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यूपी के 45 पैरा एथलीटों का प्रेरणादायी सफर; मेरठ के कैलाश स्टेडियम में ले रहे ट्रेनिंग, बोले- ओलंपिक है लक्ष्य, देश के लिये लाना है मेडल

मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले पैरा खिलाड़ियों ने की बातचीत.

मेरठ के चैंपियन
मेरठ के चैंपियन (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 9:00 PM IST

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Updated : January 3, 2026 at 10:06 PM IST

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मेरठ (श्रीपाल तेवतिया) : खेल की नर्सरी के तौर पर अपनी अलग पहचान रखने वाले मेरठ में हुनर की कोई कमी नहीं है. यहां की मिट्टी में खेलकर तमाम खिलाड़ियों ने दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद किया है. आइये जानते हैं मेरठ में 45 पैरा एथलीट के बारे में जो लोगों के लिये मोटिवेशन की 'पावर डोज' बनकर उभरे हैं.

पैरा खिलाड़ियों ने हासिल किये थे 45 पदक : दरअसल, बरेली में हाल ही में प्रदेश स्तरीय पैरा चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था. मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाले पैरा खिलाड़ियों ने अपने हुनर और मेहनत से हाल ही में 45 पदक पाए थे, ये संख्या कोई छोटी नहीं है. इन खिलाड़ियों की खास बात ये भी है कि इनमें तमाम एथलीट ऐसे भी हैं जो कि पहली बार मेडल लेकर आए हैं, जबकि कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी कमाल कर चुके हैं.

मेरठ के पैरा एथलीट से बातचीत (Video credit: ETV Bharat)

'कई प्रतियोगिताओं में ला चुकी हैं मेडल' : ईटीवी भारत ने ऐसे ही पैरा एथलीट में से कुछ खिलाड़ियों से बात की. पैरा एथलीट रिया सिंह कहती हैं कि कुछ साल पहले तक पैरा गेम्स को लेकर उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी. अब तक नेशनल स्तर पर मेडल ला चुकी हैं, एक इंटरनेशनल टूर पर भी जाकर परफॉर्म कर चुकी हैं. शॉटपुट उनका गेम है. बरेली में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है. कई प्रतियोगिताओं में मेडल ला चुकी हैं. अगला लक्ष्य एशियन गेम और ओलम्पिक में पदक लाना है, जिसके लिए प्रयास जारी हैं.

'रेस में स्वर्ण पदक जीता' : पैरा एथलीट सलोनी ने बरेली में आयोजित प्रतियोगिता मे अलग-अलग गेम में दो गोल्ड मेडल और एक ब्रॉन्ज अपने नाम किया है. सलोनी ने 400 मीटर रेस, 1500 मीटर रेस में स्वर्ण पदक जीता था, वहीं शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीता था. वह बताती हैं कि पिता ड्राइवर हैं और मां हाउसवाइफ हैं. अगला लक्ष्य अब आगामी समय में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता में पदक लाना है.

मेडल पाने वाले पैरा एथलीट
मेडल पाने वाले पैरा एथलीट (Photo credit: ETV Bharat)


'चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीते' : पैरा एथलीट दीपिका पाल ने बताया कि उनका लक्ष्य स्पष्ट है कि उन्हें देश के लिए खेलना है और मेडल जीतना है. दीपिका पाल भी बीते दिनों हुई स्टेट लेवल पैरा चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीतकर लौटी हैं. उन्होंने 100 मीटर दौड़, लॉन्ग जंप और शॉट पुट में अपने वर्ग में खेलते हुए तीन गोल्ड मेडल जीते हैं. वहीं नेशनल स्तर पर अब तक प्रदेश के अलग-अलग राज्यों में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं, कई मेडल भी जीत चुकी हैं.

कैलाश स्टेडियम में प्रैक्टिस करते पैरा एथलीट
कैलाश स्टेडियम में प्रैक्टिस करते पैरा एथलीट (Photo credit: ETV Bharat)


पैरा एथलीट दीपिका पाल बताती हैं कि उनके पिता इस वक्त कोई काम नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में बड़े भाई के कंधों पर ही घर को चलाने की जिम्मेदारी है. वह कहती हैं उन्हें भी कुछ करना है और निश्चित ही देश के लिए मेडल लाना है, जिसके लिए वह लगातार प्रयत्न कर रही हैं.

तीन अलग-अलग गेम्स में मेडल पाए : पैरा एथलीट उधम सिंह बागपत जिले के पलियाना गांव के रहने वाले हैं. वह बताते हैं कि मेरठ में सिर्फ और सिर्फ प्रशिक्षण के लिए रह रहे हैं. उनका एक ही सपना है, जिसके लिए निरंतर प्रयत्न कर रहे हैं. औसतन हर दिन लगभग 6 से 7 घंटे स्टेडियम में गुजारते हैं. वह बताते हैं कि तीन अलग-अलग गेम्स में मेडल पाए उधम कहते हैं कि सपने देखने से कुछ नहीं होता, बल्कि उनको पूरा करने के लिए कोशिश करनी ही होती है. पिता खेती किसानी करते हैं, उन्होंने भरोसा करके प्रैक्टिस के लिए भेजा है, उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना है. उधम बताते हैं कि जन्म से ही उनका एक पैर खराब है, उसमें पावर ही नहीं है.

मेडल पाने वाले खिलाड़ी
मेडल पाने वाले खिलाड़ी (Photo credit: ETV Bharat)

पैरा एथलीट सागर तोमर भी उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो राज्य स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किये और मेडल भी जीतकर लाए हैं. वह कहते हैं कि बड़े भाई के कंधों पर परिवार को चलाने की जिम्मेदारी है, बड़े भाई होम्योपैथिक डॉक्टर के यहां काम करते हैं. मुझ पर परिवार ने भरोसा किया है. पहली बार प्रदेश स्तर पर मेडल लाए हैं. आगे नेशनल में मेडल के लिए अब प्रयास करेंगे, मेहनत जारी है.

'बच्चों में गजब का उत्साह' : अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रफुल्ल त्यागी ने बताया कि वह भी इन होनहार खिलाड़ियों को लगातार मोटिवेट करने आती हैं, साथ ही इन्हें ट्रेनिंग भी देती हैं. उन्होंने बताया कि बरेली में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चैंपियनशिप की ट्रॉफी भी इस बार मेरठ के पैरा खिलाड़ियों के नाम रही थी. मेरठ में प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों ने 45 पदक अपने नाम किये थे. इन सभी बच्चों में गजब का उत्साह है. बेहद ही लगन के साथ सभी वह अपनी मूल समस्या को भूलकर अपने लक्ष्य को लेकर प्रयास कर रहे हैं.

मेरठ के चैंपियन
मेरठ के चैंपियन (Photo credit: ETV Bharat)

वह कहती हैं कि सभी काफी मेहनत कर रहे हैं और जिस तरह से उनके द्वारा प्रयास किया जा रहा है वह और लोगों को भी कहीं ना कहीं प्रेरित करते हैं. आगे बढ़ाने के लिए और मेहनत करने के लिए. जो पैरा एथलीट बच्चे यहां ट्रेनिंग लेने आते हैं, उनमें मेरठ के अलावा अन्य जिलों से भी आकर प्रशिक्षण ले रहे हैं.

जिला पैरा एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी गुप्ता कहते हैं कि आगामी समय में वाराणसी में एशिया चैंपियनशिप प्रस्तावित है. मेरठ में पैरा खिलाड़ियों में उस प्रतियोगिता में शामिल होने की ऐसी ललक है कि वे लगातार मेहनत कर रहे हैं और सर्दी में भी कभी प्रैक्टिस करना नहीं छोड़ते. मेरठ के कई प्रतिभावान खिलाड़ी अब से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मेडल लाकर मेरठ का मान बढ़ा चुके हैं.

कैलाश प्रकाश स्टेडियम के कोच गौरव त्यागी कहते हैं कि पैरा गेम्स में इस स्टेडियम के खिलाड़ियों ने न सिर्फ अपनी मेहनत के बल पर मुकाम बनाया है, साथ ही लगातार आगे बढ़ने के लिए सभी प्रयत्नशील हैं. गजब का उत्साह इन खिलाड़ियों में है. मेरठ में प्रैक्टिस करने वाले इन खिलाड़ियों ने 25 गोल्ड मेडल, 16 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मेडल पाए थे.




गोल्ड मेडल पाने वाले होनहार पैरा खिलाड़ी : फातिमा, राव कुमार, अनमोल कुमार, आयुष वर्मा, रिया, प्रियांश, शेखर, सुधीर, आशीष, राज तोमर, उद्यम, रितिका, सलोनी, जैनब, शबी, शायरा, तरन्नुम, नवनीत, मैना, गौरव, अनस, कृष्णा, नवेदिता, आरोही और दीपा.


सिल्वर मेडल वाले खिलाड़ी : सुमित, उमेश, आशीष, गौरव, लक्ष्मण, स्वास्तिक, नमन, कार्तिक, विष्णु, गिरिराज, सोनू, अनुराधा, सुमन, सोनिया. प्रभात और प्रेरणा राठी.


ब्रांज मेडल पाने वाले पैरा एथलीट : रितिक, स्पर्श, फरमान और सागर

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Last Updated : January 3, 2026 at 10:06 PM IST