पंचकूला के शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ ने पांडवों को दिए थे दर्शन!, 500 साल पुराने मंदिर में आज भी दिखते हैं नाग-नागिन!
पंचकूला में सकेतड़ी शिव मंदिर में शिवरात्रि के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

Published : February 14, 2026 at 9:20 PM IST
पंचकूला: महाशिवरात्रि का पर्व सनातन धर्म में भक्तों द्वारा मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है. ये पवित्र दिन भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है, क्योंकि भगवान भोलेनाथ को समर्पित ये विशेष दिन उन्हें अत्यंत प्रिय है. प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर देश भर के शिव मंदिरों में लाखों शिव भक्त/श्रद्धालु अपनी-अपनी मनोकामनाओं के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक/रूद्राभिषेक करने पहुंचते हैं. जिला पंचकूला के गांव से सकेतड़ी में भी ऐतिहासिक प्राचीन श्री शिव मंदिर है, जहां पांडव वनवास के वर्षों में अज्ञातवास के दौरान यहां आकर ठहरे और उन्हें भोले बाबा का आशीर्वाद मिला.
पुलिसकर्मी, अग्निशमन विभाग और सेवा दल के सेवक संभालेंगे मोर्चा: मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि "हर साल महाशिवरात्रि पर मंदिर में हजारों शिव भक्त अपनी-अपनी मनोकामनाएं लेकर भोले बाबा से आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. सभी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रहे, इसके लिए विभिन्न सेवा दल के सेवकों समेत जिला पुलिस-प्रशासन से पुलिसकर्मी, अग्निशमन विभाग के कर्मचारी ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगे. महाशिवरात्रि पर शिव भक्तों की लाइन मुख्य मंदिर से लेकर चंडीगढ़ की सुखना झील को जाने वाली सड़क तक लगती रही है. भीड़-भाड़ अधिक होने के चलते किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए, बच्चे-महिलाएं, बुजुर्ग और बड़े हर कोई आसानी से दर्शन कर सके, इसके लिए जगह-जगह सरकारी कर्मचारी और मंदिर के सहयोगी बड़े शिव दलों के सेवक मौजूद रहेंगे."
नाग नागिन की प्राचीन गुफा: महाशिवरात्रि पर भोले बाबा का श्रृंगार करने, जलाभिषेक/रुद्राभिषेक कर उनसे आशीर्वाद लेने के लिए शिव भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती है. मुख्य मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करने के साथ ही सभी भक्त उस प्राचीन गुफा के दर्शन भी करते हैं, जहां नाग देवता दिखाई देते रहे हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि "नाग देवता सौभाग्यशाली लोगों को ही दर्शन देते हैं. ऐसे कई शिव भक्त रहे हैं, जिन्हें नाग देव ने दर्शन दिए हैं. सभी श्रद्धालु नागदेव के दर्शन करने की इच्छा से ही पवित्र गुफा के दर्शन करते हैं. यह गुफा भी भगवान भोलेनाथ के मुख्य मंदिर के साथ सीढ़ियां उतरकर मौजूद हैं."
हरियाणा-चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल के भक्तों की श्रद्धा: महाशिवरात्रि पर इस प्राचीन श्री शिव मंदिर में हरियाणा समेत चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के हजारों शिव भक्त/श्रद्धालु भोले बाबा के चरणों में शीश झुकाकर जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. अरावली की पहाड़ियों के बीच मौजूद इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या हर साल बढ़ रही है. मंदिर के पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि मंदिर के आसपास खुला ग्राउंड है, जहां पार्किंग की उचित व्यवस्था है. लेकिन श्रद्धालुओं से बड़े वाहन न लाने की अपील की गई है, ताकि अधिक भीड़ के कारण दर्शन करने में किसी को कोई परेशानी ना आए. पुजारी ने अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के अलावा आसपास के भक्तों से छोटे वाहन लाने का आग्रह किया, ताकि वाहनों की अधिक भीड़ ना हो.
मंदिर का इतिहास पांडव काल से जुड़ा हुआ: हरियाणा के जिला पंचकूला के गांव सकेतड़ी में अरावली की पहाड़ियों के बीच मौजूद इस श्री शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने पांडवों को दर्शन दिए थे. यहां बना यह मंदिर लगभग पांच सौ वर्षों से अधिक पुराना बताया जाता है. मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि भगवान शिव के दर्शन करने के बाद सभी पांडव यहां से कालका गए और उसके बाद हरियाणा के जिला कुरुक्षेत्र गए, जहां महाभारत का युद्ध हुआ था.

