कान्हा की डिजाइनर पोशाक बनाने के शौक से शुरू किया खुद का बिजनेस, महिलाओं को दे रहीं रोजगार
राहुल श्रीवास्तव के संपादन में पेश है संवाददाता संजय श्रीवास्तव की खास रिपोर्ट.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 2, 2026 at 11:24 PM IST
शाहजहांपुर : "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है." यह लाइनें शाहजहांपुर की रहने वाली ज्योति सक्सेना पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं. पिता की मौत के बाद परिवार को काफी आर्थिक संकट झेलना पड़ा. जिसके बाद उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के सुंदर वस्त्र हाथों से तैयार करके बिक्री शुरू की. देखते-देखते उसकी लगन और मेहनत रंग लाई और उसने यह व्यवसाय बना लिया.
शाहजहांपुर जिले में आवास विकास इलाके की रहने वाली ज्योति सक्सेना पोस्ट ग्रेजुएशन हैं. उनके पिता का 2019 में स्वर्गवास हो गया था. ज्योति सक्सेना ने बताया कि वह अपने कान्हा के लिए पहले बाजार से पोशाक खरीदती थीं, फिर सोचा क्यों ना अपने हाथों से ही पोशाक बनाई जाए. वह कहती हैं कि जब उन्होंने अपने कान्हा के लिए पहली बार पोशाक बनाई, उसको लोगों ने बेहद ही पसंद किया. उसके बाद मैं अपनी क्रिएटिविटी को अपना बिजनेस बना लिया.

उन्होंने बताया कि यह काम मैंने अपने पॉकेट मनी से ही शुरू किया था. मैंने अपने काम को बढ़ाने के लिए जिला उद्योग केंद्र से लोन भी लिया और ओडीओपी योजना के तहत इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी सम्मिलित हुई थी. वह बताती हैं कि मैंने अपने काम को ही अब अपना रोजगार बना लिया है. इसके साथ ही मैं अब दूसरे लोगों को जॉब देने लगी हूं. मैं आत्मनिर्भर होकर कान्हा के पोशाकों का बिजनेस आगे बढ़ा रही हूं.

उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने कान्हा की पोशाक ऑफलाइन बिक्री की थी, लेकिन अब ऑर्डर मिलने पर वह पोशाक तैयार कर देती हैं. इतना ही नहीं अपने हाथों से कान्हा की पोशाक तैयार करती हैं. उसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें देश के कोने-कोने से आर्डर मिलते हैं.

उनका यह भी कहना है कि उन्होंने अपने ही शहर की कई महिलाओं को इस रोजगार में लगा रखा है. उनके साथ-साथ और भी महिलाएं इस व्यापार में अपना हुनर दिखा रही हैं. उनका कहना है कि वह पोशाकें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बेचती हैं. रिटेल और होलसेल दोनों माध्यम से सेल करती हैं. उनकी इच्छा है कि वह देश-विदेश सभी जगह अपने कान्हा की पोशाकें बेचना चाहती हैं.

उनकी माता कुसुम लता सक्सेना का कहना है कि उनकी बेटी के सिर पर पिता का साया नहीं है लेकिन इसके बावजूद उसने अपनी मेहनत और लगन के दम पर आज एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी मैं क्या सभी लोग प्रशंसा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी भगवान की पोशाक बनाने के लिए पहले कपड़े मंगवाती है और सजाने के लिए समान मंगवाती है.

उन्होंने बताया कि इसके वह भगवान के वस्त्र तैयार करती है और उसके बाद तैयार वस्त्र को बाहर भेजते हैं. उन्होंने मांग की है कि उनकी बेटी के द्वारा तैयार किए गए भगवान के वस्त्र के व्यवसाय में उनकी मदद और प्रोत्साहन करें जिससे कि यह व्यापार और अच्छा चल सके.
उपायुक्त उद्योग संजय सिंह का कहना है कि जिला उद्योग उद्यमिता एवं प्रोत्साहन विभाग द्वारा इस समय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए "एक जनपद एक उत्पाद" योजना के तहत ऋण दिया जा रहा है. जिस पर सरकार द्वारा उन्हें 25% से लेकर 20 लाख रुपये तक की अनुदान की व्यवस्था है.
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 250 इकाइयों को लाभान्वित किया गया है. इससे जुड़े लोगों के व्यवसाय में काफी वृद्धि हो रही है. इसके साथ ही परंपरागत व्यवसाय करने वाले लोगों के कौशल वृद्धि के लिए ओडीओपी टूल किट प्रशिक्षण योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत 10 दिवसीय प्रशिक्षण निशुल्क दिया जाता है और नई तकनीकी से उनको अवगत कराया जाता है.
उन्होंने बताया कि उनको मार्केटिंग के नए तरीके दिखाएं जाते हैं. अब तक 1650 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इसके साथ ही ओडीओपी विपणन प्रोत्साहन योजना के तहत घरेलू, प्रदेश स्तरीय, देश स्तरीय या विदेश स्तरीय कैंप में आने-जाने का किराया और स्टाल चार्ज की प्रतिपूर्ति भी सरकार द्वारा की जा रही है.
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत पांच लाख रुपये तक 21 से 40 उम्र के युवाओं को 100% ब्याज मुक्त 10% अनुदान किसके साथ ही सरकार रोजगार की गारंटी भी ले रही है. अब तक जनपद में 2675 लोगों को लाभान्वित कराया जा चुका है.
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