमाने रवैया के कारण वेंडिंग जोन का निर्माण भी ठंडे बस्ते में है. वेंडर जोन नहीं होने से अतिक्रमणकारियों और ठेले वालों का सड़कों पर अवैध कब्जा है, जिससे जाम की समस्या लगातार बनी रहती है. वेंडर जोन की जमीन आवंटन को लेकर भी रोहतास जिला चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने कई बार अधिकारियों से बात की, लेकिन किसी ने दिलचस्पी नहीं ली.

सच्चिदानंद प्रसाद कहते हैं कि सासाराम में वेंडिंग जोन को लेकर नई एसडीएम की पहल ने वहां की तस्वीर बदल दी है. पहले वेंडर वहां भी वेंडिंग जोन में नहीं जाना चाहते थे, लेकिन प्रयास के बाद अब सब सही हुआ है. बिक्रमगंज और डेहरी में हाल उल्टा है. किसी भी कार्य को करने के लिए इच्छा शक्ति की जरूरत होती है जिसका अधिकारियों में अभाव है. इसका जीता जागता उदाहरण डेहरी शहर में सिंचाई विभाग की कई एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है, जिसे हटाने में सिंचाई विभाग की अधिकारियों के पसीने छूटने लगते हैं.
"भूमाफियाओं ने तो सिंचाई विभाग की जमीनों को बेच भी दिया है, लेकिन इन्हें परवाह नहीं है. हालांकि डेहरी एसडीएम ने टेंपरेरी वेडिंग जोन का निर्माण तिकोनिया पर स्थित खाली जगह पर कराया है. प्रशासन के निर्देश के बाद भी वहां ठेले वाले जाने को तैयार नहीं है."- सच्चिदानंद प्रसाद, अध्यक्ष, रोहतास डिस्ट्रिक्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स
जिले में ट्रैफिक जाम के कारण: रोहतास में ट्रैफिक जाम की समस्या के पीछे कई कारण हैं. बुनियादी ढांचे और मरम्मत का कार्य जाम की समस्या का बड़ा कारण है. सोन नदी पर पुराने पुल की लगातार मरम्मत जाम का कारण है. एनएच 19 में वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं. वहीं सिक्स लेन निर्माण और डायवर्जन के कारण भी समस्या हो रही है. संकीर्ण सर्विस लेन भारी वाहनों का दबाव नहीं झेल पाते हैं और यातायात बाधित होता है.

प्राकृतिक और मौसमी कारण भी जाम होता है. भारी बारिश के दौरान हाईवे के सर्विस लेन और डायवर्जन में पानी भर जाता है. इसके चलते सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ हो जाती है, जिससे गाड़ियां फंस जाती है. इन सभी कारणों के साथ ही बढ़ती आबादी भी जाम का कारण है. आबादी के साथ ही गाड़ियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. वहीं सड़कों पर अतिक्रमण भी बढ़ रहे हैे.
रोहतास में गंदगी का कारण: सासाराम नगर निगम के पास कचरा निस्तारण के लिए स्थायी लैंडफिल साइट की कमी है. पूर्व में रेलवे स्टेडियम के पास कचरा डंप किया जाता था, लेकिन रेलवे की आपत्ति के बाद प्रशासन को नया स्थान खोजने में संघर्ष करना पड़ा. प्रशासन ने लगभग 5 करोड़ के बजट के साथ वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की योजना प्रस्तावित की थी, लेकिन धरातल पर इनके कार्यान्वयन में देरी और भूमि विवाद समस्या बनी हुई है.

दोषपूर्ण जल निकासी प्रणाली से भी शहर की स्थिति नारकीय हो गई है. मात्र 20 प्रतिशत क्षेत्र ही नालियों से ढका है, जिनमें से कई कच्ची हैं. नालियां जाम होने के चलते गंगा पानी गलियों में बहता है, जिससे लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो जाता है और लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में आते हैं. साथ ही लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी ठोस कदम न उठाना इसका बड़ा कारण है.
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