हाईकोर्ट : मोटर वाहन उप निरीक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वर्ष 2021 की भर्ती में केवल डिप्लोमा वाले ही पात्र...लाइसेंस नवीनीकरण पर परिवहन सचिव तलब
हाईकोर्ट के कार्यवाहक सीजे की अगुवाई वाली खंडपीठ ने लंबित भर्ती प्रक्रिया को तत्काल पूरी करने के आदेश दिए.

Published : May 27, 2026 at 8:36 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने मोटर वाहन उप निरीक्षक भर्ती-2021 में नियुक्तियों का रास्ता साफ करते हुए एकलपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश मनोज शर्मा व अन्य की अपीलों का निस्तारण करते हुए दिए. एकलपीठ ने 22 फरवरी, 2023 को याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कर्मचारी चयन बोर्ड के 15 दिसंबर, 2021 के कार्यालय आदेश को रद्द कर भर्ती विज्ञापन के अनुसार इंजीनियरिंग में डिग्री धारकों को हटाते हुए परिणाम जारी करने को कहा था.
इधर, हाईकोर्ट ने एनसीआर के अलवर जिले में 10 साल से कम पुराने डीजल और बीएस 4 वाहनों के परमिट और फिटनेस लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने पर प्रमुख परिवहन सचिव समेत कई अधिकारियों से जवाब मांगा और प्रार्थी निजी स्कूल के बस संचालकों को राहत दी.
भर्ती प्रक्रिया को तत्काल पूरी करने के आदेश : हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मोटर वाहन उपनिरीक्षक की लंबित भर्ती प्रक्रिया को तत्काल पूरी करने के आदेश दिया. डबल बेंच ने कहा कि एकलपीठ के आदेश में कोई विधिक त्रुटि नहीं है. ऐसे में उसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है. अदालत ने कहा कि यह स्थापित नियम है कि एक बार खेल शुरू होने के बाद उसने नियमों को बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती. ऐसे में राज्य सरकार ने बाद में नियम संशोधित कर दिया तो भी वह संशोधन की तारीख से ही प्रभावी होगा. उसे पहले से जारी भर्ती विज्ञापन पर लागू नहीं किया जा सकता.
प्रकरण के जुड़े अधिवक्ता एमएफ बेग ने बताया कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने 24 नवंबर, 2021 को मोटर वाहन उप निरीक्षक पद के लिए भर्ती निकाली थी. बाद में 15 दिसंबर, 2021 को आदेश जारी कर डिग्री धारकों को भी इसका पात्र मान लिया. इस पर कुछ अभ्यर्थियों ने एकलपीठ ने याचिका दायर की थी. इस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने बोर्ड के 15 दिसंबर के आदेश को रद्द कर पुन: परिणाम जारी करने को कहा था. इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई. अपीलार्थियों का कहना था कि डिप्लोमा से उच्च योग्यता होने के कारण उन्हें भर्ती में शामिल किया जाए.
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लाइसेंस नवीनीकरण पर अधिकारी तलब: इधर, हाईकोर्ट ने एनसीआर के अलवर जिले में 10 साल से कम पुराने डीजल और बीएस 4 वाहनों के परमिट और फिटनेस लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने पर प्रमुख परिवहन सचिव, परिवहन आयुक्त व स्थानीय क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से जवाब मांगा है. वहीं प्रार्थी स्कूल के बस संचालकों को राहत देते हुए परिवहन विभाग के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें इन बसों के चलाने पर पाबंदी लगाई थी. जस्टिस मनीष शर्मा ने यह निर्देश चिल्ड्रंस एकेडमी कॉन्वेंट स्कूल की याचिका पर दिया.
स्कूल ने ये दिए थे तर्क: याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि संस्था के अधीन चलने वाले स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए करीब छह साल पुरानी बीएस 4 बसें चलती हैं. क्षेत्रीय परिवहन ऑफिस ने इन बसों का 15 साल के लिए पंजीकरण किया, लेकिन बाद में प्रार्थी ने इनके परमिट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो परिवहन विभाग ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, 2021 की गाइडलाइन का हवाला दे नवीनीकरण से मना कर दिया. विभाग का कहना था कि एनजीटी के निर्णय के बाद आयोग के निर्देश के तहत एनसीआर व दिल्ली में केवल सीएनजी, ईवी और बीएस 5 व 6 गुणवत्ता के वाहन ही चलाने की मंजूरी है.
इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि आयोग के निर्देश अन्य राज्यों से दिल्ली में प्रवेश वाली इंटरसिटी व इंटर स्टेट सार्वजनिक बस सेवाओं पर ही लागू हैं. प्रार्थी की स्कूल बसें केवल अलवर जिले में ही विद्यार्थियों के आवागमन का काम करती हैं. दिल्ली या इंटरसिटी संचालन से इनका कोई संबंध नहीं है. आयोग के निर्देश संख्या 93 में स्पष्ट किया कि स्कूल बसें इस दायरे में नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी बीएस 4 मानकों को पूरा करने वाले दस साल तक के डीजल वाहनों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दे रखे हैं. इसके अलावा ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की बसों को छूट है, लेकिन प्रार्थी की स्कूल बसों को छूट नहीं दी है. इसलिए बसों के फिटनेस लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाए.

