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जौनपुर के चार वन रेंजों को नई टिहरी में शामिल करने के प्रस्ताव पर उबाल, लोगों ने मसूरी में दिया धरना

जौनपुर विकासखण्ड की चार वन रेंजों को प्रस्तावित नई टिहरी (गुनिकिरेती) वन प्रभाग में शामिल किए का विरोध किया गया.

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स्थानीय लोगों ने वन विभाग के दफ्तर में दिया धरना. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 19, 2026 at 5:10 PM IST

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मसूरी: टिहरी जनपद के जौनपुर विकासखंड में वन विभाग के पुनर्गठन प्रस्ताव को लेकर जनाक्रोश उभरने लगा है. क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाली भद्रीगाड़, कैम्पटी, जौनपुर और देवलसारी रेंज को प्रस्तावित नई टिहरी वन प्रभाग (गुनिकिरेती) में शामिल करने की प्रक्रिया जनभावनाओं के विपरीत है.

जौनपुर विकासखण्ड की चार वन रेंजों को प्रस्तावित नई टिहरी (गुनिकिरेती) वन प्रभाग में शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर क्षेत्र में असंतोष गहराने लगा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने इसे जनभावनाओं के विपरीत बताया और बड़ी संख्या में मसूरी में वन विभाग कार्यलाय पहुंचे. यहां सभी ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इसी के साथ एसडीओ दिनेश प्रसाद नौटियाल के माध्यम से वन मंत्री सुबोध उनियाल को भेजा.

ज्ञापन में जौनपुर विकासखंड की चार वन रेंजों को प्रस्तावित नई टिहरी (गुनिकिरेती) वन प्रभाग में शामिल करने के प्रस्ताव को वापस लेने के लिये मांग की गई. उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांग को नहीं माना गया तो सरकार के खिलाफ बडा आंदोलन किया जायेगा.

जौनपुर के चार वन रेंजों को नई टिहरी में शामिल करने के प्रस्ताव पर उबाल, (ETV Bharat)

ज्ञापन में कहा गया है कि वन विभाग द्वारा प्रभागों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत वर्तमान में मसूरी वन प्रभाग की चारों रेंजों को नई टिहरी स्थित गुनिकिरेती वन प्रभाग में समाहित करने का प्रस्ताव है.

दूरी बनेगी सबसे बड़ी समस्या: जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जौनपुर विकासखण्ड के सुदूरवर्ती गांवों से गुनिकिरेती की दूरी लगभग 200 किलोमीटर या उससे अधिक पड़ती है. पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों में यह दूरी आमजन के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी. वन संबंधी कार्य जैसे निस्तारण, वन अधिकार, परमिट, आपत्तियां या अन्य विभागीय औपचारिकताओं के लिए ग्रामीणों को लंबी यात्रा करनी पड़ेगी. इससे समय और पैसे दोनों बर्बाद होगा.स्थानीय लोगों का तर्क है कि वर्तमान में मसूरी प्रभाग से प्रशासनिक समन्वय अपेक्षाकृत सुगम है.

जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप: प्रधान संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि बिना स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से व्यापक परामर्श किए इस तरह का पुनर्गठन क्षेत्र के हित में नहीं है. उनका आरोप है कि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर जनता की व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज किया जा रहा है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जौनपुर क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम है, जहां पहले से ही सड़क, संचार और परिवहन की सीमित सुविधाएं हैं. ऐसे में मुख्यालय की दूरी बढ़ने से समस्याएं और गहराएंगी.

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वन विभाग को दिया ज्ञापन. (ETV Bharat)

वन मंत्री से यथास्थिति बनाए रखने की मांग: ज्ञापन में मांग की गई है कि जौनपुर विकासखण्ड की चारों रेंज कृभद्रीगाड़, केम्पटी, जौनपुर और देवलसारी को पहले की तरह मसूरी वन प्रभाग में ही रखा जाए. संगठन का कहना है कि यथास्थिति बनाए रखना ही जनहित में उचित निर्णय होगा. क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा.

फिलहाल वन विभाग या शासन स्तर से इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि पुनर्गठन का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है. अब देखना होगा कि वन मंत्री सुबोध उनियाल इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या जौनपुर की चारों वन रेंजों को लेकर प्रस्तावित बदलाव पर पुनर्विचार किया जाता है या नहीं.

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