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डिजिटल युग में अंतिम सांसे ले रहा ट्रेडिशनल बांस शिल्प, अगली पीढ़ी ने धंधे से मोड़ा मुंह

पन्ना में प्लास्टिक के दौर में लुप्त हो रही बांस से घरेलू सामान बनाने की कला, कारीगरों को नहीं मिल रही सरकार से मदद.

Bamboo Handicraft business Crisis
पन्ना में संकट में बांस से बने प्रोडक्ट्स (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 2, 2026 at 4:18 PM IST

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Updated : January 2, 2026 at 4:55 PM IST

3 Min Read
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पन्ना: मध्य प्रदेश का पन्ना चारों तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है. इसलिए यहां पर बहुतायत संख्या में बांस की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं. इसी कारण यहां पर स्थानीय वाल्मीकि समाज के कारीगर बांस से विभिन्न प्रकार की घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाते हैं और बाजार में बेचते हैं. पहले यह व्यवसाय काफी तेजी से बढ़ रहा था और लोग बांस से बनी हुए चीजों का उपयोग करते थे. लेकिन दिनों दिन आधुनिक युग के कारण यह घटता जा रहा है.

इन कुशल कारीगरों की अगली पीढ़ी इस व्यवसाय को करना नहीं चाहती. क्योंकि वह मानते हैं कि इस व्यवसाय में पहले जैसी बात नहीं रह गई है. स्थानीय बाजार में बांस से बनी चीजों की मांग भी कम हो गई है.

प्लास्टिक के कारण बांस का हस्तशिल्प उद्योग पड़ा धीमा (ETV Bharat)

प्लास्टिक के कारण बांस का हस्तशिल्प उद्योग पड़ा धीमा
पुराने जमाने में लोग घरेलू उपयोग की वस्तुओं में बांस से बनी चीजों का उपयोग करते थे. जिसमें टोकरी, सपा, बड़ी टोकरी, डोलची एवं वस्तुओं का उपयोग बांस से बनी वस्तुएं से किया जाता था. लेकिन प्लास्टिक के आ जाने के कारण लोग इन वस्तुओं का उपयोग कम करने लगे. इससे स्थानीय बाजार में इन वस्तुओं की मांग कम हो गई है. जिससे इन कारीगरों द्वारा हस्तशिल्प से जो बांस की घरेलू इस्तेमाल की वस्तुएं बनाई जाती हैं, उनकी मांग कम हो गई है. इसलिए इनका व्यवसाय भी धीमा पड़ गया है, इसलिए यह व्यवसाय अब धीरे-धीरे सिसकियां ले रहा है.

नई पीढ़ी नहीं सीख रही यह कला
स्थानीय कारीगर नत्थू लाल बसोर बताते हैं कि, ''अब यह व्यवसाय और कला हमारे बच्चे नहीं सीखना चाहते हैं, क्योंकि यह व्यवसाय अब धीमा पड़ गया है. अब इस व्यवसाय में पहले जैसी कमाई नहीं रह गई है. इसलिए बच्चे इस व्यवसाय का प्रशिक्षण नहीं ले रहे हैं. अब जो पुराने लोग हैं वह ही यह व्यवसाय कर रहे हैं और अपना जीवन यापन कर रहे हैं.''

mp Rural Livelihood problems
बांस से घरेलू सामान बनाने की कला हो रही लुप्त (ETV Bharat)

मुश्किल से मिलता बांस, महंगे दामों पर बेचने की मजबूरी
स्थानीय कारीगर बताते हैं कि, ''कुछ सालों पहले बंस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाता था लेकिन अब बड़ी कठिनाई से मिलता है, वह भी महंगा मिलता है. इसलिए बांस से बनाने वाली वस्तुएं बाजार में महंगे दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैं. महंगे दाम होने के कारण लोग इसे खरीदते नहीं हैं.''

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अजीविका को लेकर चिंता में कारीगर (ETV Bharat)

प्रशासन से नहीं मिलती मदद
स्थानीय कारीगर नत्थू बसोर बताते हैं कि, ''प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती है. बाजार के लिए या कोई सरकारी एजेंसी हमारा माल खरीद कर बाहर बेचने की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाती हैं. हम खुद ही बांस से बनी हुई वस्तुएं बनाते हैं और खुद ही बाजार में जाकर बेचते हैं. जिसमें शासन-प्रशासन का कोई सहयोग नहीं मिलता. यह व्यवसाय बढ़ाने की हमने कई बार कोशिश की है. इसलिए लोन निकालने के लिए भी प्रयास किया है, लेकिन आवेदन करने के बाद भी लोन नहीं मिला है.''

उद्योग व्यापार केंद्र के प्रबंधक राहुल दुबे से जब इस विषय में बात की गई तो उन्होंने बताया कि, ''यदि यह लोग उद्योग विभाग से लोन के लिए आवेदन करेंगे तो निश्चित ही नियम अनुसार लोन प्रकरण बनाकर बैंक भेजे जाएंगे और मदद की जाएगी.''

Last Updated : January 2, 2026 at 4:55 PM IST