जींद में पिंडारा तीर्थ में पिंडदान करने पहुंचे श्रद्धालु, साल के अंतिम महीने की पौष अमावस्या पर पितरों के लिए की मोक्ष की कामना
हरियाणा में पौष अमावस्या के दिन कड़ाके की सर्दी के बीच पितृ तर्पण करने जींद के पिंडारा तीर्थ पहुंचे श्रद्धालु.


Published : December 19, 2025 at 2:34 PM IST
जींद: हरियाणा में इन दिनों कड़ाके की सर्दी और घने धुंध ने लोगों को काफी परेशान किया हुआ है. बावजूद इसके साल की अंतिम पौष अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर स्नान किया और पिंडदान कर तर्पण किया. ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर वीरवार को शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गए थे. पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा.
श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान: शुक्रवार को अल सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया. जो मध्यान्ह के बाद तक चलता रहा. इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया. साथ ही सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की. अमवस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने यहां खरीददारी भी की. तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़ें लगाई हुई थी. जिस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की.
क्या है महत्व: पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की. बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए, परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया. तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है. जिसके लिए पौष अमावस्या सबसे खास दिनों में से एक माना जाता है.
साल की आखिरी अमावस्या पौष अमावस्या: शुक्रवार को पौष अमावस्या साल की आखिरी अमावस्या रही. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में पड़ने वाले व्रत, त्योहार बेहद खास होते हैं. इसके साथ ही इस महीने को लघु पितृ पक्ष के रूप में भी जाना जाता है. पौष के महीने में श्राद्ध कर्म, स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से विशेष फल मिलता है.
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