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पन्ना में मधुमक्खियों के सूखे कंठ, प्यास बुझाने पानी की झिरिया पर टूट पड़ीं

गर्मी से इंसान से लेकर जानवर और पक्षी सबका हाल बेहाल, पन्ना में झिरिया में प्यास बुझाती दिखीं मधुमक्खियां, प्रबंधन की व्यवस्था.

PANNA BEES DRINKING WATER
पन्ना में मधुमक्खियों के सूखे कंठ (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 25, 2026 at 2:41 PM IST

3 Min Read
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पन्ना: भीषण गर्मी का कहर जारी है. इसी को देखते हुए पन्ना के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत पुराने झिरियों एवं पुराने जल स्रोतों को साफ किया जा रहा है. जिससे इन जलस्त्रोतों का पानी सुरक्षित व साफ रहे और प्यासे जानवर-पक्षी अपनी प्यास यहां से बुझा सकें. इसी का एक उदाहरण रविवार को देखने मिला. जहां मधुमक्खियों का झुंड उसी सुरक्षित पानी से प्यास बुझाता दिखा.

भीषण गर्मी में सूखे जल स्त्रोतों को बचाने की कोशिश

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच दक्षिण पन्ना वनमण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील मानवीय प्रयासों की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है. वर्तमान समय में जहां जलस्रोत तेजी से सूख रहे हैं, वहीं वन विभाग द्वारा राज्य शासन के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत जंगलों में वन्यजीवों एवं पर्यावरण के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. इस पहल की स्थानीय ग्रामीणों एवं प्रकृति प्रेमियों ने सराहना की है.

PANNA WATER RESTORED
जल स्त्रोतों को किया जा रहा साफ (ETV Bharat)

झिरिया में प्यास बुझाता दिखा मधुमक्खियों का छत्ता

दक्षिण पन्ना वनमण्डल स्थित रैपुरा वन परिक्षेत्र की सागौनी, भरतला, चमरैया, जमुनिया व बघनरवा बीटों में पारंपरिक जल स्रोतों 'झिरिया' का निर्माण एवं पुरानी झिरियों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर किया गया. इन प्रयासों के परिणामस्वरूप भीषण गर्मी के दौरान भी वन क्षेत्रों में जल उपलब्धता बनी हुई है, जिससे मधुमक्खियों सहित अनेक छोटे वन्यजीवों को राहत मिल रही है. इन जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते सक्रिय रूप से देखे जा रहे हैं.

PANNA WATER ARRANGEMENT FOR ANIMALS
प्यास बुझातीं मधुमक्खियां (ETV Bharat)

मधुमक्खियों के लिए पानी में रखी गईं सूखी डंडिया

वन विभाग के मैदानी अमले ने मधुमक्खियों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक व संवेदनशील तकनीक भी अपनाई है. सामान्यतः खुले अथवा गहरे जल स्रोतों पर पानी पीते समय मधुमक्खियां डूबकर मर जाती हैं. इसे रोकने के लिए जल स्रोतों की उथली जगहों पर छोटे पत्थर व सूखी लकड़ियों की डंडियां रखी गई हैं, ताकि मधुमक्खियां उन पर सुरक्षित बैठकर बिना किसी खतरे के पानी पी सकें. इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से प्रतिदिन हजारों मधुमक्खियों की रक्षा हो रही है.

मधुमक्खियां पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन व परागण प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. ऐसे में उनका संरक्षण प्रत्यक्ष रूप से जैव विविधता संरक्षण से जुड़ा हुआ है. 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के माध्यम से केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण को भी मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है.