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मोतीझील नहर अतिक्रमण मामले में नगर निगम जवाब तलब, पटना हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा

पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी स्थित मोतीझील नहर पर अतिक्रमण मामले में नगर निगम से 6 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है. पढ़ें

motijheel canal encroachment
पटना हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 19, 2026 at 12:22 PM IST

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पटना: पटना हाईकोर्ट ने पूर्वी चंपारण के मोतिहारी मोतीझील नहर पर अतिक्रमण मामले की सुनवाई की. चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ ने बूढ़ी गंडक नदी के रामरेखा घाट से जोड़ने वाली नहर पर हुए अतिक्रमण पर मोतिहारी नगर निगम को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. इस मामलें में अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद की जाएगी.

छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश: भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने पूर्व में डीएम, पूर्वी चंपारण को विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था. साथ ही मोतिहारी नगर निगम को पक्षकार बनाने का आदेश दिया गया था.

मोतीझील बूढ़ी गंडक नदी के किनारे अतिक्रमण: बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी शहर के मोतीझील बूढ़ी गंडक नदी से निकले ब्रिटिश कालीन नहर को रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है. जिसपर दोनों ओर से अतिक्रमण है.

नहर शहर की जीवनरेखा- याचिकाकर्ता: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि ''मोतिहारी शहर के मोतीझील को बूढ़ी गंडक नदी पर स्थित रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है. इसकी लम्बाई लगभग ग्यारह किलोमीटर है. मोतीझील को शहर की जीवनरेखा भी कहा जाता है. इससे मोतिहारी शहर को पेय जल मिलता है. साथ ही बाढ़ के समय ये नहर इस शहर को बाढ़ से बचाता है.''

मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत: अधिवक्ता विकास पंकज ने बताया था कि 24 दिसंबर, 2022 को कार्यपालक अभियंता, तिरहुत कैनाल डिवीज़न, मोतिहारी ने इस संबंध में पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा, जिसमें इस नहर को बाढ़ के समय अति उपयोगी और मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत बताया गया था.

विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश: अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि जिलाधिकारी, पूर्वी चम्पारण ने इसके जांच के लिए एक कमिटी गठित की और जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था.

6 हफ्ते बाद मामले की सुनवाई: उन्होंने आगे कहा कि, काफी बैठकें हुई, लेकिन अबतक कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं दिया गया. इससे मोतिहारी शहर के नागरिकों को काफी कष्ट और असुविधा हो रही है. इस मामलें पर अगली सुनवाई छह सप्ताह के बाद की जायेगी.

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