चित्तौड़गढ़: तारबंदी में फंसा पैंथर, वन विभाग ने ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया, चेकअप के बाद जंगल में छोड़ा
कपासन वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पैंथर को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित निकाला.

Published : July 3, 2026 at 8:41 PM IST
|Updated : July 4, 2026 at 1:17 PM IST
चित्तौड़गढ़: जिले के कपासन तहसील के जाशमा-ढाणी गांव के बीच खेतों की तारबंदी में शुक्रवार को फंसे एक वयस्क पैंथर को वन विभाग और वन्यजीव समिति की टीम ने 3 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित रेस्क्यू किया. देर रात पैंथर को टॉर्च की रोशनी में इसे ट्रेंकुलाइज किया गया. इलाज के बाद शनिवार को मेडिकल जांच के बाद उसे बस्सी सेंचुरी के जंगल में छोड़ दिया गया.
उप वन संरक्षक राहुल झांझडिया ने बताया कि शुक्रवार शाम को मवेशी चराने वाले को पैंथर तारबंदी में फंसा दिखाई दिया था. सूचना बिजली की तरह फैली और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई. सूचना वन विभाग को दी गई. राहुल झांझरिया के निर्देश पर कपासन रेंजर सुरेश चौधरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. यहां पैंथर बुरी तरह तारों में उलझा था और हिल-डुल नहीं पा रहा था.

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उन्होंने बताया कि पैंथर अच्छी कद-काठी का वयस्क था, जिसे बिना ट्रेंकुलाइज किए निकालना संभव नहीं था. इसके बाद चित्तौड़गढ़ मुख्यालय से वन सुरक्षा टीम और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य भी मौके के लिए रवाना हुए. समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने बताया कि पैंथर के तार में फंसने की सूचना पर वन विभाग की मदद के लिए समिति के सदस्यों को भेजा था.
ट्रेंकुलाइज कर 3 घंटे में निकाला: उप वन संरक्षक राहुल झांझडिया ने बताया कि शुक्रवार देर रात करीब 10.30 बजे शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में मनोहर सिंह जाट ने पैंथर को ट्रेंकुलाइज किया. इसके बाद टीम ने बड़ी सावधानी से एक-एक कर तार काटे और पैंथर को आजाद कराया. पूरे ऑपरेशन में टीम को करीब 3 घंटे लगे.
मेडिकल के बाद बस्सी में छोड़ा: रेस्क्यू के बाद पैंथर का मेडिकल चेकअप किया गया. इसके तार में फंसने के कारण मामूली चोट थी शनिवार सुबह उसे बस्सी के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया. इस रेस्क्यू में रेंजर सुरेश चौधरी के साथ नाथू सिंह, सत्यवीर, नानालाल, ललित, मेघनाथ और वन्यजीव प्रेमी पीयूष कांबले, मुबारिक खान, राम कुमार साहू, मयूर गोसावी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
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