गुजरात से पन्ना तक बैलगाड़ी यात्रा, सदियों बाद सुरक्षित है छत्रसाल के गुरु प्राणनाथ की निशानी
पन्ना के प्राणनाथ म्यूजियम में रखी है सैकड़ों साल पुरानी बैलगाड़ी, इसी से पन्ना आए थे छत्रसाल महाराज के गुरु प्राणनाथ.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 9, 2026 at 12:30 PM IST
|Updated : February 9, 2026 at 12:54 PM IST
पन्ना: महाराजा छत्रसाल के गुरु महामती प्राणनाथ आज से सैंकड़ों वर्ष पहले गुजरात के जामनगर शहर से पन्ना आए थे. वह जिस बैलगाड़ी से पन्ना आए थे वह बैलगाड़ी आज भी सुरक्षित रखी हुई है. बैलगाड़ी में खाने पीने का सामान रखते थे. यह बैलगाड़ी आज भी प्राणनाथ म्यूजियम में सुरक्षित रखी हुई है और लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
महामती प्राणनाथ, महाराजा छत्रसाल के गुरु थे. उन्होंने सैंकड़ों वर्ष पहले उनसे गुरु दीक्षा ली थी. महाराजा छत्रसाल ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि वह कभी युद्ध नहीं हारेंगे. उन्होंने अपने जीवन में 52 युद्ध लड़े वह कभी पराजित नहीं हुए. महाराजा छत्रसाल को महामती प्राणनाथ ने आशीर्वाद स्वरुप एक रुमाल तलवार और पान का वीरा भेंट किया था.
सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित है बैलगाड़ी
यह बैलगाड़ी प्राणनाथ म्यूजियम में रखी हुई है. इसकी लकड़ी सैंकड़ों वर्ष पुरानी हो जाने के बाद भी सुरक्षित है. अमूमन जो बैलगाड़ी आज के समय में दिखाई देती है, उससे इस बैलगाड़ी का आकार छोटा है. इसके पहिए एवं बैठने की जगह सभी सुरक्षित एवं मजबूत दिखाई देती हैं. बैलगाड़ी के ऊपर छाया के लिए लोहे का जाल लगा हुआ है, जो 400 वर्ष हो जाने के बाद भी सुरक्षित है. इस बैलगाड़ी को सांकेतिक रूप में प्रदर्शित करने के लिए इसमें बैलों की प्रतिमा भी बनाई गई है. गाड़ी चलाने के लिए बैलों को हांकते हुए एक व्यक्ति की प्रतिमा भी रखी हुई है.

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प्राणनाथ म्यूजियम के प्रभारी एवं अंतर्राष्ट्रीय गाइड विजय शर्मा बताते हैं कि, ''सैंकड़ों साल पहले इस बैलगाड़ी से छत्रसाल के गुरु महामती प्राणनाथ पन्ना आए थे. जो प्राणनाथ म्यूजियम में आज भी सुरक्षित रखी हुई है. इसकी लकड़ी आज भी अच्छी हालत में है.''

महामती प्राणनाथ में की थी प्राणनाथ संप्रदाय की स्थापना
महामती प्राणनाथ ने पन्ना में प्रार्थना धाम की स्थापना की थी. यह धर्म यहां से देश-विदेश में फैला था. इसके अनुयायी भारत सहित अमेरिका, कनाडा और नेपाल में में बहुआयात में है. उन्होंने यहां पर विश्व के सबसे बड़े प्राणनाथ संप्रदाय के मंदिर की स्थापना की थी. इस मंदिर में शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है. देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पर पहुंचते हैं, पन्ना को देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मुक्तिधाम के नाम से जानते हैं.
विजय शर्मा ने बताया कि, ''बताया जाता है कि, महाराजा छत्रसाल के ऊपर उस समय मुगल सेना आक्रमण करने के लिए उतारू थी. तब महाराजा छत्रसाल अपने गुरु महामती प्राणनाथ के पास गए थे. उन्होंने महाराजा छत्रसाल को विजयश्री का आशीर्वाद दिया था, उसके बाद वह कभी युद्ध नहीं हारे. महामती प्राणनाथ का जब पन्ना आगमन हुआ तब महाराजा छत्रसाल ने उन्हें पालकी में बिठाकर पूरे पन्ना में परिक्रमा लगाई थी. यह परिक्रमा आज के समय में पृथ्वी परिक्रमा के नाम से जानी जाती है. महामती प्राणनाथ के साथ 5000 श्रद्धालु भी साथ में रहे.''

