2000 लोगों को सता रही रोजी-रोटी की चिंता, क्या रोजगार छीन लेगा 'विकास का फ्लाईओवर'
झिड़ी में बन रहे फ्लाईओवर का लोगों ने विरोध किया है. लोगों ने इसके विरोध में एनएचएआई, केंद्र सरकार, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 7, 2026 at 2:09 PM IST
|Updated : February 7, 2026 at 2:52 PM IST
कुल्लू: किरतपुर-मनाली फोरलेन पर झिड़ी में बनने वाले फ्लाईओवर का अब स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है. कुल्लू और मंडी की सीमा पर स्थित झिड़ी में ये डेढ़ किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बनेगा. विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि सबसे अधिक यहां पर पर्यटन गतिविधियां प्रभावित होगी, जिससे 2000 से अधिक लोगों के कारोबार पर भी संकट खड़ा होगा. इसके अलावा अगर सड़क को पार करना होगा तो स्थानीय ग्रामीणों को भी डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करना होगा.
फ्लाईओवर के विरोध में स्थानीय लोगों के द्वारा एक समिति का भी गठन किया गया. इस समिति ने फ्लाईओवर के विरोध में एनएचएआई, केंद्र सरकार, प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजा है और मांग रखी है कि जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई की जाए. लोगों का कहना है कि एनएचएआई को चाहिए कि वो यहां पर फ्लाईओवर का निर्माण न कर गोल चौक का निर्माण करे. इससे किसी का भी कारोबार प्रभावित नहीं होगा.
फ्लाईओवर हटाओ समिति के अध्यक्ष सीएसएस चौहान का कहना हैं कि 'फ्लाईओवर से गांव की आजीविका, पर्यटन गतिविधियां और पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. प्रभावितों ने फ्लाईओवर के बजाय गोलचक्कर जैसे सुरक्षित विकल्प पर विचार करने की मांग की है. करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर से लोगों को अपनी ही जमीन, संस्थानों, बस स्टॉप, जल स्रोत, श्मशान और नदी तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा.'
फ्लाईओवर बनने से जाम की समस्या होगी खत्म
किरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत कुल्लू और मंडी जिले की सीमा झीड़ी में लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से एक नया फ्लाईओवर बनाया जाएगा, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है. एनएचएआई के अधिकारियों का तर्क है कि ये डेढ़ किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर, पुराना हाईवे से फोरलेन को अलग करता है, जिससे जाम की समस्या खत्म होगी और हादसों में कमी आएगी, लेकिन इस फ्लाईओवर को बनने से पहले विरोध के स्वर उठने लग गए हैं.
'युवाओं का रोजगार होगा प्रभावित'
रिवर राफ्टिंग के कारोबार से जुड़े युवा रितेश चौहान का कहना है कि 'फोरलेन बनने के बाद यहां सैलानियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है और डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बहुत से युवा पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग का भी काम करते हैं. फ्लाईओवर बनने से रिवर राफ्टिंग पॉइंट से पहले ही सैलानी इस तरफ नहीं आएंगे. इसके कारण पूरे दायरे में चल रही पर्यटन गतिविधियों के बारे में सैलानियों को कोई जानकारी नहीं मिल पाएगी. सैलानियों के पर्यटन गतिविधियों में शामिल न होने से युवाओं का भविष्य भी खराब होगा और उनका रोजगार बंद हो जाएगा. इस ओर एनएचएआई को ध्यान देना चाहिए.'
2000 लोगों को मिलता है रोजगार
लोगों का कहना हैं कि झीड़ी के लगभग 500 युवा रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग से जुड़े हैं, जबकि करीब 2000 लोग इससे परोक्ष रूप से रोजगार पाते हैं. फ्लाईओवर बनने से ये गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी. फ्लाईओवर से गांव दो हिस्सों में बंट जाएगा और बच्चों, किसानों, पशुपालकों और मरीजों को भारी परेशानी होगी. ये क्षेत्र भूस्खलन और बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील है. फ्लाईओवर से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने और जलभराव का खतरा बढ़ेगा. पिछले दो वर्षों में यहां कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है. मूल फोरलेन योजना में फ्लाईओवर शामिल नहीं था.
झिड़ी के स्थानीय ग्रामीण हरी सिंह का कहना है कि एनएचएआई की ओर से बनने वाले फ्लाईओवर पिलर पर खड़े किए जाते हैं. इससे सड़क पार करने में भी कोई परेशानी नहीं होती है, लेकिन झिड़ी में प्रस्तावित फ्लाईओवर को पूरी तरह से दीवारों से बंद किया जाएगा. ऐसे में सड़क की दूसरी ओर भी देखना मुश्किल हो जाएगा. ग्रामीणों को अपने खेतों और आस-पड़ोस में जाने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना होगा. फ्लाईओवर बनने से गांव में पर्यटन गतिविधियां बंद हो जाएंगी. ऐसे में आने वाले समय में यहां पर हजारों लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा होगा.
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