भिवानी में कबीर जयंती समारोह निरस्त होने से लोगों में भारी रोष, दी चुनाव में परिणाम भुगतने की चेतावनी
भिवानी में होने वाला प्रदेश स्तरीय कबीर जयंती समारोह निरस्त होने से लोगों में भारी रोष है. राजनीतिक दबाव में समारोह निरस्त करने का आरोप.

Published : June 20, 2026 at 3:53 PM IST
भिवानी: प्रदेश सरकार द्वारा 29 जून को भिवानी में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कबीर जयंती समारोह को अचानक निरस्त किए जाने के फैसले के बाद भिवानी के धानक समाज में गहरा आक्रोश है. समाज ने सरकार के इस कदम को अपना घोर अपमान बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले चुनावों में भाजपा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. इस मामले को लेकर धानक समाज के लोगों ने शनिवार को भिवानी के उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश सरकार के नाम मांगपत्र सौंपा.
28 मई को पारित आदेश रद्दः मौके पर समाज के लोग कृष्ण नाथ, भगवानदास कालिया, राजकुमार सोलंकी, मुक्ति ने बताया कि "बीते 28 मई को स्वयं मुख्यमंत्री ने आदेश पारित किया था कि इस बार हरियाणा सरकार द्वारा संत कबीर साहेब की जयंती भिवानी जिले में धूमधाम से मनाई जाएगी. मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद से ही जिला भिवानी का समस्त धानक समाज बेहद उत्साहित था और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दिन-रात जुटा हुआ था. समाज के प्रतिनिधियों और युवाओं ने गांव-गांव जाकर कबीर जयंती के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर, होर्डिंग्स और पोस्टर लगवा दिए थे और पूरे राज्य मे उत्सव का माहौल तैयार किया जा चुका था. लेकिन 18 जून को सरकार द्वारा अचानक इस जयंती समारोह को निरस्त करने का फरमान सुना दिया गया." उन्होंने कहा कि "कुछ विरोधी पार्टियों के नुमाइंदों के दबाव में आकर मुख्यमंत्री ने यह फैसला लिया है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है."
रैली का आदेश नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनीः उन्होंने कहा कि "इस फैसले से धानक समाज खुद को ठगा और अपमानित महसूस कर रहा है. समाज के लोग अपने स्तर पर तैयारियां कर रहे थे, जिसके चलते अब तक 6 से 7 लाख रुपये बैनर, पोस्टर और अन्य व्यवस्थाओं में खर्च हो चुके हैं. सरकार के इस अचानक पीछे हटने से समाज का यह पैसा पूरी तरह बर्बाद हो गया है." उन्होंने याद दिलाया कि "वर्ष 2024 के चुनावों में भाजपा को विजयी बनाने में डी.एस.सी. समाज ने सबसे अहम भूमिका निभाई थी, और इस डी.एस.सी वर्ग में धानक समाज का योगदान सबसे बड़ा रहा है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "29 जून की रैली निरस्त करने का फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश भर का धानक समाज प्रत्येक जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगा."

