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आवासीय मकानों में व्यावसायिक गतिविधियों के नोटिस पर सरकार का बड़ा कदम

बिहार में सम्राट सरकार ने फैसला लिया है. व्यावसायिक गतिविधियों के समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति बनी है. रिपोर्ट- कृष्णनंदन.

PATNA MUNICIPAL CORPORATION
सीएम सम्राट चौधरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 25, 2026 at 9:09 PM IST

4 Min Read
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पटना : पटना नगर निगम की ओर से आवासीय मकानों में संचालित व्यावसायिक और अन्य गैर-आवासीय गतिविधियों को लेकर जारी नोटिस के बाद अब राज्य सरकार ने मामले के समाधान की पहल की है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले के अध्ययन और व्यावहारिक समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है.

समिति की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी करेंगे. नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश कुमार मिश्र को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और विधान पार्षद संजय कुमार सिंह को सदस्य बनाया गया है.

सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक समिति पटना नगर निगम के नोटिस से जुड़े पूरे मामले का अध्ययन करेगी और जनहित को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करेगी. यानी सरकार का प्रयास है कि नियमों के पालन के साथ उन लोगों की समस्याओं का भी समाधान निकाला जाए, जिनके आवासीय परिसरों को लेकर नगर निगम ने नोटिस जारी किया है.

दरअसल, पटना नगर निगम ने आवासीय इलाकों में बिना अनुमति गैर-आवासीय इस्तेमाल किए जा रहे भवनों का सर्वे कराया है. निगम के सर्वे में करीब 26,745 आवासीय संपत्तियां ऐसी चिह्नित की गई हैं, जहां कथित तौर पर गैर-आवासीय गतिविधियां संचालित हो रही हैं. इनमें दुकान, कार्यालय, होटल, हॉस्टल, अस्पताल, कोचिंग संस्थान, रेस्टोरेंट और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं. निगम ने संबंधित संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी कर उनके पक्ष और जरूरी दस्तावेज पेश करने को कहा है.

यह कार्रवाई केवल नगर निगम की अपनी पहल नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन से जुड़ी है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों के गैर-आवासीय इस्तेमाल और भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए राजधानी शहरों में ऐसे मामलों की पहचान और जांच का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्वीकृत उपयोग के बाद भवन का अलग तरीके से इस्तेमाल करना नियमों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है.

नगर निगम ने नोटिस जारी करने के साथ संबंधित अंचलों में सुनवाई की प्रक्रिया भी शुरू की है. संपत्ति मालिकों को अपने पक्ष में दस्तावेज और गैर-आवासीय उपयोग से संबंधित अनुमति या अनापत्ति के प्रमाण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है. निगम की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना में भी कहा गया है कि सर्वे किए गए मामलों की अंचलवार सुनवाई होगी. लोगों का कहना है कि आवासीय मकान में अगर वह कोचिंग अथवा अन्य व्यावसायिक संस्थान चलते हैं तो उसका कमर्शियल टैक्स देते हैं तो फिर ऐसा विवाद क्यों?

हालांकि यह मामला तब और चर्चा में आया जब पटना नगर निगम की ओर से महापौर सीता साहू से जुड़े परिसर को लेकर भी नोटिस जारी किया गया. इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर नोटिस पाने वाले लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच असंतोष सामने आया. नोटिस के दायरे में बड़ी संख्या में मकान आने से यह सवाल उठने लगा कि वर्षों से आवासीय इलाकों में चल रही गतिविधियों का नियमन किस तरीके से किया जाएगा और आम लोगों को राहत कैसे मिलेगी. जो लोग अपने मकान में व्यवसायिक गतिविधि कर रहे हैं वह उस अनुरूप टैक्स दे रहे हैं और यदि कार्रवाई होती है तो व्यावसायिक कार्य ठप हो जाएंगे.

इसी मामले को लेकर आज मंगलवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल में विधायक संजीव चौरसिया, रत्नेश कुशवाहा, श्याम रजक और संजय गुप्ता शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम की ओर से जारी नोटिस के समाधान की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने समिति के गठन का निर्णय लिया है.

अब समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और नगर नियोजन से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित हो, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से आवासीय परिसरों में व्यवसाय या दूसरी गतिविधियां संचालित कर रहे लोगों के लिए व्यावहारिक और जनहितकारी रास्ता निकाला जाए. समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार का फैसला यह तय करेगा कि पटना में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग को लेकर आगे की व्यवस्था किस रूप में लागू होगी.