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जयंती विशेष: छत्तीसगढ़ के गौरव के सच्चे संवाहक पंडित लोचन प्रसाद, 1921 में की थी गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना

पंडित लोचन प्रसाद पांडे की जयंती हर साल 4 जनवरी को मनाई जाती है. जानिए उनके महत्वपूर्ण कार्य, खोज और छत्तीसगढ़ के लिए योगदान

Lochan Prasad Pandey Jayanti
जयंती विशेष: छत्तीसगढ़ के गौरव के सच्चे संवाहक पंडित लोचन प्रसाद (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 4, 2026 at 7:00 AM IST

3 Min Read
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रायपुर: पंडित लोचन प्रसाद पांडे का जन्म 4 जनवरी 1887 को हुआ था. उनकी जयंती हर साल 4 जनवरी को मनाई जाती है. वे छत्तीसगढ़ के ऐसे महान इतिहासकार, साहित्यकार और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपनी विद्वता और शोध के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में पहचान दिलाई.

छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना: पंडित लोचन प्रसाद पांडे ने वर्ष 1921 में छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना की थी. यही संस्था आगे चलकर महाकौशल इतिहास समिति और वर्तमान में महाकौशल इतिहास परिषद के नाम से जानी जाती है. यह संस्था छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनी.

छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

इतिहास और संस्कृति में अमूल्य योगदान: इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि पंडित लोचन प्रसाद पांडे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उन्होंने छत्तीसगढ़ के पुरातत्व, इतिहास, संस्कृत और साहित्य, राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए. उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान देशभर में मजबूत हुई.

महत्वपूर्ण खोजें और कार्य

  • सक्ति के पास गूंजिय तीर्थ का नामकरण उन्होंने ऋषभ तीर्थ के रूप में किया, जो आज जैन धर्म का बड़ा आस्था केंद्र है.
  • मल्हार गांव में तालाब के बीच मिले लकड़ी के स्तंभ (काष्ठ स्तंभ) की खोज की, जिसमें प्राचीन पदाधिकारियों के नाम अंकित हैं.
  • यह स्तंभ देश का सबसे पुराना काष्ठ स्तंभ माना जाता है और इसे वर्तमान में महंत घासीदास संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है.
Lochan Prasad Pandey Jayanti
पंडित लोचन प्रसाद ने 1921 में की थी गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान: जब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद रायगढ़ आए थे, तब उन्होंने पंडित लोचन प्रसाद पांडे को सम्मान पत्र प्रदान किया था. पंडित पांडे द्वारा खोजे गए कलचुरी राजाओं के सिक्के राष्ट्रपति को भेंट किए गए, जिन्हें बाद में दिल्ली के संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया.

भाषा, शिक्षा और राष्ट्रीय आंदोलन में भूमिका: पंडित लोचन प्रसाद पांडे उड़िया भाषा के बड़े विद्वान थे. इसके साथ ही उन्हें संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी का भी गहरा ज्ञान था. राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उन्होंने लोगों को जागरूक किया और नेताओं को प्रेरणा दी.

चंद्रपुर को छत्तीसगढ़ में शामिल कराने में योगदान: पदमपुर और चंद्रपुर क्षेत्र को ओडिशा में मिलाने की योजना थी. पंडित लोचन प्रसाद पांडे के प्रयासों से चंद्रपुर छत्तीसगढ़ में ही शामिल रहा, जहां आज चंद्रहासिनी देवी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है.

सादा जीवन, उच्च विचार: पंडित लोचन प्रसाद पांडे मालगुजार परिवार से थे और कृषि से गहरा लगाव रखते थे. सरकारी नौकरी का अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने नौकरी नहीं की और जीवनभर इतिहास, संस्कृति और समाज सेवा को समर्पित रहे.वे मध्य प्रांत और दिल्ली सरकार की इतिहास समितियों के सदस्य भी रहे.

Lochan Prasad Pandey Jayanti
पंडित लोचन प्रसाद पांडे की जयंती हर साल 4 जनवरी को मनाई जाती है (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

पंडित लोचन प्रसाद पांडे रायगढ़ जिले के बालपुर गांव के निवासी थे. सारंगढ़ और रायगढ़ उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र रहा. आज जब छत्तीसगढ़ राज्य अपने 25वें स्थापना वर्ष (रजत जयंती) का उत्सव मना रहा है, तब यह कहना गलत नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ के गौरव की नींव 105 वर्ष पहले उसी दिन रखी गई थी, जब पंडित लोचन प्रसाद पांडे ने छत्तीसगढ़ गौरव प्रचारक मंडली की स्थापना की थी. उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया.

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