हिमाचल की अनुष्का ने परीक्षा पे चर्चा 2026 में PM मोदी से किया सीधा संवाद, कहा- अब परीक्षा डर नहीं, उत्सव लगती है
प्रधानमंत्री मोदी ने अनुष्का की बातों की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षा का डर अक्सर हमारे मन से पैदा होता है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 6, 2026 at 7:02 PM IST
शिमला: परीक्षा के तनाव से बच्चों को मुक्त करने और पढ़ाई को सकारात्मक अनुभव बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम "परीक्षा पे चर्चा 2026" आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित छात्रों ने प्रधानमंत्री से सीधे संवाद किया. खास बात यह रही कि हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की 10वीं कक्षा की छात्रा अनुष्का को पीएम मोदी से बातचीत करने का अवसर मिला. अनुष्का ने न सिर्फ अपनी बात बेझिझक रखी, बल्कि परीक्षा को लेकर बदलती सोच का उदाहरण भी प्रस्तुत किया.
हिमाचल की अनुष्का को मिला खास मौका
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, उदयपुर की छात्रा अनुष्का को इस राष्ट्रीय मंच पर प्रधानमंत्री से संवाद के लिए चुना गया. वह हिमाचल प्रदेश से इस कार्यक्रम में संवाद करने वाली एकमात्र छात्रा रहीं. उनके साथ उनकी एस्कॉर्ट शिक्षिका पूनम आनंद भी मौजूद रहीं. अनुष्का के लिए यह पल न केवल गर्व का विषय था, बल्कि जीवनभर याद रहने वाला अनुभव भी बन गया.
स्कूलों में हुआ कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
परीक्षा पे चर्चा 2026 का प्रभावी प्रसारण सुनिश्चित करने के लिए समग्र शिक्षा विभाग की ओर से विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. एससीईआरटी के सहयोग से प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों ने कार्यक्रम को लाइव देखा. कक्षाओं में बैठकर बच्चों ने प्रधानमंत्री की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और संवाद का हिस्सा बने.
एग्जाम वारियर्स से बदली अनुष्का की सोच
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अनुष्का ने प्रधानमंत्री मोदी की पुस्तक "एग्जाम वारियर्स" का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि इस पुस्तक ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया. अनुष्का ने कहा कि पहले जैसे ही डेटशीट आती थी, मन में डर बैठ जाता था और तनाव बढ़ जाता था. लेकिन एग्जाम वारियर्स पढ़ने के बाद परीक्षा को देखने का नजरिया बदल गया है.
अनुष्का ने प्रधानमंत्री से संवाद करते हुए कहा कि अब उन्हें परीक्षा बोझ नहीं लगती, बल्कि एक उत्सव की तरह महसूस होती है. उन्होंने कहा कि पुस्तक का सबसे बड़ा संदेश यही है कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर है. इस सोच ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया है और वे अब बिना डर के परीक्षा की तैयारी कर पाती हैं.
'डर मन से पैदा होता है'
प्रधानमंत्री मोदी ने अनुष्का की बातों की सराहना करते हुए कहा कि परीक्षा का डर अक्सर हमारे मन से पैदा होता है. उन्होंने कहा कि जब सोच बदल जाती है, तो परिस्थितियां भी आसान हो जाती हैं. पीएम मोदी ने कहा कि जैसे एग्जाम वारियर्स अनुष्का के लिए उपयोगी साबित हुई, वैसे ही यह अन्य छात्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकती है. प्रधानमंत्री ने छात्रों से अपील की कि वे अपने माता-पिता और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों को भी एग्जाम वारियर्स पढ़ने के लिए कहें. उन्होंने कहा कि जब अभिभावक बच्चों की भावनाओं और दबाव को समझेंगे, तो बच्चों को भी बेहतर माहौल मिलेगा. उन्होंने दोहराया कि परीक्षा को फेस्टिवल की तरह मनाना ही तनाव से बचने का सबसे सरल तरीका है.
देशभर के छात्रों से हुआ संवाद
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 36 छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे संवाद किया. छात्रों ने पढ़ाई, समय प्रबंधन, करियर, मानसिक दबाव और सोशल मीडिया जैसे विषयों पर सवाल पूछे. प्रधानमंत्री ने हर सवाल का सरल और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया.
शिक्षा के साथ खेल और कौशल भी जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षा जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां और कौशल विकास भी उतने ही जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि केवल किताबों में उलझे रहना सही नहीं है, बल्कि जीवन को संतुलन के साथ जीना चाहिए. प्रधानमंत्री ने छात्रों को सपने देखने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि सपने न देखना अपराध है, लेकिन सपनों को पूरा करने के लिए योजना, मेहनत और धैर्य जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुविधाएं सफलता की गारंटी नहीं होतीं, बल्कि फोकस और आत्मविश्वास ही असली ताकत हैं.
टाइम मैनेजमेंट पर खास जोर
समय प्रबंधन को लेकर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे रोजमर्रा के कामों को डायरी में लिखें और दिन के अंत में उनकी समीक्षा करें. इससे न केवल पढ़ाई बेहतर होगी, बल्कि तनाव भी कम होगा. प्रधानमंत्री ने बच्चों को कंटेंट क्रिएशन, नई तकनीकें सीखने और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर काम करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि रचनात्मक सोच बच्चों को आत्मनिर्भर बनाती है.
अभिभावकों की भूमिका पर पीएम का संदेश
प्रधानमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें. उन्होंने कहा कि अंक जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होते. बच्चों को सहयोग और समझ के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए. कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आज के छात्र ही कल के भारत के निर्माता हैं और उन्हें जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा.
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने बताया, "परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के लिए हिमाचल से उदयपुर स्कूल की छात्रा अनुष्का का चयन किया गया था. कार्यक्रम के सफल प्रसारण के लिए सभी स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे. परीक्षा पे चर्चा छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्त करने और सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक साबित हो रहा है. ऐसे कार्यक्रम बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं."
परीक्षा पे चर्चा 2026 का उद्देश्य
"परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के भय, मानसिक दबाव और तनाव से बाहर निकालना है. प्रधानमंत्री मोदी इस मंच के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधे संवाद करते हैं और उन्हें पढ़ाई को बोझ नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा मानने की प्रेरणा देते हैं. वर्ष 2026 का यह संस्करण भी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला रहा.
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