जानें कब है साल की आखिरी अमावस्या, पौष अमावस्या पर पितृ दोष मुक्ति के लिए करें खास उपाय, इन चीजों का करें दान
पौष अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण और पिंडदान से जीवन की तमाम समस्याएं दूर होती हैं. विस्तार से जानें और भी कई अहम महत्व.


Published : December 18, 2025 at 11:22 AM IST
करनाल: सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है. इस समय हिंदू वर्ष का पौष महीना चल रहा है और प्रपोज महीने में आने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस अमावस्या प्रधान और स्नान के साथ-साथ पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण पूजा-पाठ अनुष्ठान भी किए जाते हैं. तो चलिए विस्तार से जानते हैं कि पौष अमावस्या कब है और इसके क्या महत्व हैं.
कब है पौष अमावस्या: पंडित विश्वनाथ ने बताया कि "इस समय पौष महीना चल रहा है. इस महीने में आने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या के नाम से जाना जाता है. यह इस साल की आखिरी अमावस्या है. इसलिए इसका और भी ज्यादा महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार पौष अमावस्या की शुरुआत 19 दिसंबर को सुबह 5:00 बजे हो रही है. जबकि इसका समापन अगले दिन सुबह 7:12 बजे होगा. इसलिए इस बार पौष अमावस्या 19 दिसंबर को मनाई जाएगी. इस दिन ही विधिवत रूप से दान स्नान, पूजा, अनुष्ठान, तर्पण, श्राद्ध आदि होंगे. दान और स्नान करने का पहला ब्रह्मा शुभ मुहूर्त का समय सुबह 5:19 से शुरू होकर 6:14 तक रहेगा, दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 7:09 से शुरू होकर 11:00 तक रहेगा".
पौष अमावस्या का महत्व: पंडित ने बताया कि "इस अमावस्या का शास्त्रों में बहुत ही ज्यादा विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से कई जन्म के पाप से मुक्ति मिलती है और स्नान करने उपरांत दान करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान पिंडदान तर्पण और पूजा-अर्चना की जाती है. ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले. क्योंकि यह अमावस्या पितरों को समर्पित होती है. इस अमावस्या पर पितरों के लिए दीप दान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख समृद्धि आती है. इस दिन भगवान विष्णु महादेव और चंद्र देवता की पूजा अर्चना करने का भी विधि विधान होता है. इससे उनका आशीर्वाद परिवार के ऊपर बना रहता है और सभी प्रकार की समस्याएं दूर होती है".
पितृ दोष निवारण के उपाय: पंडित ने बताया कि "अगर किसी इंसान की कुंडली में पितृ दोष है, तो उसके लिए यह अमावस्या विशेष तौर पर पूजा अर्चना करने के लिए अच्छी मानी जाती है. इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा अर्चना करें. उसमें सबसे पहले तांबे के लोटे में पानी लेकर उसमें लाल रंग की रोली और फूल डालकर भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करें, इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है".
पंडित ने बताया कि "इस अमावस्या पर पितृ कवच या पितृ स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इससे पितरों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें. इससे वह प्रसन्न होते हैं. पितरों के लिए तर्पण अनुष्ठान पिंडदान करने के बाद ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन के साथ दान दक्षिणा दें, इसे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है".
अमावस्या के दिन क्या करें दान: पंडित ने बताया कि इस दिन वैसे तो विशेष तौर पर पितरों के लिए पूजा-अर्चना करने का विधि विधान होता है. लेकिन दान करने से भी इस अमावस्या पर विशेष लाभ की प्राप्ति होती है. पितरों के लिए पूजा-अर्चना करने के बाद किसी जरूरतमंद ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें. जिससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख समृद्धि आती है. इस अमावस्या पर गर्म चीजों का दान करना सबसे अच्छा माना जाता है. गुड, तिल,गर्म कपड़े , जूते और खाने का दान करना सबसे अच्छा होता है.
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