35 से ज्यादा बैंक, हर दिन 200 करोड़ का ट्रांजेक्शन, बिहार की मारूफगंज मंडी मशहूर क्यों?
बिहार की एक ऐसी मंडी जहां एक ही गली में तकरीबन 35 से ज्यादा बैंक हैं, जिसमें 200 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर है-

Published : February 16, 2026 at 7:05 PM IST
पटना : बिहार की राजधानी पटना के मारूफगंज मंडी में सबसे बड़ी मंडी ड्राई फ़्रूट्स मंडी है. यह करीब 3 किलोमीटर में फैली है. यहां करीब दस हजार के आसपास ड्राई फ्रूटस और मसाला की दुकानें हैं. खास बात यह है कि मारूफगंज की एक गली में 35 से अधिक बैंकों के ब्रांच हैं, जहां हर रोज 200 करोड़ का लेन-देन होता है.
बिहार के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है मारूफगंज : पटना सिटी स्थित मारूफगंज को यूं ही बिहार की अर्थव्यवस्था का हृदय स्थल नहीं कहा जाता. यह इलाका दशकों से राज्य के व्यापारिक नक्शे का सबसे अहम केंद्र रहा है. मारूफगंज और इसके आसपास करीब तीन किलोमीटर के दायरे में फैली विशाल होलसेल मंडी आज भले ही बिहार की सबसे बड़ी थोक मंडी के रूप में जानी जाती हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब इसे एशिया की सबसे बड़ी होलसेल मंडियों में शुमार था.
मुगलकाल से मंडी का इतिहास : मारूफगंज मंडी की एक ही गली में 35 बैंकों से करोड़ों का ट्रांजेक्शन होता है. मसाला, ड्राई फ्रूट्स, अनाज, दलहन, चावल, गेहूं से लेकर कॉस्मेटिक और रोजमर्रा के उपयोग के सामान तक, शायद ही कोई ऐसा उत्पाद हो जो इस मंडी में उपलब्ध न हो. यही वजह है कि इसे बिहार की इकोनॉमिक लाइफ लाइन कहा जाता है. मारूफगंज मंडी का इतिहास 300 से 400 साल पुराना है. मुगल काल से ही मारूफगंज मंडी व्यवसाय का केंद्र है.
मारूफगंज मंडी के पास हुआ करता था पोर्ट : मारूफगंज मंडी की भौगोलिक स्थिति भी इसे खास बनाती है. यह मंडी गंगा नदी के किनारे स्थित है और पटना घाट से महज आधे किलोमीटर की दूरी पर है. स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, पहले के दौर में गंगा के रास्ते बड़े-बड़े जहाज यहां तक आते थे. देश और विदेश से सामान पटना घाट पर उतरता था और यहीं से पूरे बिहार समेत अन्य राज्यों और विदेशों तक भेजा जाता था.

होलसेल मंडी के रूप में है विख्यात : जलमार्ग के जरिए होने वाला यह व्यापार मारूफगंज को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पहचान देता था. समय के साथ परिवहन के साधन बदले, लेकिन मंडी की अहमियत कम नहीं हुई. आज भी होलसेल मंडी के रूप में यह पहचान बनाकर चल रही है. व्यापारियों के लिए ये मंडी आज भी उतनी ही अहमियत रखती है. दूसरे प्रदेशों के व्यापारी भी यहां आकर खरीददारी करना पसंद करते हैं.
हर रोज 100 से अधिक ट्रकों की आवाजाही : आज भी मारूफगंज मंडी में रोजाना जबरदस्त हलचल देखने को मिलती है. स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रक इस इलाके में आते हैं और लगभग उतने ही ट्रक यहां से सामान लोड कर वापस जाते हैं. बिहार के साथ-साथ झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों के कारोबारी थोक खरीदारी के लिए यहीं पहुंचते हैं.

शादी-विवाह की खरीददारी के लिए लगती है भीड़ : एक ही जगह पर हर सामान की कई वैरायटी और वह भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है. वजह साफ है, चाहे शादी-विवाह जैसा बड़ा आयोजन हो या किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम की तैयारी, व्यापारी सीधे मारूफगंज मंडी का रुख करते हैं.
रोज 200 करोड़ से अधिक का व्यवसाय : कारोबार के आंकड़े इस मंडी के विशालता की गवाही देते हैं. दुकानदारों का कहना है कि एक ट्रक से न्यूनतम दो लाख रुपये का सामान आता और जाता है, जबकि कई बार यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो जाता है. इस हिसाब से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक और करोड़ों रुपये का सामान इस मंडी से होकर गुजरता है. स्थानीय व्यापारियों और बैंकर्स के मुताबिक, मारूफगंज इलाके में रोजाना 200 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है. यही कारण है कि इसे बिहार की इकोनॉमी की लाइफ लाइन कहा जाता है.

''मारूफगंज इलाका बहुत सालों पहले से व्यवसाय का केंद्र बना हुआ है. हर रोज मारूफगंज बाजार में सौ ट्रक का आना-जाना लगा रहता है. एक दिन में औसतन मारूफगंज इलाके में 200 करोड़ का व्यवसाय अनुमानित है. झारखंड से भी व्यवसायी खरीदारी करने आते हैं.''- अनुज कुमार, जड़ी बूटी के होलसेल व्यवसायी, मारूफगंज मंडी
तमाम बैंकों ने मारूफगंज में खोल रखे हैं ब्रांच : इतने बड़े पैमाने पर कारोबार होने के कारण बैंकिंग नेटवर्क भी यहां बेहद मजबूत है. बताया जाता है कि मारूफगंज और इसके आसपास के तीन किलोमीटर के दायरे में 35 से अधिक सरकारी और गैर सरकारी बैंकों की शाखाएं मौजूद हैं. देश के लगभग सभी बड़े बैंक यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. बैंकर्स के अनुसार, यह इलाका मुख्य रूप से उद्यमियों और कारोबारियों का है. हजारों व्यापारी यहीं रहते हैं और यहीं से अपना व्यापार संचालित करते हैं. होलसेल कारोबार होने के कारण बड़ी मात्रा में लेन-देन होता है, जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन बैंकों के जरिए होता है. यही वजह है कि बैंकों के लिए भी यह इलाका बेहद अहम है.

''मारूफगंज इलाका व्यवसाय का बड़ा केंद्र है. एक बाजार जो कि दो-तीन किलोमीटर में है, जहाँ सिर्फ मसाले मिलते हैं. मसाले का व्यवसाय ही करोड़ों का है. बिहार झारखंड से तमाम बड़े व्यवसायी यहां खरीदारी के लिए आते हैं. हमारे इलाके में 30 से अधिक बैंकों के ब्रांच हैं.''- जितेन्द्र प्रसाद, गल्ला व्यवसायी, मारूफगंज मंडी
बैंक का हब है मारूफगंज मंडी : बैंकर्स यह भी बताते हैं कि यहां कई ऐसी बैंक और वित्तीय संस्थाएं हैं जो व्यापारियों को समय-समय पर लोन उपलब्ध कराती हैं. माल की खरीद, भंडारण और सप्लाई के लिए पूंजी की जरूरत होती है, जिसे पूरा करने में बैंक अहम भूमिका निभाते हैं. इससे न सिर्फ कारोबारियों को सहूलियत मिलती है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है.

बैंकर अभिषेक सिंह कहते हैं कि ''मारूफगंज इलाका बिजनेस हब है और करोड़ों का टर्नओवर है, इसलिए तमाम बैंकों ने ब्रांच खोल रखे हैं.'' बैंक से जुड़े अधिकारी हिमांशु भी कहते हैं कि ''पूरे बिहार झारखंड के लिए मारूफगंज इलाका बिजनेस का केंद्र है और बड़े पैमाने पर खरीदारी के लिए लोग आते हैं. व्यापारिक गतिविधि अधिक होने के चलते सभी बैंकों ने यहां ब्रांच खोल रखे हैं.''
मूलभूत सुविधाओं का आभाव : हालांकि, इतनी बड़ी आर्थिक गतिविधियों के बावजूद मारूफगंज इलाके की जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े करती है. कारोबारियों का कहना है कि जहां से प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का व्यापार होता है, वहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. शुद्ध पेयजल की सुविधा तो दूर, सार्वजनिक शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं. किसी को लघु शंका होने पर आसपास कोई व्यवस्था नहीं मिलती और लोगों को मजबूरी में सड़क किनारे जाना पड़ता है.

महिलाएं व्यवसाय में हो रही है सक्रिय : बीते दो दशकों में इस मंडी की सामाजिक तस्वीर भी बदली है. पहले यहां पुरुष कारोबारियों का ही दबदबा था, लेकिन अब बड़ी संख्या में महिलाएं भी उद्यमी बन चुकी हैं और खरीदारी के लिए मारूफगंज मंडी आती हैं. ऐसे में महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. पुरुष तो किसी तरह खुले में चले भी जाते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह बड़ी समस्या बन जाती है. कारोबारियों का कहना है कि सरकार को इस इलाके की बुनियादी सुविधाओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.
मंडी में बुनियादी सुविधाएं जरूरी : स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों की एक ही मांग है कि जिस इलाके से बिहार की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है, उसे नजरअंदाज न किया जाए. मारूफगंज आज भी बिहार की सबसे बड़ी होलसेल मंडी है, जहां हर तरह का सामान उपलब्ध है और जहां से पूरे राज्य के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की जरूरतें पूरी होती हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि सरकार इस इकोनॉमिक लाइफ लाइन को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि यह मंडी आने वाले समय में भी बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती देती रहे.
ड्राई फ्रूट व्यवसाय मनोज गुप्ता कहते हैं कि- ''मारूफगंज मंडी एशिया का सबसे बड़ा मंडी के रूप में जाना जाता है. बिहार झारखंड के अलावा सिलीगुड़ी से भी व्यवसाय यहां खरीदारी करने के लिए आते हैं. ज्यादातर दुकानदार यहां खरीदारी के लिए आते हैं. हमारे इलाके में 35 से अधिक बैंकों के ब्रांच हैं. अब व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, क्योंकि जो व्यवसायी खरीदारी के लिए आते हैं उनके लिए सरकार की ओर से उचित इंतजाम नहीं किए गए हैं. महिलाओं के लिए भी जो व्यवस्थाएं होनी चाहिए वह नहीं है.''
सरकार दे ध्यान : एक तरफ जहां मारूफगंज मंडी आर्थिक रूप से बिहार को समृद्ध बनाने में सालों से जुटी हुई है वहीं इतने लंबे समय गुजर जाने के बावजूद मंडी के इलाके में बुनियादी सुविधाओं का अभाव होना शर्मिंदगी की बात है. सरकार को चाहिए कि ऐसी सार्वजनिक जगह पर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराए ताकि यहां आने वाले लोगों और व्यापारियों को दिक्कतें न उठानी पड़े.
ये भी पढ़ें- बिहार बजट: किसानों की सम्मान निधि राशि में 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी, जानें अब कितना मिलेगा?

