बिहार के जेलों में कड़े पहरे में रहेंगे कैदी, सरकार को HC ने 9 महीने का दिया वक्त
पटना उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है. पढ़ें खबर

Published : January 8, 2026 at 9:07 PM IST
पटना : पटना हाई कोर्ट ने राज्य में मॉडल प्रिजन मैन्युअल, 2016 लागू करने को दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रक्रिया को 9 महीने में पूरा करने का आदेश दिया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस जस्टिस सुधीर सिंह व जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अभिनव शांडिल्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है.
SC के निर्देश के मुताबिक मैन्युअल फ्रेम : दरअसल, ये मैन्युअल को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा फ्रेम किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक उक्त मैन्युअल को फ्रेम किया गया है, ताकि देशभर के जेलों के मामले में नियंत्रित करने वाले कानूनों तथा नियमों में कुछ स्तर तक एकरूपता लाई जा सके.
मामला हुआ निष्पादित : राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले को लेकर कमेटी द्वारा कई बार बैठकें बुलाई जा चुकी हैं. साथ ही वर्तमान समय में सक्रिय तौर पर विचार किया जा रहा है. इसके साथ ही इस मामले को निष्पादित कर दिया गया.

राज्य सरकार से जवाब-तलब : वहीं दूसरे मामले में पटना उच्च न्यायालय ने पीएमसीएच में इलाज के दौरान एक बच्ची की मौत मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस जस्टिस सुधीर सिंह तथा जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने विनय भूषण प्रसाद की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले में राज्य सरकार को चार हफ्ते के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया.
2 फरवरी को सुनवाई : वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी ने.पीएमसीएच की कार्यप्रणाली और और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना था कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण एक बच्ची की मौत हो गई. इस मामले पर 2 फरवरी 2026 को फिर सुनवाई होगी.
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