ETV Bharat / state

पंचकूला की सोसाइटीज़ पर मंडरा रहा ख़तरा, अब तक नहीं मिली फायर NOC, सेफ्टी उपकरणों की जांच का भी कोई रिकॉर्ड नहीं

पंचकूला के सेक्टर 20 की 120 सोसाइटी आग के मुहाने पर है. दमकल विभाग से केवल एक सोसाइटी को एनओसी मिला है.

Panchkula Peoples are in grave danger fire noc not issued for Societies
पंचकूला की सोसाइटीज़ पर मंडरा रहा ख़तरा (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Haryana Team

Published : May 20, 2026 at 8:03 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

पंचकूला: हरियाणा और चंडीगढ़ में बीते समय मकानों और इमारतों में आग लगने की दुर्घटनाओं से भी शासन-प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है. लापरवाही का आलम ऐसा है कि पंचकूला सेक्टर-20 की लगभग सभी सोसाइटी आग के मुंहाने पर खड़ी हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि दमकल विभाग की ओर से इन सोसाइटियों को फायर एनओसी जारी नहीं की गई हैं. जबकि हर साल गर्मियों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जाती है. फायर सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत एनओसी नहीं लेने पर जुर्माना और दण्ड का प्रावधान भी है. बावजूद इसके पंचकूला के हजारों परिवारों पर संकट बना हुआ है.

दमकल विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं: पंचकूला के सेक्टर 20 में करीब 120 सोसाइटी हैं, जिनमें से एक-एक सोसाइटी में सैकड़ों फ्लैट हैं. इसके अलावा मार्केट में भी अनेक दुकानें और शोरूम हैं. लेकिन सेक्टर-20 की केवल एक सोसाइटी को छोड़कर किसी भी सोसाइटी के पास एनओसी नहीं है. जबकि फायर सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत एनओसी नहीं लेने पर कानूनी कार्यवाही के प्रावधान भी हैं. यह बात अलग हो सकती है कि किन्हीं सोसाइटियों द्वारा आग से बचाव के लिए निजी एजेंसियों द्वारा अग्निश्मन यंत्र, फायर सेफ्टी उपकरण और अन्य बंदोबस्त कराए गए हों. लेकिन इन बंदोबस्त की जानकारी भी पंचकूला दमकल विभाग के पास नहीं है. इस संबंध में ईटीवी भारत ने पंचकूला के स्टेशन फायर ऑफिसर (एसएफओ) रविंदर पराशर से बातचीत की. लेकिन उनके पास भी दिखाने को कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं मिला. अचरज की बात यह है कि पंचकूला जैसे शहर के दमकल विभाग में कोई स्थायी एसएफओ तक की नियुक्ति नहीं की गई है. रविंदर पराशर के पास पंचकूला का अतिरिक्त चार्ज है, उनके पास अंबाला की जिम्मेदारी भी है.

स्टाफ की भारी कमी: गर्मियों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी के चलते निर्धारित स्टाफ से अधिक कर्मचारियों की जरूरत होती है. लेकिन पंचकूला में जो नॉन रेगुलर स्टाफ है, वो भी दशकों से लंबित अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर है. इनके अलावा चंद कर्मचारी ही पंचकूला की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जबकि इन कर्मचारियों को भी फायर टेंडर के साथ वीआईपी दौरों और राजनीतिक कार्यक्रमों के चलते निर्धारित स्थानों पर ड्यूटी पर मौजूद रहना पड़ता है. पंचकूला दमकल विभाग के पास स्टाफ की कमी का खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ सकता है. हालांकि, रविंदर पराशर ने बताया कि आगामी समय में कुछ पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकती है. इसके बाद कामकाज में पहले से अधिक सुविधा होगी.

सेफ्टी उपकरणों की नहीं हुई जांच: पंचकूला दमकल विभाग द्वारा सेक्टर की सभी सोसाइटियों में लगे सेफ्टी उपकरणों की जांच का रिकॉर्ड भी नहीं है. नतीजतन, विभाग को यह जानकारी भी नहीं है कि किस सोसाइटी के सेफ्टी उपकरण और अन्य बंदोबस्त तय मानकों के अनुसार पूरे हैं और किन सोसाइटियों के एक्सपायर्ड हो चुके हैं. यहां तक कि शहर के कई छोटे-बड़े होटलों के पास भी फायर एनओसी नहीं है. यदि सोसाइटियों की बात करें तो हर सोसाइटी में प्रेसिडेंट व अन्य पदाधिकारी हैं. लेकिन अचरज है कि दमकल विभाग और प्रशासन द्वारा इन सोसाइटियों में सुरक्षा के मद्देनजर जांच नहीं की गई. ऐसे में यदि कोई बड़ी घटना होती है तो उसका जिम्मेदारी कौन होगा.

बीते वर्षों में एक हजार एनओसी जारी: दमकल विभाग के अधिकारी ने बिना कोई रिकॉर्ड दिखाए एक अनुमान के अनुसार बताया कि समूचे जिला पंचकूला में बीते समय एक हजार एनओसी ही जारी की गई हैं. जबकि सोसाइटी प्रबंधकों द्वारा हर वर्ष और तीन वर्ष बाद दमकल विभाग को स्व-घोषणा कर दस्तावेज देकर सुरक्षा उपकरण तय मानकों के अनुसार पूरे होने का भरोसा देना होता है. लेकिन लगभग अधिकांश सोसाइटियों द्वारा ऐसा नहीं किया गया.

अग्नि एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम 2022: हरियाणा अग्नि एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम 2022, 7 अप्रैल 2022 से प्रभावी है. यह कानून ऊंची इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और जोखिम वाले भवनों के लिए एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने, स्व-घोषणा लागू करने और अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है.
1. हरियाणा फायर सर्विस एक्ट 2022 को लागू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य में अग्नि सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करना और नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के अनुसार आग की रोकथाम सुनिश्चित करना है.
2. स्व-घोषणा पत्र: अब हर साल एनओसी के नवीनीकरण के बजाय, भवन स्वामी को एक स्व-घोषणा पत्र देना होगा कि अग्निशमन प्रणाली सही ढंग से काम कर रही है.
3. दंड के प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की कैद या दस हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
4. एनओसी की अनिवार्यता: ऊंची इमारतों के निर्माण के बाद, उन्हें किराए पर देने, बेचने या रहने के लिए एनओसी अनिवार्य है.
5. सरलीकृत प्रक्रिया: ऑनलाइन अनुमोदन प्रक्रिया और पैनल में शामिल एजेंसियों के माध्यम से एनओसी प्रक्रिया को तेज बनाया गया है.

हरियाणा समेत देश की ताजा ख़बरें पढ़ने के लिए ईटीवी भारत ऐप डाउनलोड करें. यहां आपको मिलेंगी तमाम बड़ी ख़बरें, हर बड़ा अपडेट, वो भी सबसे सटीक और डिटेल एनालिसिस के साथ - Download App

ये भी पढ़ें : ना फायर एनओसी, ना इक्विपमेंट, गुरुग्राम में अंतरिक्ष हाइट्स सोसायटी की बिल्डिंग में लगी आग, देखें वीडियो

ये भी पढ़ें : रेवाड़ी के केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, धमाके से मचा हड़कंप, 5 कर्मचारी झुलसे

ये भी पढ़ें : रेवाड़ी में इलेक्ट्रिक स्कूटी वेयरहाउस में भीषण आग, बैटरी फटने से हादसा, लपटों की विनाशलीला देख सहमे लोग