प्रधानमंत्री मुद्रा लोन का झांसा देकर लाखों की ठगी, बिहार पुलिस ने युवती सहित तीन शातिरों को किया गिरफ्तार
पटना पुलिस ने मुद्रा लोन के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले साइबर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया. नकदी व अन्य सामग्री बरामद

Published : July 2, 2026 at 8:48 PM IST
पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर क्राइम थाना पुलिस और CCSU की संयुक्त टीम ने प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी ऋण योजनाओं के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस की संयुक्त विशेष टीम ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवती सहित तीन आरोपियों को धर दबोचा है.
सामान जब्त: गिरफ्तार ठगों के कब्जे से पुलिस ने छापेमारी के दौरान 6,08,650 रुपये नकद, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैब, 15 एटीएम कार्ड, सात सिम कार्ड, पांच चेकबुक, चार पासबुक और तीन नोटबुक बरामद किए हैं. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सभी जब्त उपकरणों और अहम दस्तावेजों से गिरोह के पूरे नेटवर्क तथा ठगी के अन्य मामलों का भी बड़ा खुलासा हो सकता है.
जालसाजी का तरीका: प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन तथा अन्य सरकारी योजनाओं के नाम पर बेहद आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करता था. इन विज्ञापनों को देखकर जब विभिन्न राज्यों के जरूरतमंद लोग लोन के लिए आवेदन करते थे, तब आरोपी मेटा प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदकों की पूरी व्यक्तिगत जानकारी आसानी से प्राप्त कर लेते थे.
दिनांक 01.07.2026 की रात्रि में #साइबर थाना पटना को सी.सी.एस.यू. के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि पत्रकारनगर थाना क्षेत्र में कुछ व्यक्ति संगठित रूप से साइबर अपराध से संबंधित अवैध गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
— Patna Police (@PatnaPolice24x7) July 2, 2026
सूचना के सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु एक साइबर थाना पटना एवं… pic.twitter.com/IzYf43nC2S
फर्जी अप्रूवल: इसके बाद गिरोह के सदस्य लोन लेने के इच्छुक लोगों से सीधे संपर्क कर उनका विश्वास जीतते थे और आरोपियों द्वारा फर्जी 'लोन अप्रूवल लेटर' तैयार कर पीड़ितों को भेजा जाता था, जिससे पीड़ितों को यह विश्वास हो जाता था कि उनका लोन स्वीकृत हो चुका है. इसके बाद जीएसटी, प्रोसेसिंग फीस, अप्रूवल फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर क्यूआर कोड और यूपीआई के माध्यम से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली जाती थी.
संपर्क ठप: पैसे बैंक खातों में ट्रांसफर होने के तुरंत बाद आरोपी पीड़ितों से अपना संपर्क पूरी तरह तोड़ देते थे. साइबर थाना प्रभारी सह डीएसपी नीतिश चंद्र धारिया ने बताया कि गुप्त सूचना मिलने के बाद साइबर थाना और CCSU की संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया. सूचना का सत्यापन करने के बाद टीम ने पटना में छापेमारी कर गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया.
मुख्य आरोपी: डीएसपी धारिया के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अक्षय कुमार (22), शिवम कुमार (22) और रिमझिम कुमारी (20) के रूप में हुई है. पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े दो अन्य संदिग्ध लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दो अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.
सफल टीम: इस सफल कार्रवाई में साइबर थाना की पुलिस अवर निरीक्षक शबनम कुमारी, पुलिस अवर निरीक्षक निरमा बैठा, सिपाही चंदन कुमार, सिपाही रितिक कुमार तथा CCSU पटना के अन्य पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
"गुप्त सूचना मिलने के बाद साइबर थाना और CCSU की संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसके बाद सूचना का सत्यापन किया गया फिर बाद में टीम ने पटना में छापेमारी कर गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया.दो अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है" -नीतिश चंद्र धारिया,साइबर डीएसपी सह थाना प्रभारी पटना
जांच जारी: फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और इस गिरोह के पूरे देशव्यापी नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस की जांच लगातार जारी है. पुलिस टीम विभिन्न राज्यों में फैले इनके संपर्कों को खंगाल रही है ताकि ठगी की गई अन्य राशियों और बैंक खातों का पता लगाया जा सके और इस गिरोह को जड़ से खत्म किया जा सके.
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