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पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द

बिहार के मिर्जा गालिब कॉलेज के 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द हो गई. पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. पढ़ें पूरा मामला.

Mirza Ghalib College gaya
20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 23, 2026 at 5:07 PM IST

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गया: बिहार के अल्पसंख्यक महाविद्यालय, मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज के 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द हो गई है. पटना हाईकोर्ट के डबल बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने माना है कि अल्पसंख्यक महाविद्यालय ने नियमों का घोर उल्लंघन किया है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के पहले के फैसले को बरकरार रखा है. अब इस फैसले के बाद 20 असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे हैं.

20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द: कोर्ट ने विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने का हवाला दिया है. इस बहाली में पाया गया है कि नियमों का घोर उल्लंघन हुआ है. कोर्ट ने माना है कि बहाली प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियों और सिलेक्शन कमेटी का गलत गठन कर बहाली की गई है, जिन विषयों में बहाली हुई थी उनमें फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स और साइकोलॉजी विषय शामिल थे.

20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द (ETV Bharat)

2024 में सिंगल बेंच ने सुनाया था फैसला: इस बहाली मामले पर पहले जस्टिस अंजनी कुमार शरण ने 2024 में सुनवाई करते हुए बहाली प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां पाए जाने पर रद्द कर दिया था. प्रभावित टीचरों ने एकल जज बेंच के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने कोई राहत नहीं दी है.

2019 में विज्ञापन कर दिया गया था रद्द: इस केस की डिटेल्स के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पहली बार मार्च 2018 में विज्ञापन दिया गया था और फरवरी 2019 में इंटरव्यू हुआ था. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन समिति ने बिना कोई कारण बताए अक्टूबर 2019 में विज्ञापन को रद्द कर दिया और पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन देकर फिर से बहाली की प्रक्रिया की थी. इसमें गड़बड़ी को लेकर कुछ एप्लीकेंट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसी को लेकर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.

2021 में दी गई थी चुनौती: मिर्जा गालिब कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अली हुसैन ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि 2021 की भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. 2021 में 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली हुई थी. बहाली पर पहले से कॉलेज में एडहॉक पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने आरोप लगाया था कि भरती में नियमों का पालन नहीं किया गया है. कॉलेज प्रबंधन समिति पर नियमों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने 2021 में ही बहाली के विरुद्ध हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

नियमों का हुआ था उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखते हुए हवाला दिया था कि साक्षात्कार आयोजित करने के लिए चयन समिति बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम धारा 57 ए और 57 बी में निहित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. साक्षात्कार चयन समिति वैधानिक आदेश के अनुसार गठन नहीं किया गया है.

मगध विश्वविद्यालय ने कही ये बात: दावा किया गया था कि इसमें विश्वविद्यालय का कोई प्रतिनिधि नहीं था. विश्वविद्यालय से कोई परामर्श भी नहीं किया गया था. इस पूरे मामले की जांच के बाद कोर्ट में मगध विश्विद्यालय ने भी माना था कि नियमों का उल्लंघन हुआ है और विश्वद्यालय ने कोर्ट में हलफनामा दिया था.

"बहाली कॉलेज प्रबंधन ने नियमों का ख्याल रखते हुए ही किया था, लेकिन मगध विश्वविद्यालय ने उसे नहीं माना.अब इस परिस्थिति में कोर्ट ने बहाली रद्द कर दी है और एक नए विज्ञापन के साथ फिर से बहाली निकाली जाएगी. नई बहाली में सभी एलिजिबल व्यक्ति भाग ले सकते हैं, लेकिन सारी प्रक्रिया नए ढंग से होंगे और विश्वविद्यालय के सभी मानकों और नियमों का पूर्ण ख्याल रखा जाएगा."- डॉ अली हुसैन, प्रिंसिपल, मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज

15 से ज्यादा दर्ज हैं केस: मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज के द्वारा बाहर किए गए विभिन्न पदों की बहालियों पर हमेशा प्रश्न उठाते रहे हैं. यही कारण है कि 15 से ज्यादा मुकदमा अभी पटना हाईकोर्ट में लंबित है. यह सभी कैसे विभिन्न बहालियों को लेकर है. कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन समिति को भी खरी खोटी सुनाई है.

न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण के विस्तृत निर्णय सीडब्ल्यूसी संख्या 10 935/ 21 कहा था कि शैक्षणिक चरित्र और मानकों को सुनिश्चित करने और एकेडमिक उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए नियामक उपाय किए जाने चाहिए. प्रशासन पर आवश्यक नियंत्रण भी रखना वांक्षित है, ताकि प्रशासन कुशल और सुदृढ़ रहे और संस्थान की शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके.

अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान नियमों का करें पालन: अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं के प्रशासन में प्रदर्शित की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्य के कई प्रसिद्ध मुस्लिम बुद्धिवियों ने कहा है कि नियुक्तियों के मामले में भाई भतीजावाद और बाहरी प्रभावों की सामान्य शिकायत रही है. अल्पसंख्यक संस्थाओं को मिले संवैधानिक संरक्षण का दुरुपयोग भी हुआ है. माना है कि इनमें से कुछ शिकायत पूरी तरह निराधार नहीं हैं. मुस्लिम अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में अनावश्यक मुकदमा बाजी की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का भी विषय है.

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