पंडित बंशराज तिवारी, एक ऐसा नाम, जिसने सत्ता को लक्ष्य नहीं, जनसेवा का माध्यम बनाया
पंडित बंशराज तिवारी छत्तीसगढ़ के ऐसे नेता जिन्होंने प्रदेश के विकास में अहम योगदान दिया. उन्होंने लोगों की सेवा के लिए राजनीति का रास्ता चुना

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 5, 2026 at 10:49 PM IST
बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ की धरती पर कई ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने कर्म और विचारों से समाज को नई दिशा दी, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होते जाते हैं. पं. बंशराज तिवारी उन्हीं विरले जननेताओं में से एक थे, जिनका जीवन जनसेवा, न्याय और विकास की सशक्त त्रिवेणी के रूप में आज भी प्रेरणा देता है. 6 मई 1925 को जन्मे पं. बंशराज तिवारी ने अपने संघर्ष, सिद्धांत और समर्पण के बल पर एक ऐसी पहचान बनाई, जो केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और न्यायिक क्षेत्र में भी उन्होंने अमिट छाप छोड़ी.
बचपन से ही संघर्ष की राह
पंडित बंशराज तिवारी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ. उनके पिता पं. महावीर प्रसाद तिवारी स्थानीय स्तर पर प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, लेकिन बाल्यावस्था में ही पिता के निधन ने उनके जीवन को कठिन मोड़ दे दिया. कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का भार उनके कंधों पर आ गया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया. पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने समाज और नेतृत्व की समझ विकसित की.

आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े
युवावस्था में ही उन्होंने सत्ता और पद की सुविधाओं को ठुकराकर देश सेवा का रास्ता चुना. वर्ष 1940 में उन्होंने पटेल पद से त्यागपत्र देकर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया. उस दौर में जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था, तब उन्होंने साहस के साथ देश की आजादी के लिए संघर्ष किया. 1946 में समाजवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़कर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की, लेकिन राजनीति उनके लिए कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का साधन नहीं बनी.
वकालत को बनाया न्याय का माध्यम
एक अधिवक्ता के रूप में पं. बंशराज तिवारी ने कानून को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया. वे मानते थे कि न्याय केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए. गरीब, वंचित और जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने क लिए उन्होंने हमेशा आगे बढ़कर काम किया. यही वजह थी कि वे लोगों के बीच सिर्फ वकील नहीं, बल्कि न्याय के प्रहरी के रूप में पहचाने जाते थे.

अलग छत्तीसगढ़ और जिला निर्माण की आवाज
बलौदाबाजार बार एसोसिएशन के सचिव रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने बलौदाबाजार को जिला बनाने और छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की मांग विभिन्न मंचों और आंदोलनों के माध्यम से उठाई. उनका यह संघर्ष केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं था, बल्कि क्षेत्र के विकास और पहचान के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा था.
आपातकाल में दिखाया अपार साहस
देश में जब आपातकाल लागू हुआ और लोकतांत्रिक मूल्यों पर संकट आया, तब पंडित बंशराज तिवारी ने चुप रहने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना. उन्होंने दमन और भय के माहौल में भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की. राजद्रोह जैसे गंभीर आरोपों का सामना करते हुए उन्होंने जेल यात्रा भी की. रायपुर सेंट्रल जेल में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ कारावास का समय बिताया. इस संघर्ष ने उन्हें और अधिक मजबूत, निर्भीक और जनप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया.
विधायक बनकर बदली क्षेत्र की तस्वीर
1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर वे विधायक बने. विधायक के रूप में उन्होंने सिर्फ राजनीति नहीं की, बल्कि विकास को जमीन पर उतारने का काम किया. उन्होंने कई क्षेत्रों में काम किया.
- शिवनाथ नदी से जल प्रदाय योजना
- अतिरिक्त सत्र न्यायालय की स्थापना
- निजी महाविद्यालय का शासकीयकरण
- टेलीफोन एक्सचेंज और डाकघर की स्थापना
- अस्पतालों का विस्तार
- गांव-गांव तक सड़क और पुल-पुलिया निर्माण
परिवार में भी संस्कारों की विरासत
पंडित बंशराज तिवारी ने अपने पारिवारिक जीवन में भी उच्च आदर्शों का पालन किया. अपनी पत्नी चंदा देवी के साथ मिलकर उन्होंने अपने बच्चों में सेवा, त्याग और समाज के प्रति जिम्मेदारी के संस्कार डाले. आज भी उनका परिवार उन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है.
निधन के बाद भी जारी सेवा
9 फरवरी 2006 को उनके निधन के बाद भी उनकी सेवा की परंपरा नहीं रुकी. पिछले 20 वर्षों से उनके परिवार द्वारा निःशुल्क रोग निदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनसे हजारों लोग लाभान्वित हो चुके हैं। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके विचारों और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है.बलौदाबाजार ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए पं. बंशराज तिवारी एक प्रेरणा हैं. उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों से समझौता किए बिना समाज के लिए काम किया जा सकता है.

