'इरादा हत्या का नहीं था, इसलिए..' 21 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला
21 साल पुराने मारपीट मामले में आज पटना उच्च न्यायालय ने अंतिम निर्णय सुनाया है. पढ़ें क्या है पूरा मामला?

Published : July 2, 2026 at 8:56 PM IST
पटना: 21 साल पुराने हाई-प्रोफाइल मारपीट मामले में पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है. कोर्ट ने भोजपुर जिले के आरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र से जुड़े एक बेहद चर्चित और 21 साल पुराने मारपीट के मामले में अपना आखिरी और महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है.
2005 का मामला: जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की एकल पीठ ने इस दीर्घकालिक कानूनी लड़ाई पर विराम लगाते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन आरोपियों को एक बड़ी राहत भी दी है. यह सनसनीखेज मामला 27 फरवरी 2005 का है, जब आरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चितसेनपुर गांव में जमीन के एक टुकड़े को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था.
सूचक राहुल कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार जब वह सुबह शौच से लौट रहे थे, तब घात लगाकर बैठे विनोद कुमार, पूर्व न्यायिक अधिकारी योगेन्द्र राम, रंजन कुमार और सुचिता कुमारी ने उन पर लाठी और लोहे की भारी खंती से जानलेवा हमला बोल दिया था.
हत्या के प्रयास का आरोप: बीच-बचाव करने आईं सूचक की मां को भी लहूलुहान कर दिया गया था. पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास (धारा 307) जैसी गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी. वर्ष 2014 में भोजपुर की कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को धारा 323/34 (मारपीट) के तहत दोषी ठहराया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए अभियुक्तों ने साल 2014 में पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील संख्या 220/2014 दायर की थी.
क्या था बचाव पक्ष का तर्क?: वहीं, बचाव पक्ष का तर्क था कि समाज में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा है और उन्हें गंदी ग्रामीण राजनीति के कारण झूठा फंसाया गया. हाईकोर्ट ने पूरे मामले के कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण करने के बाद स्पष्ट किया कि घटना के पीछे पुराना भूमि विवाद ही मुख्य वजह थी.
अदालत ने सुनाया निर्णय: हाईकोर्ट ने माना कि अभियुक्तों का इरादा हत्या करने का नहीं था, इसलिए निचली अदालत का उन्हें केवल साधारण मारपीट का दोषी मानना बिल्कुल सही है. हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषसिद्धि के मूल फैसले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.
हालांकि, यह मामला पिछले दो दशकों से अधिक समय से खिंच रहा है, जिसे देखते हुए अभियुक्तों की सजा को उनके द्वारा अब तक काटी गई अवधि में संशोधित किया जाता है. इस आदेश के साथ ही अदालत ने सभी आरोपियों को तुरंत प्रभाव से बेल बांड की देनदारियों से मुक्त करने का निर्देश दिया, जिससे उन्हें कानूनी प्रक्रिया से बहुत बड़ी राहत मिल गई है.
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