DSP रंजीत रजक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति का मामला खारिज
पटना हाईकोर्ट ने चार साल बाद भी चार्जशीट दाखिल न होने और जांच में बड़ी खामियों के कारण डीएसपी रणजीत रजक का केस रद्द किया.

Published : August 30, 2026 at 10:36 AM IST
पटना: पटना हाईकोर्ट ने पुलिस उपाधीक्षक रणजीत कुमार रजक के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामलें को चार साल के बाद भी चार्जशीट दायर नहीं करने पर रद्द कर दिया. जस्टिस प्रवीण कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते कहा कि न सिर्फ चार्जशीट दायर करने में विलम्ब हुआ, बल्कि जांच भी सही ढंग से नहीं की गई.
आर्थिक अपराध ईकाई की एफआईआर: बिहार आर्थिक अपराध ईकाई ने 2022 में पुलिस उपाधीक्षक रणजीत कुमार रजक के विरुद्ध आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामलें में एक एफआईआर दर्ज किया. चार साल तक जांच करने के बाद भी बिहार आर्थिक अपराध ईकाई जांच पूरी नहीं कर पाई.
जांच एजेंसी की बड़ी खामियां: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन चार सालों में जांच एजेन्सी ने आय से अधिक धन अर्जित करने के मामलें में ठोस कोई तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत नहीं कर पायी. इस आय की गणना में काफी खामियां पाई गई. सही ढंग से सम्पत्ति अर्जित किये गए आय, जिसकी अवधि 10 फरवरी, 2015 से 5 सितम्बर, 2022 थी, का प्रतिशत लगभग 81 फी सदी रही. साथ ही कृषि की आय को इस जांच में शामिल नहीं किया गया.
गणितीय गणना में चूक: लगभग चौतीस लाख रुपये के कृषि आय को जांच एजेन्सी ने आय गणना में विचार नहीं किया. एजेन्सी ने गणितीय गणना भी सही ढंग से नहीं की. कोर्ट ने इस लम्बी अवधि तक जांच में विलम्ब स्पष्टीकरण न मिलने को गंभीरता से लिया. साथ ही जांच अधूरी रहने और इसमें खामियां पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने इन परिस्थितियों को विचार करते हुए आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामलें में पुलिस उपाधीक्षक रणजीत कुमार रजक को राहत प्रदान की.
कौन हैं रणजीत रजक : रणजीत कुमार रजक बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी हैं. इसके ऊपर कई आरोप लग चुके हैं. 2022 में 67वीं बीपीएससी परीक्षा पेपर लीक मामले में रणजीत रजक का नाम सामने आया था. इसके बाद ईओयू की टीम ने गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद निलंबित कर दिया गया था.
निलंबन और बहाली का घटनाक्रम: इसी दौरान आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था. 81.9 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलसा हुआ था. करीब तीन साल तक निलंबित रहने के बाद कोर्ट के आदेश पर 21 मई 2025 को निलंबन रद्द कर दिया गया था. हालांकि एक महीने के बाद ही 23 जून 2025 को फिर से निलंबित कर दिया गया.
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