EXPLAINER: IGKV पेपर लीक केस में बड़ी मछली कौन, कैसे रुकेगा मेहनतकश छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
IGKV पेपर लीक होने के बाद सिस्टम के दावों पर सवाल उठ रहे हैं.क्या असली गुनाहगार सामने आएंगे.रितेश तंबोली की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : September 2, 2026 at 12:42 PM IST
रायपुर: देश में नीट परीक्षा के पेपर लीक हुए तो सड़क पर छात्र आंदोलन से सदन हिल गया. जिन लोगों ने परीक्षा दी थी उनका मन बहुत गंभीर और गमगीन था. तो कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर ली. देश को भी गहरा आघात पहुंचा क्योंकि जो भविष्य कर्णधार हैं, उनके ही भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा. ऐसा करने वाले लोग चंद पैसों के खातिर ना जाने कितने छात्रों की मेहनत पर पानी फेरते हैं. कई प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी चीजें सामने आ चुकी हैं. दिल्ली में हुआ बड़ा प्रदर्शन ये बताने में कामयाब रहा कि परीक्षा लेने वाली एजेंसियां अपना काम ठीक से नहीं कर रही हैं, इस सिस्टम में ही बड़ी दिक्कत है. आंदोलन और इस्तीफे के बाद बड़े पैमाने पर केंद्र सरकार ने एग्जाम पैनल में बदलाव किया. कुछ गैरजिम्मेदार लोगों को बर्खास्त कर दिया गया और पूरा पैनल बदल दिया गया.सरकार ने सख्त कानून बनाकर ये संदेश दिया कि पेपरलीक के गुनाहगारों को छोड़ा नहीं जाएगा.और इन सब जतनों के बाद छत्तीसगढ़ के कृषि विश्वविद्यालय का पेपर लीक हो गया,वो भी एक नहीं बल्कि तीन.अब इस लीक कांड ने फिर से छत्तीसगढ़ में विरोध का बड़ा बवंडर खड़ा हो चुका है.
IGKV पेपर लीक मामले में तीन मामले दर्ज
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एक के बाद एक लगातार तीन प्रश्नपत्र लीक हुए हैं. सवाल ये उठ रहा है कि दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट के बाद जो परीक्षाएं हुई हैं. उन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं. यहां सरकार सजग क्यों नहीं रही. भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार यह कहती थी कि इसमें कांग्रेस के लोग शामिल हैं जो लोग इस तरह के प्रदर्शन को करवा रहे हैं. लेकिन जिस तरह का प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के कृषि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने किया है, इसमें कौन दोषी है. इसमें कांग्रेस कैसे हिस्सेदार है, जो यहां की सरकार कौन सा आरोप लगाकर छुटकारा पाएगी. बहरहाल तीन मामले दर्ज हुए हैं तीनों की जांच शुरू हुई है.

पेपर लीक पर बड़ा सवाल
लेकिन सवाल यही है कि मामला दर्ज हुआ, क्यों जिम्मेदार लोगों ने परीक्षा से पहले वैसी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई. जो परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने का कारण बना. यह किसी एक व्यक्ति ने किया है या फिर व्यवस्था के भीतर पूरी गैंग है. अब वह गैंग किसे समर्पित और किससे समर्थित है. इस बात की जांच तो पुलिस कर रही है लेकिन जिन लोगों ने पेपर लीक किया है. उनका सामर्थ्य इतना ज्यादा है कि समर्थन चाहे जिसका हो कार्रवाई होगी. इस पर सवाल है लेकिन जिनकी जिंदगी सवालों में खड़ी हुई है उसका उत्तर क्या है ?
पेपरलीक सामने आने पर प्रबंधन ने की शिकायत
IGKV के जनसंपर्क अधिकारी संजय नैय्यर ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की द्वितीय सेमेस्टर की जो परीक्षा आयोजित की जा रही है. उसमें एक-एक करके तीन प्रश्न पत्र लीक करने का मामला सामने आया था. मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन में तुरंत इसकी शिकायत तेलीबांधा थाना और साइबर थाने में की. पुलिस की जांच में यह बात सामने आया कि दुर्ग में स्थित भारतीय कृषि महाविद्यालय जो कि एक निजी महाविद्यालय है. वहां के व्याख्याता योगेश सोनकेसरिया ने तीनों पेपर लीक किए हैं. इस कॉलेज के स्थानीय छात्रों को पेपर भी उन्होंने पेपर बेचे. व्याख्याता ने एंडोस्कोपी कैमरे का इस्तेमाल करते हुए प्रश्न पत्रों को स्कैन करने के बाद लीक किया. विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 7 अगस्त 19 अगस्त और 20 अगस्त को आयोजित हुई तीनों परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. जो पेपर रद्द किए गए हैं उन्हें फिर से सितंबर के प्रथम सप्ताह में आयोजित किया जाएंगा.
भारती कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर को भेजा गया नोटिस
संजय नैय्यर ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दुर्ग के भारतीय कृषि महाविद्यालय को एक नोटिस भेजा है जिसमें उनकी मान्यता रद्द करने के साथ ही आने वाले दिनों में किसी भी प्राइवेट कॉलेज में परीक्षा आयोजित नहीं करने का फैसला लिया गया है. यहां की परीक्षा प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है. आने वाले समय में एग्रीकल्चर के जो भी पेपर आयोजित होंगे उसके लिए पासवर्ड प्रोटेक्टेड ईमेल दिए जाएंगे. परीक्षा शुरू होने के आधा घंटा पहले ही प्रश्न पत्रों को बच्चों को मिलेंगे . विश्वविद्यालय की तरफ से नियुक्त किए गए आब्जर्वर को निलंबित कर दिया गया है. इसके साथ ही परीक्षा प्रभारी को भी हटा दिया गया है.

दुर्ग के भारतीय एग्रीकल्चर कॉलेज का मान्यता भी रद्द की जाएगी. दुर्ग के कॉलेज को जीरो ईयर घोषित कर दिया गया है. परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक न हो इसके लिए सीसीटीवी कैमरा की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. कृषि विश्वविद्यालय में स्थित परीक्षा शाखा में भी सीसीटीवी कैमरे की संख्या बढ़ाई जा रही है- संजय नैय्यर, जनसंपर्क अधिकारी, IGKV
विश्वविद्यालय ने उठाए जरुरी कदम कानून ने किया अपना काम
वहीं पेपर लीक के मामले पर सिविल लाइन के ACP रमाकांत साहू ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में हुए पेपर लीक के मामले में 3 FIR दर्ज की गई हैं. 7 अगस्त 19 अगस्त और 20 अगस्त को आयोजित हुए पेपर लीक मामले में FIR दर्ज हुई है. इन तीनों मामलों में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पेपर लीक करने के मामले में 2 आरोपी फरार हैं जिसकी तलाश पुलिस कर रही है. आगे जो भी तथ्य इसमें आएंगे. उस आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी.
कैसे मिली पेपरलीक की सूचना ?
20 अगस्त की सुबह परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले कवर्धा कृषि महाविद्यालय के ई-मेल और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रश्न पत्र वायरल होने की सूचना मिली. वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं परीक्षा प्रभारी डॉ. एन. आर. रंगारे की शिकायत पर थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 दर्ज किया गया. पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन और पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (उत्तर जोन) तारकेश्वर पटेल की संयुक्त तत्वाधान में 100 से अधिक पुलिस टीमों का गठन किया गया. रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई. साइबर विंग ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया टाइमलाइन का सूक्ष्म विश्लेषण करते हुए दुर्ग निवासी अनुज मिंज को हिरासत में लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ.

आरोपियों के पास से जब्त की गई सामग्री
पुलिस ने आरोपियों के पास से नकद राशि 11 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण 06 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर,अन्य सामग्रियों में सुई, सुजा और फेविकोल जब्त किया है. आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5, 10 तथा बीएनएस (BNS) की धारा 316 के तहत मामला पंजीकृत हुआ है. प्रकरण में 02 अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है.

कौन-कौन हुआ गिरफ्तार ?
योगेश सोनकेसरिया (मुख्य आरोपी- प्रोफेसर) निवासी सिवनी (म.प्र.)
अजय नायक (छात्र) निवासी बलौदा बाजार
त्रिदेव पटेल (छात्र) निवासी महासमुंद
नितिन पाण्डेय (छात्र) निवासी बस्तर
अनुज मिंज (छात्र) निवासी जशपुर
आदित्य साहू (छात्र) निवासी बालोद

क्या एग्जाम का डर छात्रों की मानसिकता बदल रहा ?
वहीं पेपर लीक के मामले को लेकर मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुरभि दुबे का कहना है कि आजकल पढ़ाई का सिलेबस बहुत ज्यादा होता जा रहा है. पढ़ाई एकेडमिक है ना की स्किल बेस्ड. ऐसी स्थिति में हमें स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए. जैसे पहले हुआ करता था. बच्चे होम साइंस लेकर पढ़ाई करते थे. जिसमें हम रोजाना यूज करने वाले चीज और स्किल से संबंधित पढ़ाई करते थे. उसको सिखाया जाता था. कौशल विकास योजना जरूर है पर उसके लिए अलग से इनरोल करना पड़ता था.
क्या कॉम्पटिशन है बड़ी वजह ?
डॉ सुरभि दुबे ने बताया कि वर्तमान समय में कॉम्पटिशन भी बहुत बढ़ता जा रहा है. जॉब की संख्या सीमित हो गई है. ऐसे में बच्चे डिग्री लेकर जॉबलेस हैं, जो डिग्रीधारी नहीं है वह ज्यादा बेटर एंप्लॉयमेंट जनरेट कर ले रहे हैं. जॉब वैकेंसी नहीं होने के कारण बच्चे तनाव में रहते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चे मार्क्स को तवज्जो देने लगते हैं ना कि नॉलेज को. ज्यादा मार्क्स पाने के लिए कई बार ऐसा होता है कि उनकी जो क्षमता है उससे बेटर परफॉर्मेंस चाहते हैं.बच्चे कॉम्पटिशन में बेटर फेयर करना चाहते हैं. परफॉर्मेंस आज के समय में मार्क्स बेस्ड हो गई है. उसके लिए चीटिंग और पेपर लीक जैसी घटना बढ़ते जा रही है.दूसरा टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पाते. ज्यादा समय इधर-उधर की एक्टिविटीज में या नशे की चीजों में व्यतीत करते हैं.
कुछ छात्र पढ़ाई में कम समय देते हैं. लास्ट मोमेंट में ऐसा होता है कि चीटिंग कर लो या फिर पेपर लीक करा लो. इस तरह की चीजों में बच्चे फोकस करने लगते हैं. ऐसे में जो बच्चे सच में मेहनत कर रहे हैं दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. पढ़ाई के लिए अपना बहुत ज्यादा समय दे रहे हैं. कई बच्चे लोन लेकर पढ़ाई की तैयारी करते हैं. ऐसे बच्चों को हतोत्साहित होना पड़ता है - सुरभि दुबे, मनोरोग विशेषज्ञ
कैसे होगा समस्या का समाधान ?
सुरभि दुबे की माने तो ऐसी स्थिति में बच्चे अपने आप को नुकसान पहुंचाने लगते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि फिर से इतना सारा पढ़ाई की तैयारी करनी पड़ेगी. इतनी मेहनत करनी पड़ेगी. ऐसे में हम यूनिवर्सिली एक एग्जाम करें. बजाय छोटी-छोटी एग्जाम करने के तो यह हमारे प्रॉब्लम को काफी हद तक सॉल्व कर देगा.
पेपरलीक को लेकर शिक्षाविद् की राय
वहीं पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षाविद एलएस निगम का कहना है कि किसी भी विश्वविद्यालय का पेपर लीक होना बहुत ही जघन्य अपराध है. यह न केवल कानूनी अपराध है बल्कि नैतिक अपराध भी है. पेपर की सुरक्षा होना काफी ज्यादा इंपोर्टेंट है.पेपरलीक करने के काफी सारे किरदार हैं,जिनमें जो सेटअप करता है वो लीक करते हैं. मॉडरेटर लीक करता है. प्रिंटर लीक करता है. जो परीक्षा केंद्र होते हैं. वहां से भी पेपर लीक करते हैं. लेकिन IGKV का प्रकरण ऐसा लगता होता है कि सेंटर से लीक हुआ है.
कैसे रुकेगा पेपर का लीक ?
एलएस निगम के मुताबिक अब प्रश्न यहां उठता है कि सेंटर की सुरक्षा, प्रश्न पत्रों की सुरक्षा किस प्रकार से होती है. इसको भी विश्वविद्यालय को देखना चाहिए. जैसे अनेक विश्वविद्यालयों में इवन UPSC में अन्य स्थानों में यह व्यवस्था है कि पेपर जब जाता है उसे सील करके रखा जाता है. वह किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होता. एक अलमारी होती है जिसमें एक व्यक्ति पेपर लेकर आता है. संस्था के प्रमुख किसी एक इंडिपेंडेंस आदमी के सामने पेपर सील करके रखा जाता है. ऐसा लगता है कि यहां ऐसा नहीं किया गया था.
परीक्षा के प्रश्न पत्र सीधे विश्वविद्यालय के माध्यम से आए. संबंधित कॉलेज के किसी अलमारी में सील करके रखे जाए. इसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी या कर्मचारी का हस्ताक्षर या संस्था प्रमुख अधिकारी की मौजूदगी में सीलबंद होइसके साथ ही जो सेंटर के सुपरिंटेंडेंट है उसका हस्ताक्षर होता तो इस प्रकार से जब लिफाफा खोला जाता तो पेपर लीक होने के चांसेस कम थे.आप किसी एक आदमी को पेपर दे देंगे भले ही वह अध्यापक है. वह दो दिनों तक पेपर अपने घर में रखकर इस प्रकार पेपर लीक होने की संभावना रहती है- एलएस निगम,शिक्षाविद्
प्रश्नपत्रों को पास के थाने में रखने का विकल्प
निगम की माने तो पेपर लीक की घटनाएं हाल के समय में सामने आ रही हैं. हम लोगों के पास 8 दिन पहले परीक्षा के पेपर आ जाते थे. लेकिन कभी ऐसा सुनने में नहीं आता था. दूसरी एक व्यवस्था है कि क्वेश्चन पेपर को थाने में रखा जाता है. परीक्षा शुरू होने के 1 से 2 घंटे पहले थाने से पेपर को परीक्षा केंद्र तक लाया जाता था. इस प्रकार की सावधानी बरती जानी चाहिए थी. इसमें एक बात और जरूरी है कि अब तक तीन प्रश्न पत्र लीक हो चुके हैं. ऐसे में आगे होने वाले प्रश्न पत्र लीक न हो सके इसके लिए क्या व्यवस्था की गई है. यह भी विश्वविद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए. ताकि उसकी विश्वसनीयता बनी रहे. इस प्रकार से ना हो जिस प्रकार से नीट परीक्षा कैंसिल हो गए. देश में एक समस्या उत्पन्न हो गई. एग्रीकल्चर में विद्यार्थियों की संख्या कम है, लेकिन कम ज्यादा से कोई फर्क नहीं पड़ता. उसका जो नैतिक मूल्य है जो उसकी विश्वसनीयता है और जो उसका अपराध बोध है वह बराबर है.

NSUI कर रही है विश्व विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ FIR की मांग
इस पूरे मामले में NSUI के जिला अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में तीन प्रश्न पत्र लीक हुए हैं. तीनों प्रश्न पत्र को रद्द कर दिया गया है, लेकिन क्या यही एकमात्र कार्यवाही है. विश्वविद्यालय प्रबंधन या शासन प्रशासन लीपा पोती करके क्या कोई व्यक्ति विशेष को बचाना चाहती. एक छोटे से कॉलेज के प्रोफेसर को बर्खास्त करना उसके ऊपर FIR करना क्या यही छात्रों के साथ न्याय हैं.
इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति और कुल सचिव के ऊपर FIR होनी चाहिए. इसके साथ ही विश्वविद्यालय के कंट्रोलर के ऊपर FIR होनी चाहिए. परीक्षा के तीन प्रश्न पत्र रद्द कर दिए गए हैं. इसकी क्या गारंटी है कि आने वाले समय में जो परीक्षाएं होंगी उसके पेपर लीक नहीं होंगे- प्रशांत गोस्वामी,जिलाध्यक्ष NSUI
आपको बता दें कि रायपुर जिला एनएसयूआई लगातार इस पर कार्यवाही की मांग कर रही है.NSUI ने विश्वविद्यालय के कुल सचिव, कुलपति और एग्जाम कंट्रोलर के खिलाफ भी FIR करने की मांग की है. वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रबंधन इस मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रहा है.क्योंकि यहां एक नहीं बल्कि तीन पेपर लीक हुए हैं.ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या पेपरलीक से संबंधित प्रोफेसर ने सिर्फ इसी साल ये आइडिया आजमाया या फिर जब से वो तैनात है तब से पेपर लीक हो रहे हैं,जिसकी खबर आज तक किसी को नहीं लगी.
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