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पंचकूला में एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन !, 1500 किस्मों के साथ 28 फीट लंबा कैक्टस बना लोगों के लिए अजूबा

पंचकूला में अब एशिया के सबसे बड़े कैक्टस गार्डन को लोग देख सकेंगे. यहां पर 1500 किस्म के कैक्टस नजर आएंगे.

largest cactus garden in Asia
पंचकूला में एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन ! (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : February 25, 2026 at 10:40 PM IST

6 Min Read
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पंचकूला से अविनाश शर्मा की रिपोर्ट

पंचकूला: 'मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली', ये पहली पंक्ति वर्ष 1968 में आई बॉलीवुड फिल्म अनोखी रात के उस गीत की है, जिसे मोहम्मद रफी ने आवाज दी थी. आप सभी ने फूलों को न केवल छूकर महसूस किया होगा, बल्कि हाथों में पकड़कर उसकी सुगंध भी जरूर ली होगी. लेकिन कभी कांटों से दोस्ती करने का ख्याल नहीं आया होगा, क्योंकि कांटा शब्द सुनते ही चुभन का एहसास होने लगता है. हालांकि, अब जल्द ही आप कांटों को देखकर खुश होंगे. क्योंकि आगामी मार्च महीने में जब आप पंचकूला सेक्टर-5 स्थित कैक्टस गार्डन पहुंचेंगे तो यकीनन आप कांटों से दोस्ती करना पसंद करेंगे. ऐसा एसलिए, क्योंकि ईटीवी भारत आज आपको इस कैक्टस गार्डन में मौजूद पंद्रह सौ किस्म के आकर्षक कैक्टस के बारे में बता रहा है.

कैक्टस की 1500 प्रजाति मौजूद: पंचकूला जिला प्रशासन द्वारा सेक्टर-5 स्थित इस कैक्टस गार्डन का नाम बदलकर राष्ट्रीय कैक्टस एवं सेक्यूलेंट बॉटेनिकल गार्डन एवं रिसर्च सेंटर रखा गया है. सात एकड़ में फैला यह कैक्टस गार्डन एशिया के सबसे बड़े आउटडोर भू-भाग के कैक्टस और सूक्कुल गार्डन के रूप में जाना जाता है. इस गार्डन में वर्तमान समय में छोटे से काफी बड़े-बड़े आकर्षक कैक्टस की करीब पंद्रह सौ प्रजाति मौजूद हैं. यहां मौजूद कैक्टस की कई प्रजातियां काफी दुर्लभ हैं और लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में घोषित हैं, जिसमें भारतीय मूल के जीनस कार्लुमा का पूरा संग्रह शामिल है.

एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन (Etv Bharat)

लोगों के लिए मार्च में दोबारा खुलेगा गार्डन: कभी अपनी सुंदरता के लिए जाना जाने वाला यह यह कैक्टस गार्डन करीब एक वर्ष पूर्व बदहाल हालत में था. लेकिन जिला पंचकूला प्रशासन ने इस गार्डन के पुन: जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी विख्यात विशेषज्ञ, मेजर जनरल (रिटा.) सीएस बेवली को सौंपते हुए उन्हें बतौर क्यूरेटर नियुक्त किया. उन्होंने अपने करीब तीस वर्षों के अनुभव से गार्डन में व्यापक बदलाव किए हैं. कैक्टस के संरक्षण के अपने व्यापक अनुभव के आधार पर मेजर जनरल (रि.) ने गार्डन में ड्यूटी करने वाले सभी छह माली (गार्डनर) के साथ अनुभव सांझा करते हुए उन्हें कैक्टस की विभिन्न प्रजातियों की गहन जानकारी दी. साथ ही कैक्टस की फर्टिलाइजेशन, ग्रो-ग्राफ्टिंग और कटिंग तक की बारीक जानकारी दी, ताकि उनकी संख्या बढ़ाई जा सके. मेजर जनरल (रि.), सीएस बेवली ने बताया कि शुरूआती दिनों में गार्डन दयनीय हालत में था. हर तरफ खरपतवार थी, अनेक पौधे खराब थे. अधिकांश पौधों को रिलोकेट करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हर तरह के मौसम में गार्डन की निगरानी की, नतीजतन लोगों के लिए इस गार्डन को आगामी मार्च महीने में दोबारा खोला जा सकता है.

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कैक्टस की 1500 प्रजाति मौजूद (Etv Bharat)

28 फीट का 'पेकी सीरियस प्रिंगली' पौधा आकर्षक: दुनिया भर में मशहूर पंचकूला के इस डॉ. जेएस सरकारिया नेशनल कैक्टस एवं सेक्यूलेंट बॉटेनिकल गार्डन की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी पंचकूला मेट्रोपोलिटन डेक्लपमेंट अथॉरिटी पर है. अनुमान जताया जा रहा है कि अथॉरिटी द्वारा मार्च में आयोजित होने वाले स्प्रिंग फेस्ट के दौरान कैक्टस गार्डन को लोगों के लिए दोबारा खोला जा सकता है. यूं तो गार्डन में कैक्टस की सभी प्रजातियां नायाब और आकर्षक हैं. लेकिन सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र 28 फीट का 'पेकी सीरियस प्रिंगली' नामक वह पौधा है, जो देश में अपनी किस्म का इकलौता है. इस पौधे के बीज को वर्ष 1976 में मैक्सिको से लाया गया था, जो अब 28 फीट की विशाल लंबाई के साथ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. हालांकि, लंबाई अधिक होने के कारण इसे तेज हवा के संभावित नुकसान से बचाने के प्रयास भी किए गए हैं. इस कैक्टस को लोहे के ऊंचे ट्राईपोड फ्रेम की मदद से स्थिर रखा गया है. वहीं, गार्डन में भारतीय मूल की लुप्त प्रजाति के जीनस कैरालुमा और फेयरी कैक्टस पौधे भी हैं.

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28 फीट लंबा कैक्टस (Etv Bharat)

गार्डन में अन्य सुविधाएं: गार्डन में दो बड़े ग्लास हाउस का भी जीर्णोद्धार किया गया है. वहीं यहां ऑटोमेटिक टिकट काउंटर और सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा प्रदान की गई है. आकर्षक गेट के साथ गार्डन के अंदरूनी रास्ते तैयार हैं और स्वच्छ तालाब व रॉक गार्डन की तर्ज पर आकर्षक सजावटी मूर्तियां भी यहां मौजूद हैं. गार्डन के क्यूरेटर एवं मेजर जनरल (रि.) सीएस बेवली ने बताया कि "उनकी इच्छा है कि गार्डन में हर साल करीब तीन-350 नए पौधों को लाकर लगाया जाए और इनकी कुल संख्या पांच हजार की जाए." उन्होंने बताया कि "कैक्टस को गर्म तापमान के अलावा पानी की भी काफी जरूरत होती है, तभी वह बच सकेंगे. हालांकि, सर्दियों के मौसम में पानी की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन मार्च महीने से पौधों के लिए पानी की मात्रा बढ़ा दी जाती है." आम लोग भी कैक्टस की विभिन्न प्रजातियों के बारे में हर आवश्यक जानकारी हासिल कर सके, इसके लिए मेजर जनरल (रि.) सीएस बेवली ने कैक्टी कल्चर नामक पुस्तक भी लिखी है.

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चौधरी भजनलाल ने किया कैक्टस गार्डन का उद्घाटन (Etv Bharat)

आयुर्वेद और यूनानी दवाओं में इस्तेमाल: यह कैक्टस गार्डन न केवल पर्यटकों के लिए बल्कि वनस्पतिविदों के लिए भी विशेष स्थान रखता है. यहां मौजूद कैक्टस की सुंदरता को लोग/सैलानी तो निहारते ही हैं, इसके अलावा इनका इस्तेमाल आयुर्वेद और यूनानी दवाओं में भी किया जाता रहा है. यह गार्डन पंचकूला बस स्टैंड से पैदल यात्रा करते हुए करीब पांच सौ मीटर दूरी पर स्थित है. कैक्टस और यवनिका गार्डन, दोनों एकसाथ हैं. जिला प्रशासन द्वारा आगामी 7-8 मार्च को स्प्रिंग फेस्ट का आयोजन करने की संभावना है, जिस दौरान कैक्टस गार्डन को लोगों के लिए दोबारा खोलने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, अंतिम निर्णय पीएमडीए की आगामी बैठक में होना है. स्प्रिंग फेस्ट के दौरान गार्डन के उद्घाटन से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है.

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लोगों के लिए मार्च में दोबारा खुलेगा गार्डन (Etv Bharat)
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सेक्टर-5 कैक्टस गार्डन (Etv Bharat)
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कैक्टस की कई दुर्लभ प्रजातियां मौजूद (Etv Bharat)
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