सड़क पर धान रोपने लगे बिहार के लोग, जानें अनोखे विरोध प्रदर्शन का सच
कैमूर और गया में लोगों का अनोखा विरोध प्रदर्शन, नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर ही शुरू की धान की रोपाई. रिपोर्ट-विशाल कुमार और रत्नेश कुमार

Published : August 31, 2026 at 1:09 PM IST
कैमूर/गया: दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) से सटी कैमूर जिले के मोहनिया की एक सर्विस रोड पिछले करीब दो महीने से जलजमाव और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण झील में तब्दील हो गई है. सड़क पर लगातार पानी जमा रहने के कारण स्थानीय लोगों, राहगीरों, वाहन चालकों और दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
जलजमाव बना दुर्घटना की वजह: स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होने के बाद स्थिति और भी खराब हो जाती है. सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें पानी भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता. ऐसे में दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. लोगों के अनुसार कई बार वाहन पानी और गड्ढों में फंसकर पलट चुके हैं.
सड़क पर पानी जमा होने से कारोबार भी प्रभावित: सर्विस रोड के किनारे बड़ी संख्या में दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान हैं, सड़क की बदहाल स्थिति का सीधा असर यहां के कारोबार पर पड़ रहा है. दुकानदारों का कहना है कि जलजमाव के कारण ग्राहक अपनी गाड़ियां लेकर दुकानों तक पहुंचने से कतराते हैं. वहीं कई जगह पानी इतना अधिक जमा है कि लोगों को दुकान तक पहुंचने के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है.
"पिछले करीब दो महीने से समस्या बनी हुई है, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने और सड़क की मरम्मत नहीं किए जाने के कारण पानी लंबे समय तक जमा रहता है, इससे सड़क भी लगातार खराब होती जा रही है."-व्यवसायी

नाराज लोगों ने सड़क पर ही रोप दी धान: समस्या के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं होने से नाराज स्थानीय लोगों ने रविवार को अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. लोगों ने जलजमाव वाली सर्विस रोड पर उतरकर पानी के बीच धान की रोपाई कर दी. धान की रोपाई कर रहे स्थानीय मखू मिस्त्री ने कहा कि जब सड़क पर महीनों से पानी जमा है और सड़क खेत का रूप ले चुकी है, तो अब यहां धान की फसल ही क्यों न उगा दी जाए.
"लगातार परेशानी के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है और ऐसा लगता है कि समस्या सुनने वाला कोई नहीं है. जब सड़क खेत बन ही गई है, तो इसमें धान ही रोप देते हैं."-मखू मिस्त्री, स्थानीय
ग्राहक के इंतजार में व्यवसायी: स्थानीय व्यवसायी दीपक कुमार ने कहा कि यह दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग के ठीक बगल की सर्विस रोड है, इसके बावजूद सड़क की हालत बेहद खराब है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से जलजमाव के कारण व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

"ग्राहक दुकानों तक आने से बच रहे हैं और वाहनों का आवागमन भी मुश्किल हो गया है. विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने सड़क की बदहाली और जलजमाव को लेकर जिम्मेदार विभाग एवं अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई. कई बार समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है."-दीपक कुमार, स्थानीय व्यवसायी
सड़क और नाले में अंतर करना मुश्किल: स्थानीय निवासी सुमित गुप्ता ने सड़क की स्थिति पर कहा कि एक तरफ विकसित भारत और बेहतर सड़कों की बातें की जा रही है, लेकिन मोहनिया में हाईवे से सटी सर्विस रोड की स्थिति ऐसी है कि सड़क और नाले में अंतर करना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि "दो महीने से लोग इस समस्या को झेल रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है."
स्थायी समाधान की मांग: स्थानीय लोगों ने NHAI, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों से सड़क पर जमा पानी की तत्काल निकासी कराने, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करने तथा क्षतिग्रस्त सड़क की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सड़क की स्थिति और खराब हो सकती है तथा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहेगी.

गया में विरोध का अनोखा अंदाज: वहीं गया में भी दर्जनों महिला-पुरुषों ने सड़क पर उतरकर धान की रोपनी शुरू कर दी. दरअसल इस गांव की सड़क जर्जर हालत में है. बड़े-बड़े गड्ढे में पानी और कीचड़ होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. करीब 500 घरों वाले इस गांव के लोग इस समस्या से निजात को लेकर गुहार लगा रहे हैं.
सड़क नहीं..यहां तो सिर्फ गड्ढे हैं: ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की स्थिति इतनी बदहाल है, कि रोज हादसे होते हैं और गिरकर रोजाना कोई न कोई घायल हो जाता है. यह सड़क एक किलोमीटर से भी अधिक लंबी है लेकिन इसकी जर्जर स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. अरसे से यह स्थिति बनी हुई है.
कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर जलजमाव: आक्रोशित ग्रामीणों ने धान की रोपनी सड़क पर की है और अपना विरोध जताया है. ग्रामीण अंजुमन के अनुसार स्टेट हाईवे 69 की मुख्य सड़क से रौना गांव तक करीब एक किलोमीटर तक कच्चा गड्ढे में तब्दील यह रास्ता है. यह रास्ता कई गांवों को और कई बाजारों को जोड़ता है. रोजाना सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण पैदल-बाइक से आवागमन करते हैं लेकिन सड़क खराब रहने के कारण भी गिर जाते हैं और घायल हो जाते हैं.
"सड़क की समस्या से हर कोई परेशान है. बच्चों को स्कूल जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बच्चे कीचड़-गंदे पानी और गड्ढों के बीच किसी तरह से स्कूल पहुंचते हैं. कई बच्चे तो गिरकर घायल हो जाते हैं. किसी की गांव में मौत हो जाती है, तो शवयात्रा के लिए श्मशान घाट तक ले जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है."-अंजुमन, ग्रामीण
दशकों पुरानी है यह समस्या: इस संबंध में पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी अवधेश पासवान ने बताया कि रौना गांव की समस्या दशकों पुरानी है. स्टेट हाईवे से यह कई किलोमीटर की दूरी को जोड़ता है लेकिन रौना गांव से निकलने वाली सड़क पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील है.
"बरसात के दिन में इस सड़क पर कीचड़ और पानी जमा रहता है. दलदल जैसी स्थिति बनी जाती है. यह सड़क हादसों का पैमाना बन चुकी है. इसका स्थाई समाधान जरूरी है. सड़क के साथ-साथ नाली का भी निर्माण होना चाहिए."-अवधेश पासवान, पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी
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