पटना हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, बिहार में ट्रैफिक चालान विवाद अब लोक अदालत में निपटेंगे
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में ट्रैफिक चालान विवादों को लोक अदालत में निपटाने के लिए ओडिशा जैसी अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया. पढ़ें खबर-

Published : April 20, 2026 at 2:50 PM IST
पटना: पटना हाईकोर्ट ने बिहार में ट्रैफिक चालान काटे जाने से जुड़े विवादों को लोक अदालत में नहीं ले जाने के मुद्दे पर गंभीरता से सुनवाई की है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने रानी तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को ओडिशा राज्य की तर्ज पर एक अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है. इस अधिसूचना में स्पष्ट किया जाएगा कि ऐसे विवादों का निपटारा कौन से अधिकारी करेंगे तथा न्यूनतम कितनी धनराशि तक के चालान विवादों को सुलझाया जा सकेगा.
सामान्य कोर्ट पर बोझ कम करने पर जोर: कोर्ट ने कहा कि विभिन्न राज्यों में ट्रैफिक चालान संबंधी विवादों को लोक अदालत और विशेष लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाता है. ओडिशा का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने बताया कि वहां इन मामलों का प्रभावी निपटारा लोक अदालतों के जरिए होता है. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि सामान्य अदालतों पर बोझ कम करने के लिए ही लोक अदालतों और विशेष लोक अदालतों का गठन किया गया है. अगर ऐसे विवाद लोक अदालतों में सुलझ जाते हैं तो अदालतों का समय बचेगा और आम लोगों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा.
याचिकाकर्ता के वकील ने अन्य राज्यों के उदाहरण दिए: याचिकाकर्ता रानी तिवारी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ में लगातार दो सप्ताह लोक अदालत चलाकर बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान विवादों का समाधान किया गया. उन्होंने महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि वहां इन विवादों को लोक अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाता है. बिहार में हालांकि चालान मनमाने ढंग से काटे जाते हैं, लेकिन इनके निपटारे के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है, जिससे लोगों को परिवहन विभाग की मनमानी का शिकार होना पड़ता है.
बिहार में लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं?: पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह जानना चाहा था कि दूसरे राज्यों की तरह बिहार में ट्रैफिक चालान विवादों के निपटारे के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने राज्य सरकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (बालसा) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा में विभाग की सक्रियता के कारण ऐसे मामले बड़ी संख्या में लोक अदालतों में पहुंचते हैं और वहां उनका निपटारा हो जाता है.
परिवहन विभाग पर मनमानी का आरोप: अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को अवगत कराया कि यदि ट्रैफिक चालान लंबित रहता है तो वाहन मालिकों से जबरन चालान कटवाया जाता है. चालान न कटने तक प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं दिया जाता है. यह मनमानी लगातार जारी है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. याचिका में मांग की गई है कि बिहार में भी ट्रैफिक चालान विवादों को लोक अदालत या विशेष लोक अदालत के माध्यम से सुलझाया जाए, ताकि लोगों को तेज न्याय मिल सके.
"अगर ट्रैफिक चालान लंबित होता है, तो उनसे जबरदस्त्ती ट्रैफिक चालान कटवाया जाता है. जब तक ट्रैफिक चालान नहीं काटे जाते, तब तक उन्हें प्रदूषण बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता. ये मनमानी लगातार जारी है."-विकास कुमार पंकज, अधिवक्ता
अधिसूचना से स्पष्ट होगा निपटारे का अधिकार क्षेत्र: कोर्ट द्वारा निर्देशित अधिसूचना में यह साफ किया जाएगा कि ट्रैफिक चालान संबंधी विवादों का निबटारा कौन से अधिकारी करेंगे. साथ ही यह भी तय होगा कि न्यूनतम कितनी राशि तक के विवादों को इस प्रक्रिया के तहत सुलझाया जा सकेगा. इससे बिहार में भी अन्य राज्यों जैसा 'पॉकेट फ्रेंडली' तंत्र विकसित हो सकेगा, जहां चालान की राशि कम करके निपटारा किया जा सकता है.
27 अप्रैल को अगली सुनवाई: पटना हाईकोर्ट ने इस मामले पर राज्य सरकार को अधिसूचना जारी करने के संबंध में अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है. कोर्ट की इस पहल से उम्मीद है कि बिहार में ट्रैफिक चालान विवादों के निपटारे के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनेगी, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी और अदालतों का बोझ भी कम होगा.
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