पौष पूर्णिमा कल, स्नान-दान से मिलता है कई गुना पुण्य, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और खास उपाय
पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान करने का खास महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए.

Published : January 2, 2026 at 3:52 PM IST
कुरुक्षेत्र:सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है. पौष पूर्णिमा वर्ष की पहली पूर्णिमा होने के कारण इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.
कब मनाई जाएगी पौष पूर्णिमा: कुरुक्षेत्र के तीर्थ पुरोहित पंडित पवन शर्मा ने बताया कि, "हिंदू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा की तिथि 2 जनवरी की शाम 6:53 बजे से शुरू होकर 3 जनवरी को दोपहर 3:35 बजे तक रहेगी. सनातन परंपरा के अनुसार व्रत और पर्व उदय तिथि में मनाए जाते हैं, इसलिए पौष पूर्णिमा 3 जनवरी को मनाई जाएगी."
स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त: पंडित पवन शर्मा के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:20 बजे तक रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा। इन शुभ मुहूर्तों में किए गए दान और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है.
माघी स्नान का होता है शुभारंभ: पौष पूर्णिमा से माघ महीने के पवित्र स्नान का आरंभ होता है, जिसे माघी स्नान कहा जाता है. यह स्नान अगले एक महीने तक, माघ पूर्णिमा तक किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में नियमित स्नान करने से व्यक्ति को पुण्य, स्वास्थ्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है.
पौष पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व: पंडितजी ने बताया कि पौष पूर्णिमा के दिन गर्म वस्तुओं का दान करना सबसे उत्तम माना जाता है. इस दिन गर्म कपड़े, भोजन, तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करने के बाद ही दान करना चाहिए, जिससे सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है.
पितरों के लिए करते हैं तर्पण: पौष पूर्णिमा के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दिन दान और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
चंद्र दोष निवारण के लिए करें ये उपाय: पूर्णिमा का सीधा संबंध चंद्र देवता से होता है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या मानसिक तनाव बना रहता है, तो उसे पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए.चंद्र देव की पूजा कर अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से आर्थिक संकट दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. पौष पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान: पौष पूर्णिमा के दिन शराब, मांस, अंडा आदि तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. सात्विक आहार ग्रहण कर व्रत, पूजा और दान करना चाहिए। इससे भगवान लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में खुशहाली आती है.
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