पंचकूला का शाहपुर भूमि घोटाला: एसीबी ने 2.4 करोड़ लेने के आरोपी एलएओ को किया गिरफ्तार
पंचकूला के शाहपुर प्रतिबंधित भूमि घोटाले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएसीबी) ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी (एलएओ) जोगिंदर शर्मा को गिरफ्तार किया है.

Published : July 8, 2026 at 9:06 AM IST
पंचकूला: जिला पंचकूला के बहुचर्चित शाहपुर प्रतिबंधित भूमि घोटाले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएसीबी) ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी (एलएओ) जोगिंदर शर्मा को गिरफ्तार किया है. मामले में पूछताछ के लिए जांच एजेंसी ने आरोपी का सात दिन का रिमांड भी हासिल किया है. जांच के अनुसार दावा किया गया कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले में जोगिंदर शर्मा के हिस्से करीब 2.4 करोड़ रुपये आए, जिन्हें उसने दिल्ली, मनाली और भिवानी के अलग-अलग स्थानों पर छुपाया है.
8 महीने से मोबाइल स्विच ऑफ: जांच टीम को पता लगा कि आरोपी का मोबाइल फोन आठ महीने से बंद था. जांच टीम के अनुसार यह मोबाइल सालासर में आरोपी के रिश्तेदारों के पास छुपाया गया, जिसे फिलहाल पुलिस बरामद करने के अलावा आरोपी के भिवानी जिले के कुड़ल गांव निवासी रिश्तेदार नवीन और दिनेश की भूमिका की भी जांच कर रही है.
दर्ज एफआईआर के अनुसार आरोप: इस मामले में 30 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके अनुसार आरोप हैं कि तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगल को पता था कि 25 अक्टूबर 2019 से संबंधित भूमि की बिक्री पर रोक है, लेकिन इसके मिलीभगत से 16 अक्टूबर 2025 को बिक्री विलेख संख्या 1109 दर्ज कराया गया. आरोप है कि बलदेव कौर ने रायपुररानी के गांव शाहपुर में 141 कनाल 8 मरला 7 सरसाई भूमि को एक करोड़ रुपये में नवीन को बेच दिया. विक्रम सिंगला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद की जांच के दौरान तत्कालीन एलएओ जोगिंदर शर्मा को आरोपी बनाया गया.
इस बड़े घोटाले से जुड़ी है जमीन: जांच एजेंसी के अनुसार यह जमीन 2004 में पीजीएफ लिमिटेड (पर्ल ग्रीन फॉरेस्ट) व अन्य लोगों ने खरीदी थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच में खुलासा हुआ की पीजीएफ और पीएसीएल ने निवेशकों से कथित धोखाधड़ी कर बड़ी रकम जुटाई थी. 2014 में सीबीआई ने कंपनी के तत्कालीन एमडी निर्मल सिंह भंगू समेत कई निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया और शाहपुर की जमीन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे.
सुप्रीम कोर्ट से रोक के बावजूद रजिस्ट्री: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हुई डील सीबीआई और न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिए थे कि पीजीएफ और पीएसीएल से जुड़ी किसी भी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण बिना एनओसी के नहीं किया जाएगा. 2019 में राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से विशेष प्रविष्टि कर जमीन की बिक्री पर रोक लगाई गई. लेकिन 2025 में जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई, जिसमें आरोपी जोगिंदर शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को मामले में कई अन्य खुलासे होने की उम्मीद है.
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