हरियाणा का पंचकूला बना मॉडल जिला, लिंगानुपात में अव्वल, 20 एमटीपी केंद्रों का पंजीकरण रद्द
पंचकूला ने सख़्त निगरानी, कानूनी कार्रवाई और सामुदायिक प्रयासों से जन्म के समय 971 लिंगानुपात हासिल किया.

Published : January 3, 2026 at 9:54 AM IST
पंचकूला: हरियाणा के जिला पंचकूला ने सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में स्थानीय उपलब्धि हासिल की है. दरअसल, पंचकूला ने जन्म के समय लिंगानुपात 971 दर्ज किया है, जो हरियाणा में सर्वाधिक आंकड़ा है. यह जानकारी पंचकूला की सिविल सर्जन डॉ. मुक्ता कुमार ने दी.
बहु-आयामी प्रयासों से मिली सफलता:सिविल सर्जन डॉक्टर मुक्ता कुमार ने बताया कि, "यह उपलब्धि लिंग-आधारित भेदभावपूर्ण प्रथाओं पर अंकुश लगाने, लिंग चयन और मातृ स्वास्थ्य से संबंधित कानूनी प्रावधानों के कठोर अनुपालन व जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सतत् एवं बहु-आयामी प्रयासों से प्राप्त हुई है."
जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार: डॉक्टर मुक्ता कुमार ने बताया कि, "नैदानिक सेवाओं एवं चिकित्सकीय गर्भपात सेवाओं के दुरूपयोग को रोकने और सुदृढ़ निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला पंचकूला में 27 फरवरी 2025 से अल्ट्रासाउंड जांच से पूर्व सभी एएनसी मामलों में आरसीएच आईडी की अनिवार्य लिंकिंग लागू की गई. इससे सभी गर्भावस्थाओं की पूर्ण ट्रेसेबिलिटी एवं जवाबदेही सुनिश्चित हुई. साल 2025 के दौरान जिले में 157 पीसी-पीएनडीटी केंद्रों व 55 एमटीपी केंद्रों का निरीक्षण किया गया और कुल 9 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. इनमें से 4 पीसी-पीएनडीटी अधिनियम और 5 एमटीपी अधिनियम के अंतर्गत थे. इसके अतिरिक्त 15 बीएएमएस चिकित्सकों के निरीक्षण भी किए गए."
एमटीपी मामलों में कमी प्रमुख संकेतक: डॉक्टर मुक्ता कुमार ने आगे बताया कि, "आंकड़ों के विश्लेषण से एमटीपी मामलों में उल्लेखनीय कमी परिलक्षित हुई है, जो बढ़ी हुई जागरूकता एवं अनुपालन को दर्शाती है. गर्भावस्था के दस सप्ताह तक के एमटीपी मामलों की संख्या वर्ष 2024 में 2880 से घटकर वर्ष 2025 में 2684 हो गई, जो लगभग 7 प्रतिशत की कमी दर्शाती है. दस सप्ताह से अधिक अवधि के एमटीपी मामलों में और अधिक तीव्र गिरावट दर्ज की गई, जो वर्ष 2024 में 339 से घटकर वर्ष 2025 में 151 रह गई, जो 55.5 प्रतिशत की कमी है. उन्होंने कहा कि विशेष रूप से देर से किए जाने वाले एमटीपी मामलों में यह महत्वपूर्ण गिरावट, प्रभावी निगरानी एवं अवैध प्रथाओं के विरुद्ध सशक्त प्रतिरोध का स्पष्ट संकेतक है."
रिवर्स ट्रैकिंग एवं कानूनी कार्रवाई: डॉक्टर मुक्ता कुमार ने कहा कि, "12 सप्ताह से अधिक अवधि के 75 एमटीपी मामलों की समर्पित रिवर्स ट्रैकिंग की गई. विशेषकर उन परिवारों में जहां पहले से कन्या संतान/संतानें थी, ताकि लिंग-चयनात्मक प्रथाओं की संभावना को नकारा जा सके. इनमें से 12 मामले परिवारों द्वारा असहयोग या सूचना के अभाव के कारण संदिग्ध पाए गए. दोषियों के विरुद्ध दो एफआईआर दर्ज की गई, जो उल्लंघनों के प्रति शून्य सहनशीलता को दर्शाता है."
निर्णायक प्रशासनिक कार्रवाई:डॉक्टर मुक्ता कुमार ने जानकारी दी कि, "एक सशक्त प्रतिरोधक कदम के रूप में नियामक मानकों के अनुपालन में विफल या कदाचार में संलिप्त पाए गए 20 एमटीपी केंद्रों का पंजीकरण रद्द किया गया. इस निर्णायक कार्रवाई से प्रवर्तन की गंभीरता के संबंध में एक स्पष्ट संदेश गया है. इसके अतिरिक्त पीसी-पीएनडीटी एवं एमटीपी अधिनियमों के अंतर्गत सफल छापामार कार्रवाई के लिए प्रोत्साहन संरचना भी लागू की गई है, ताकि प्रवर्तन टीमों में सतर्कता एवं सक्रियता को प्रोत्साहित किया जा सके."
सहेली पहल से सामुदायिक सहभागिता:डॉक्टर मुक्ता कुमार की मानें तो सामुदायिक स्तर पर हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करने के लिए सहेली पहल के अंतर्गत सभी एसएमओ को आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवेदनशीलता बैठकों के आयोजन के निर्देश दिए गए. यह फ्रंटलाइन कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को परामर्श, प्रसव-पूर्व देखभाल, फॉलो-अप और प्रसव तक निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए उत्तरदायी हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ निकट समन्वय स्थापित कर निर्बाध कार्यान्वयन एवं भूमिकाओं की स्पष्टता सुनिश्चित की गई.
सामुदायिक सहभागिता का प्रमाण: डॉक्टर मुक्ता कुमार ने आगे बताया कि जन्म के समय 971 के लिंगानुपात की उपलब्धि जिला पंचकूला के सशक्त शासन, अंतर-विभागीय समन्वय, कठोर कानून प्रवर्तन और सामुदायिक सहभागिता का प्रमाण है. स्वास्थ्य विभाग और जिला पंचकूला इन उपलब्धियों को बनाए रखने एवं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने, लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
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