चीनी के बाद अब बढ़ी प्याज की कीमतें, झारखंड में आम आदमी की जेब पर दोहरी मार
झारखंड में प्याज की बढ़ती कीमतों से विक्रेता से लेकर आम लोग सभी परेशान हैं. रिपोर्ट - उपेंद्र कुमार.

Published : August 24, 2026 at 7:50 PM IST
|Updated : August 24, 2026 at 8:49 PM IST
रांची: देश भर में जहां एक ओर चीनी की बढ़ती कीमतों ने लोगों के जेबों पर संकट ला दिया है. वहीं झारखंड में चीनी के साथ ही प्याज की बढ़ी हुई कीमतें भी रूलाने लगी हैं. पिछले एक महीने में प्याज की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं और सब्जी विक्रेताओं का मानना है कि ये कीमतें और भी बढ़ सकती हैं.
जाहिर है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, प्याज की कीमतों में उछाल आम आदमी की जेब पर दोहरी मार डाल रहा है. प्याज हर किसी के खाने का एक जरूरी और अहम हिस्सा है और इस वजह से आम आदमी को अब अपनी आमदनी और खर्चों को संभालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
प्याज की कीमतों में दोगुनी बढ़ोतरी
रांची सहित झारखंड के विभिन्न सब्जी बाजार में प्याज की कीमतें दोगुनी हो गई हैं. 24 जुलाई को जो प्याज 25–30 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, वह अब 60–65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है.
प्याज की कीमतें अचानक क्यों बढ़ रही हैं और क्या दरों में कमी की कोई उम्मीद है, यह जानने के लिए रांची के पंडरा स्थिति कृषि बाजार समिति के थोक बाजार मंडी का जायजा लिया गया. साथ ही झारखंड आलू-प्याज विक्रेता संघ के अध्यक्ष मदन प्रसाद से बात की गई.

दाम बढ़ने की कई वजहें
मदन प्रसाद बताते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी के एक नहीं, बल्कि कई वजहें हैं. पहला कारण तो यह है कि आमतौर पर अगस्त में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से झारखंड में ताजे प्याज की सप्लाई आती है. लेकिन इस बार पानी की कमी के कारण दोनों राज्यों में प्याज की फसल 50% तक बर्बाद हो गया है. नतीजतन, इन राज्यों से प्याज का एक भी ट्रक अभी तक झारखंड नहीं पहुंचा है.
एक और वजह यह है कि झारखंड अपनी प्याज की जरूरतें पूरी करने के लिए मुख्य रूप से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश पर निर्भर रहा है. हालांकि, लगातार दो-तीन सालों तक प्याज की कीमतें इतनी कम रहीं कि महाराष्ट्र के किसानों को नुकसान उठाना पड़ा, जिसके चलते उन्होंने और मध्य प्रदेश के किसानों ने भी इस साल प्याज की खेती कम की.

वे बताते हैं कि पहले जब भी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से सप्लाई महंगी हो जाती थी, तो झारखंड के पलामू, हजारीबाग और आस-पास के जिलों में उगाई गई प्याज कीमतों को स्थिर रखने में मदद करती थी. लेकिन इस बार, जब इन इलाकों में फसल लगभग तैयार थी, उसी समय बेमौसम बारिश ने फसल को बर्बाद कर दिया. ऐसे में जब मांग ज्यादा हो और उपलब्धता कम हो, तो कीमतें बढ़नी तय है. उन्होंने यह भी बताया कि आज नासिक बाजार में प्याज 45 रुपये प्रति किलोग्राम बिकी, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं.
झारखंड में खपत होती है रोज 50-60 ट्रक प्याज
मदन प्रसाद का कहना है कि झारखंड में रोजाना 30 टन वाली 50-60 गाड़ी प्याज की खपत होती है. अभी सावन का महीना चल रहा है, और धार्मिक वजहों से प्याज की खपत अभी कम है, फिर भी कीमतें ज्यादा हैं. सावन खत्म होने के बाद कीमतें और बढ़ेंगी. उन्होंने बताया कि प्याज की कीमतों में 10-15 रुपये प्रति किलोग्राम की और बढ़ोतरी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि संघ के नेता के तौर पर उन्हें पता है कि केंद्र सरकार को प्याज की बढ़ती कीमतों के बारे में पूरी जानकारी है। सरकार ने बाजार में कीमतों को स्थिर करने के लिए NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए प्याज खरीदने की कोशिश भी की, लेकिन यह प्रयास कितना सफल रहा, इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. नासिक में कुछ खरीद जरूर हुई थी. उन्होंने फिर कहा कि कीमतें प्रति किलोग्राम 10 रुपये से 20 रुपये तक और बढ़ सकती हैं.
विक्रेता और ग्राहक दोनों परेशान
रांची के ब्राम्बे के रहने वाले युवा सब्जी विक्रेता फिरोज अंसारी का कहना है कि पंडरा थोक सब्जी बाजार में ही प्याज 48 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है. इसके अलावा, बोरियों में अक्सर सड़े-गले या सूखे प्याज भी निकलते हैं. ऐसे में वे कहते हैं कि अगर वे प्याज को 60 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर न बेचें, तो गुजारा कैसे करेंगे?
वहीं, बजरा की रहने वालीं बुजुर्ग खरीदार बनेश्वरी देवी सरकार से बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की अपील करती हैं. उनका कहना है कि उन्हें अब प्याज के लिए 50–60 रुपये प्रति किलोग्राम चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि पहले इसकी कीमत 25–30 रुपये हुआ करती थी.
एक अन्य विक्रेता परमानंद चौधरी पूछते हैं कि थोक विक्रेताओं से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक कोई भी आखिर क्या कर सकता है? अगर नासिक में ही प्याज महंगा है, तो ग्राहकों को भी जाहिर है कि ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. ऐसे हालात में, सिर्फ सरकार ही प्याज की बढ़ती कीमतों को रोकने और जनता को राहत देने के लिए पहल कर सकती है.
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