जनसमस्याओं के मकड़जाल में रांची नगर निगम का वार्ड 35 और 36, मूलभूत सुविधा से वंचित लोग
रांची नगर निगम के वार्ड 35 और 36 में लोग कच्ची गालियां, बंद पड़े चापाकल और अधुरे बने घर में जैसी समस्याओं से परेशान हैं.

Published : February 14, 2026 at 5:17 PM IST
रांची: झारखंड में हो रहे नगर निकाय चुनाव की तेज हुई सरगर्मी के बीच ईटीवी भारत की टीम अलग-अलग वार्ड क्षेत्र की जनसमस्याओं की पड़ताल कर रहा है. इसी क्रम में शनिवार को ईटीवी भारत की टीम राजधानी रांची के दिल में स्थित वार्ड 35 और 36 में मौजूद जनसमस्याओं की पड़ताल की. राजधानी रांची के नवविकसित पॉश इलाके हरमू, अरगोड़ा, पुंदाग के आलीशान अपार्टमेंट्स को खुद में समेटे वार्ड 35 और 36 में कई पुरानी बस्तियां भी हैं, जो विकास की रफ्तार में मानो पीछे छूट गई दिखती हैं.
रांची नगर निगम क्षेत्र में आने वाले इन दोनों वार्डो में कुल मिलाकर वोटरों की संख्या 50 हजार से अधिक है. इन दोनों वार्ड के अंतर्गत पीपरटोली, ढिपाटोली, चापुटोली के साथ-साथ कई बस्तियां शामिल हैं. जिसका हाल मलिन बस्ती के समान हैं. इन दोनों वार्डों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं की कमी से हर दिन लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है.
राजधानी के केंद्र बिंदु हैं दोनों वार्ड
रांची नगर निगम का वार्ड संख्या 35 और 36 राजधानी क्षेत्र के केंद्र बिंदु है. इस इलाके में पानी के लिए लगाये गए ज्यादातर चापाकल खराब पड़े हुए हैं, जो ठीक है, उससे साफ पानी नहीं आता. हर घर नल जल योजना का पूरे इलाके में बदतर स्थिति है. 2021-2022 में हर घर नलजल योजना के लिए पाइप तो लगा, पर कभी पानी नहीं आया है. जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है.

पेयजल सुविधा नहीं पहुंचा घर तक
वार्ड 35 और 36 में रहने वाले लोगों में से झानो तिग्गा, संतोषी, प्यारी देवी, बिसी कच्छप और सविता देवी कहती हैं कि उनके इलाके में आज भी गालियां कच्ची हैं. नाली नहीं रहने से गंदा पानी सड़क पर बहता है. ज्यादातर लोग पानी के लिए समुदाय स्तर पर लगे पानी टंकी पर आश्रित हैं. कई लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की अंतिम किस्त नहीं मिलने से उनके घर का निर्माण अधूरे पड़े हुए हैं.

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