धनबाद के बालूगद्दा में धंसी जमीन, बना बड़ा गोफ, जहरीली गैस के रिसाव का दावा
धनबाद के बालूगद्दा में भू-धंसान के बाद लोगों में दहशत का माहौल है. नरेंद्र निषाद की रिपोर्ट.

Published : August 30, 2026 at 10:58 PM IST
धनबाद: जिला में बीसीसीएल एरिया-10 के लिलोरी पथरा बालूगद्दा में अचानक जमीन धंसने से हड़कंप मच गया. पीड़ित सुमित कुमार के घर के दरवाजे के ठीक सामने तेज आवाज के साथ जमीन धंस गई और देखते ही देखते वहां एक बड़ा गोफ बन गया.
इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. जमीन धंसने की घटना के बाद आसपास के कई घरों में दरारें आने की बात सामने आई है. अचानक बने गोफ को देखकर लोग सहम गए. इधर, कई परिवारों ने जरूरी सामान लेकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश शुरू कर दी है.
तेज धमाके के साथ धंसी जमीन
वहीं घटना के प्रत्यक्षदर्शी सुमित कुमार ने बताया कि उनके घर के पास ही कुछ लोगों के बीच विवाद हो रहा था. शोर सुनकर वह झगड़ा देखने के लिए घर से बाहर निकल गए तभी अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और जमीन धंस गई. सुमित के मुताबिक, कुछ देर बाद जब वह वापस लौटे तो घर के समीप एक बड़ा गोफ बन चुका था. उनका कहना है कि अगर वह झगड़ा देखने के लिए बाहर नहीं निकले होते, तो शायद उनकी जान भी जा सकती थी.
क्षेत्र में जहरीली गैस के रिसाव होने का दावा
स्थानीय लोगों का दावा है कि जमीन धंसने के बाद इलाके में जहरीली गैस का रिसाव भी हो रहा है. लोगों का कहना है कि जमीन के नीचे आग धधक रही है और उसके ऊपर बने घरों में लोग रह रहे हैं. भू-धंसान की घटना के बाद लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली. स्थानीय लोगों ने प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की और प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग की.

सुरक्षित स्थान पर भेजने में देरी क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि कतरास के सोनारडीह और छाताबाद में हुई घटनाओं के बावजूद प्रबंधन ने सबक नहीं लिया है. लोगों का सवाल है कि जब प्रभावित परिवारों का सर्वे किया जा चुका है और उनके नाम सूची में दर्ज हैं, तो फिर उन्हें अब तक सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया?
लोगों को जान की चिंता
ग्रामीणों का आरोप है कि किसी बड़ी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही एहतियात कदम उठाए जाने चाहिए. लोगों का कहना है कि यहां रहने वाले परिवार हर वक्त अपनी जान को लेकर चिंचित हैं. जमीन धंसने की घटना ने प्रभावित परिवारों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी कर दी है. एक तरफ जान का खतरा है, दूसरी ओर सर छिपाने की चिंता भी.

लोगों में बढ़ा असुरक्षित का भाव
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि घर असुरक्षित हो चुके हैं तो परिवार आखिर जाएं कहां? बारिश और धूप से बचने का संकट अलग है, जबकि जमीन के नीचे धधकती आग और भू-धंसान का खतरा लगातार बना हुआ है.
सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग
लोगों ने बीसीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि जब खतरा सामने आ चुका है, तो कागजी प्रक्रिया के नाम पर और इंतजार करना लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ होगा.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में 182 प्रभावित लोगों की सूची तैयार की जा चुकी है. बावजूद इसके अब तक सभी परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों के नाम सूची में हैं, उन्हें तत्काल पुनर्वासित किया जाए, साथ ही अगर कोई प्रभावित परिवार सूची से छूट गया है, तो उसका भी दोबारा सर्वे कराकर सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए.

लिलोरी पथरा बालूगद्दा में बना यह गोफ सिर्फ जमीन धंसने की घटना नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है.
एक जगह पर भू-धंसान हुआ है. बीसीसीएल जीएम को पुनर्वास के लिए बोला गया है. पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है: मनोज कुमार, झरिया सीओ.
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