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28 साल पुराने डकैती मामले में दोषी बरी, पटना हाईकोर्ट का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने किशनगंज में 28 साल पहले हुई डकैती मामले में दोषी को बरी करने का आदेश दिया है.

पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 23, 2025 at 2:30 PM IST

3 Min Read
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पटना: पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनाई में 28 साल पुराने मामले में दोषी को बरी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने किशनगंज के अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए घटना के दोषी गोविंद पासवान को बरी कर दिया है.

जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई के बाद अपने 27 पन्ने के आदेश में कहा कि 'सूचक जब प्राथमिकी दर्ज कराया तो कहा कि डकैत को देखने पर पहचान लेंगे. टीआईपी परेड को दौरान अपने घर के परोस में रहने वाले दुकानदार को डकैत के रूप में पहचान की.

रिहा करने का आदेश: कोर्ट का कहना था कि जब वह डकैत को जानते थे तब प्राथमिकी दर्ज करते समय यह खुलासा नहीं किये. कोर्ट ने सूचक की मंशा पर शक जाहिर करते हुए संदेह का लाभ दोषी को दिया. अपने आदेश में रिहा करने का आदेश दिया.

किशनगंज का मामला: यह मामला किशनगंज जिले के कोचाधामन क्षेत्र का है. 4 अप्रैल 1997 को रात एक बजे सूचक के घर में 10-12 डकैतों ने डकैती की. सूचक के अनुसार उनका छोटा बेटा मोहम्मद शाहिद आलम दरवाजे पर सो रहा था. 10-12 लोग आए और उसके छोटे बेटे पर हमला करने लगे. उसके हाथ पीछे बांध दिए. दरवाजा खोलकर चार लोग घर में घुस गए और उन्होंने सूचक और उसकी पत्नी पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया.

सोना-चांदी की लूट: बदमाशों ने बक्सा तोड़कर उसमें से सामान निकालना शुरू कर दिए. घर में घुसे डाकुओं के हाथों में लाठी, कुल्हाड़ी, मशाल थे. पीड़ित ने शोर मचाया तो जान से मारने की धमकी दी. डाकुओं ने बक्सा तोड़कर चांदी का कंगन (6 भर), चांदी का हार (16 भर), चांदी की पजामी (20 भर), चांदी का झुमका (4 भर) और अन्य सामान निकाल लिया.

नकद भी लूटने का आरोप: 30-45 मिनट तक घर में रह कर 1800/- रुपये नकद, फिलिप्स रेडियो, घड़ी, साड़ी, कमीज-पैंट आदि कि लूटपाट की. सूचक के अनुसार डकैतों ने लुंगी और कमीज पहन रखी थी. उनकी उम्र लगभग 25-40 वर्ष थी. उनमें से कुछ सांवले थे, जबकि कुछ गोरे थे. उनकी लंबाई सामान्य थी.

कोर्ट ने दुकानदार को सुनाई सजा: सूचक ने दावा किया कि लालटेन की रोशनी में डकैतों की पहचान की. घटना को लेकर कोचाधामन पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 395 और 397 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. सूचक ने पड़ोसी दुकानदार गोविंद पासवान को आरोपी बनाया. किशनगंज कोर्ट ने दुकानदार को आईपीसी की धारा 395 के तहत दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई.

झूठा केस में फंसा दिया: पटना हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में वकील ने कोर्ट को बताया गया कि दुकानदार से सूचक के साथ कहासुनी हुई थी. जिसको लेकर पंचायती भी हुई थी. पुराने विवाद को लेकर दुकानदार को झूठा केस में फंसा दिया. कोर्ट ने इस केस में अनेक खामियों को पाते हुए दोषसिद्धि निर्णय और सजा आदेश को रद्द कर दिया. दोषी को जेल से बरी करने का आदेश दिया.

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