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पटना हाईकोर्ट ने मुखिया चुनाव में आरक्षण को लेकर सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

बिहार में पंचायत चुनाव की चर्चा के बीच पटना हाईकोर्ट ने मुखिया पद के लिए आरक्षण पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. रिपोर्ट- आनंद वर्मा

Patna High Court
पटना हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 24, 2026 at 8:42 PM IST

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पटना: सोमवार को पटना हाईकोर्ट ने मुखिया के चुनाव में आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय जारी किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुखिया के चुनाव में आरक्षण नियम बिहार पंचायत राज कानून की धारा 15(5) लागू होगी, न कि बिहार आरक्षण कानून.

कोर्ट का अहम निर्णय: जस्टिस पार्थ सारथी की एकलपीठ ने मो. ईसा की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद अपने 31 पन्ने का आदेश दिया. कोर्ट ने जाति छानबीन समिति के फैसले और उसके आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचित मुखिया को पद से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया.

अदालत ने कहा कि 1991 का आरक्षण अधिनियम मुख्य रूप से राज्य सरकार के अधीन पदों और सेवाओं में आरक्षण के लिए है. पंचायत चुनावों में इसकी भूमिका सिर्फ इतनी है कि पिछड़ा वर्ग में कौन सी जातियां आती हैं, इसकी पहचान हो सके.

चुनावी आरक्षण और सेवा में आरक्षण अलग: निर्वाचित मुखिया को हटाए जाने के मामले में जाति छानबीन समिति ने 1991 के अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया था, जिसे हाईकोर्ट ने गलत ठहराया. कोर्ट ने कहा कि चुनावी आरक्षण और सेवा में आरक्षण के लिए अलग-अलग कानून है.

पंचायत चुनावों में सेवा-आरक्षण के नियमों को लागू करना कानून गलत है. इस आदेश में कहा गया कि आरक्षण कानूनों की व्याख्या उनके विशेष विधायी उद्देश्य और योजना के अनुसार ही की जानी चाहिए।कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और जाति छानबीन समिति की ओर से जारी आदेश को निरस्त कर दिया.

कब होगा पंचायत चुनाव?: पंचायत चुनाव को लेकर अभी तक तिथि घोषित नहीं हुई है. माना जा रहा है कि चुनाव इस साल नहीं होगा. पंचायती राज विभाग के अनुसार पहले परिसीमन होगा, उसके बाद चुनाव होगा. ऐसे में माना जा रहा है कि अगले साल पंचायत चुनाव होंगे. पिछली बार 2021 में सितंबर से दिसंबर के बीच चुनाव हुए थे.

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