ETV Bharat / state

पोक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा काट रहे शख्स को पटना HC ने किया बरी

पटना उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. ट्रायल कोर्ट ने पोक्सो एक्ट के तहत जिस शख्स को उम्रकैद दिया था, उसे बरी कर दिया.

PATNA HIGH COURT
कॉसेप्ट फोटो (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 17, 2025 at 1:40 PM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना : पटना हाईकोर्ट ने पोक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा काट रहे एक शख्स को बड़ी राहत दी है. उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया. जस्टिस विवेक चौधुरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया.

'नाबालिग होने का कोई ठोस सबूत नहीं' : कोर्ट ने कहा कि पोक्सो जैसे गंभीर कानून में अभियोजन का दायित्व होता है कि वह पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम होने का ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करे, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया. कोर्ट ने पाया कि जांच के दौरान उम्र निर्धारण से जुड़े प्राथमिक दस्तावेज जैसे स्कूल रिकॉर्ड, मैट्रिक प्रमाण पत्र एकत्र नहीं किए गए.

PATNA HIGH COURT
पटना उच्च न्यायालय (ETV Bharat)

संदेह का मिला लाभ : कोर्ट ने माना कि केवल मेडिकल टेस्ट के आधार पर पीड़िता को नाबालिग मानना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि इस परीक्षण में एक-दो वर्ष तक की त्रुटि संभव है. कोर्ट ने कहा कि संदेह की स्थिति में उसका लाभ अभियुक्त को दिया जाना न्याय का स्थापित सिद्धांत है.

प्रेम करने के दौरान बना शारीरिक संबंध : खंडपीठ ने यह भी पाया कि अभियुक्त और पीड़िता के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे और दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने. मेडिकल रिपोर्ट में जबरदस्ती के कोई ताजा या ठोस संकेत नहीं मिले.

भागलपुर ट्रायल कोर्ट के फैसले को किया गया रद्द : सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि केवल संबंध टूटने या विवाह न होने से सहमति-आधारित संबंध को आपराधिक नहीं ठहराया जा सकता. इन परिस्थितियों में अभियोजन आरोप सिद्ध करने में असफल रहा. परिणामस्वरूप ट्रायल कोर्ट, भागलपुर के वर्ष 2019 के फैसले को रद्द करते हुए अभियुक्त की तत्काल रिहाई का आदेश दिया गया.

क्या था मामला ? : दरअसल, थाने में शिकायत दर्ज करायी गई थी कि नाबालिग पीड़िता के साथ जबरदस्ती की गई है. मामला न्यायालय में पहुंचा था. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद यह मामला पटना उच्च न्यायालय पहुंचा था.

ये भी पढ़ें :-

पटना हाईकोर्ट ने रुचि को 'माता-पिता की कैद' से बचाया, पुलिस को दिया ये निर्देश

95 साल के बुजुर्ग ससुर को 13 साल बाद मिली राहत, पटना हाईकोर्ट ने किया बरी

पति को 10 साल जेल में गुजारनी होगी रात, पत्नी की हत्या का आरोप, पटना HC ने सजा बरकरार रखा