बीड़ बिलिंग में फिर पैराग्लाइडिंग हादसा, पायलट की दर्दनाक मौत, 2025 में तीन पायलटों की गई जान
उड़ान के कुछ ही मिनट बाद पैराग्लाइडर बंद हुआ. हादसे में पर्यटक घायल.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 28, 2025 at 5:23 PM IST
|Updated : December 28, 2025 at 6:10 PM IST
कांगड़ा: विश्व विख्यात पैराग्लाइडिंग स्थल बीड़–बिलिंग एक बार फिर दर्दनाक हादसे सामने आया है. बिलिंग की टेक-ऑफ साइट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद पैराग्लाइडर अचानक बंद हो गया, जिससे नीचे सड़क के पास गिरकर स्थानीय युवा पायलट मोहन सिंह की मौत हो गई, जबकि उनके साथ उड़ान भर रहा पर्यटक घायल हो गया.
बीड़ बिलिंग में दर्दनाक पैराग्लाइडिंग हादसा
कांगड़ा पुलिस के अनुसार, मृतक पायलट की पहचान बीड़ क्षेत्र के बरोट निवासी मोहन सिंह के रूप में हुई है. मोहन सिंह रोजमर्रा की तरह पर्यटक को लेकर बिलिंग की टेक-ऑफ साइट से टैंडम उड़ान पर निकले थे. उड़ान के दौरान अचानक पैराग्लाइडर के बंद हो जाने से संतुलन बिगड़ गया और ग्लाइडर नीचे आ गिरा. हादसा इतना गंभीर था कि दोनों जमीन पर गिरते ही बुरी तरह घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि पायलट का हेलमेट खुल गया था और उसे गंभीर रूप से सिर पर चोटें आई थीं.
ट्रैफिक जाम ने ले ली जान!
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और अन्य पायलटों की मदद से मोहन सिंह और घायल पर्यटक को फौरन बीड़ स्थित अस्पताल पहुंचाया गया. पायलट की हालत गंभीर होने के चलते उसे बेहतर इलाज के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज, टांडा रेफर किया गया. लेकिन, बैजनाथ क्षेत्र में जाम के कारण एंबुलेंस करीब एक घंटे तक फंसी रही. ऐसे में टांडा मेडिकल पहुंचने से पहले ही मोहन सिंह ने रास्ते में दम तोड़ दिया. वहीं, पर्यटक को भी चोटें आई हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.

2025 में पैराग्लाइडिंग हादसों में तीन पायलटों की मौत
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है. कांगड़ा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीर बहादुर ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि, "बिलिंग से उड़ान भरने के बाद पैराग्लाइडिंग दुर्घटना में एक पायलट की मौत हुई है, जबकि उनके साथ उड़ान भर रहा पर्यटक सुरक्षित है. पुलिस थाना बीड़ द्वारा मामले की जांच की जा रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है. इस वर्ष जिले में पैराग्लाइडिंग हादसों में अब तक तीन पायलटों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक विदेशी पायलट, धर्मशाला के इंद्रूनाग साइट का एक हादसा और अब बीड़ का यह मामला शामिल है."
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
बीड़ बिलिंग जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पैराग्लाइडिंग स्थल पर बार-बार हो रहे हादसों को लेकर स्थानीय लोगों ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि, नियमित तकनीकी जांच, मौसम आकलन, उपकरणों की गुणवत्ता और आपातकालीन व्यवस्थाओं को और सख्त करने की आवश्यकता है. स्थानीय लोगों और पायलट समुदाय ने भी प्रशासन से मांग की है कि हादसों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. युवा पायलट की मौत से पूरे बीड़ क्षेत्र में शोक की लहर है.

क्या हैं पैराग्लाइडिंग के नियम ?
पैराग्लाइडिंग के निर्धारित नियमों के अनुसार, 12 साल की उम्र से कम या 30 किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों को पैराग्लाइडिंग करवाने की अनुमति नहीं है. पैराग्लाइडर पायलट पार्टिसिपेंट्स के साथ कोई भी हवाई कलाबाजी नहीं कर सकता है. पैराग्लाइडिंग उपकरणों पर ज्यादा भार या कम भार नहीं डाला जाना चाहिए. प्रत्येक उड़ान से पहले पार्टिसिपेंट्स को पूरी सुरक्षा जानकारी देना अनिवार्य है. इसके अलावा हृदय रोग, मिर्गी, फेफड़े के रोग, अस्थमा से पीड़ित लोगों और गर्भवती महिलाओं को भी पैराग्लाइडिंग की अनुमति नहीं है. पैराग्लाइडिंग के दौरान इन सभी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि पैराग्लाइडिंग के दौरान होने वाले हादसों पर अंकुश लगाया जा सके.
ये भी पढ़ें: हिमाचल में क्यों हो रहे पैराग्लाइडिंग के दौरान हादसे, आखिर क्या गलती कर बैठते हैं सोलो पायलट्स?
ये भी पढ़ें: हिमाचल में आखिर क्यों हो रहे पैराग्लाइडिंग के हादसे ?

