पन्ना का मशहूर सिलबट्टा शिवलिंग! तिल तिल कर बढ़ा और बना रहस्यमयी तपोभूमि
पन्ना में मौजूद है अनोखा शिव मंदिर, लगातार बढ़ रहा शिवलिंग का आकार, मंदिर से 52 गांवों की है गहरी आस्था

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 10:03 AM IST
|Updated : January 5, 2026 at 12:21 PM IST
पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना में भगवान भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर स्थापित है जिसका शिवलिंग धीरे-धीरे लगातार बढ़ता जा रहा है. सैकड़ों वर्ष पूर्व यह शिवलिंग छोटी लुड़िया हुआ करता था जो बढ़ता जा रहा है. सैकड़ों साल पहले इसे सिल-बट्टे में बनाया गया था, जिसे देखते हुए संत जगजोदन बाबा ने इसे पास के चबूतरे पर स्थापित करवाने की सलाह दी थी. जानकार भी हैरान हैं कि शिवलिंग का आकार क्यों बढ़ रहा है.
तपोभूमि के नाम से विख्यात है पन्ना
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले का नाम आते ही लोगों के जहान में हीरे का और टाइगर नाम सामने आ जाता है. पर पन्ना को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर कई ऐसे मंदिर स्थापित है जिनकी स्थापना 100- 200 नहीं 400 वर्ष पूर्व हुई है और यह तपोभूमि के नाम से विख्यात है. यहां पर कई ऐसे आश्रम है जहां पर ऋषि मुनि तपस्या किया करते थे.
धीर-धीरे बढ़ रहा शिवलिंग का आकार
राम पथ गवन का भी पन्ना से पड़ाव होकर जाता है, इसीलिए यहां पर कई ऐसे मंदिर स्थापित है जिनका इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है. पन्ना जिले से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित देवेंद्रनगर तहसील में स्थित ग्राम बड़वारा में शिव जी का एक ऐसा मंदिर है. जिसका शिवलिंग लगातार धीरे-धीरे बढ़ रहा है. इस मंदिर के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं. भगवान भोलेनाथ पहले छोटे से चबूतरे में विराजमान थे. अब उसके बगल में थोड़ा बड़ा मंदिर स्थापित करवा दिया गया है.
शिवलिंग को बनाया बट्टा
मंदिर समिति के सदस्य लवलेश नायक बताते हैं कि, ''इस शिवलिंग की कहानी काफी दिलचस्प है. सैकड़ों वर्ष पहले गांव के लोग बताते थे कि एक दिव्य संत हुआ करते थे, जिनका नाम जगजोदन बाबा था. वह रास्ते से गुजर रहे थे. सोनी परिवार की एक महिला मसाला पीसने वाले सिलबट्टा जो पत्थर का हुआ करता था उसमें नमक पीस रही थी. सिलबट्टा में बट्टा शिवलिंग को बनाई हुई थी."

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उन्होंने देखा और कहा कि, तुम्हें बहुत पाप लगेगा कि भोलेनाथ के शिवलिंग से तुम नमक पीस रही हो. इसे कहीं स्थापित करवा दो. फिर लोगों ने पास में ही चबूतरा बनवाकर इस शिवलिंग को वहां पर स्थापित करवा दिया. जब वह शिवलिंग वहां पर स्थापित करवाया तब यह बहुत छोटा लुडिया के रूप में हुआ करता था. लेकिन समय गुजरते ही यह शिवलिंग धीरे-धीरे निरंतर बढ़ रहा है. यहां पर दर्शन करने के लिए 52 गांव से लोग आते हैं और जो सच्चे मन से मनोकामना मांगता है उसकी पूरी होती है.''
मंदिर के पुजारी पुनीत चतुर्वेदी बताते हैं कि, ''यह शिवलिंग तिल-तिल कर बड़ा हो रहा है. पूर्व में बुजुर्ग बताते थे कि यह शिवलिंग बहुत छोटा हुआ करता था जो एक लुडीया के रूप में था. अब यह शिवलिंग निरंतर बढ़ रहा है. पहले यह शिवलिंग एक चबूतरे के ऊपर विराजमान था फिर मंदिर में जलधारी के ऊपर शिवलिंग स्थापित कराया. वहीं पर नंदी भगवान की प्रतिमा भी स्थापित कराई.''

