95 साल के बुजुर्ग ससुर को 13 साल बाद मिली राहत, पटना हाईकोर्ट ने किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में 95 साल के एक बुजुर्ग को झूठे आरोपों से बरी कर दिया है.

Published : December 9, 2025 at 1:58 PM IST
पटना: पटना हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई करते हुए 13 साल बाद फैसला सुनाया है. मामले में कोर्ट ने 95 साल के बुजुर्ग ससुर रविंद्र चौधरी को राहत देते हुए झूठे मुकदमे से रिहा कर दिया. अदालत ने शादीशुदा महिलाओं द्वारा दहेज हत्या जैसे कानून के दुरुपयोग की निंदा की. जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने रविन्द्र चौधरी की अपराधिक याचिका को मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया है.
अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा? : पटना हाईकोर्ट ने कहा कि, महिलाएं दहेज की मांग के बेबुनियाद आरोप लगा कर ससुराल पक्ष को फंसाने की कोशिश करती हैं. दहेज हत्या जैसे आपराधिक कानून का दुरुपयोग करती है. इसी के साथ कोर्ट ने 13 साल पुराने मामले में बुजुर्ग को आरोपों से बरी कर दिया.
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट का दिया हवाला : जस्टिस सिंह ने अपना यह निर्णय, सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम न्याय निर्देशों के आलोक में सुनाया. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि, ऐसा अमूमन देखा जाता है कि विवाहिता द्वारा पूरे ससुराल वालों को अपराधिक अभियोजन का सामना करने लिए पूरे मामले घसीटा जाता है.
निचली अदालत ने खारिज कर दी थी बुजुर्ग की याचिका : पटना हाईकोर्ट ने वैशाली के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसडीजे एम (हाजीपुर) के 1 मार्च, 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत निचली अदालत ने रविन्द्र चौधरी को दहेज प्रताड़ना के आरोपों से मुक्त करने के आवेदन को रद्द कर दिया था.
पति, सास, ससुर के खिलाफ दहेज की शिकायत : 3 मार्च 2008, रविन्द्र चौधरी के बेटे की शादी सोनी (बदला हुआ नाम) से हुई थी. एक साल दोनों को एक बेटा हूं. इसी बीच घर में झगड़ा होने लगा. इसके बाद घर की बहू अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ निचली अदालत पहुंची. महिला ने दरभंगा कोर्ट में दहेज की मांग को लेकर पति, सास, ससुर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया.
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