तकनीक से बदलेगी नक्सल इलाके की तस्वीर! पलामू टाइगर रिजर्व ने जंगल में तैयार किया एआई लैब, टारगेट पर बूढ़ापहाड़
पलामू टाइगर रिजर्व में एआई लैब तैयार किया गया है और इलाके के युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Published : August 22, 2026 at 7:05 PM IST
पलामूः झारखंड के नक्सल इलाकों में एआई के माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका में बड़े बदलाव लाने की तैयारी चल रही है. इस बदलाव की शुरुआत झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके से हो रही है. पलामू टाइगर रिजर्व का इलाका नक्सल गतिविधि के लिए पूरे देश भर में चर्चित रहा है, जबकि बूढ़ापहाड़ भी इसी इलाके में मौजूद है.
पलामू टाइगर रिजर्व में एआई लैब तैयार किया गया है. यह देश का पहला एआई लैब जो किसी भी टाइगर रिजर्व में मौजूद है. पलामू टाइगर रिजर्व ने स्टार्टअप झारखंड नामक संस्था के साथ एक एमओयू किया है. स्टार्टअप झारखंड के टेक्निकल एक्सपर्ट और पलामू टाइगर रिजर्व के आई एक्सपर्ट स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को एआई के बारे में जानकारी देंगे. स्थानीय ग्रामीणों को एआई टूल्स के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वह खेती, किसानी, कारोबार, पढ़ाई आदि में इसका इस्तेमाल कर सकें.
बूढ़ापहाड़ के ग्रामीणों पर विशेष नजर
पलामू टाइगर रिजर्व ने अपने अभियान का नाम एआई बिल्डर बूट कैंप दिया है. इस अभियान के लिए पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में एआई लैब बनाया गया है. 22 अगस्त से इस अभियान की शुरुआत हुई है. शुरुआती दौर में स्कूल और कॉलेज के बच्चों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन इस अभियान का टारगेट बूढ़ापहाड़ और पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में रहने वाली आदिवासी आबादी है.
पलामू टाइगर रिजर्व में एक सर्वे भी किया है और ग्रामीणों की सूची भी तैयार की गई है. बूढ़ापहाड़ के इलाके के ग्रामीणों को शनिवार और रविवार को बेतला नेशनल पार्क में लाया जाएगा और उन्हें एआई टूल्स के बारे में जानकारी दी जाएगी. इस अभियान से पूर्व नक्सली और उनके बच्चों को भी जोड़ा जाएगा. एआई टूल्स के माध्यम से ग्रामीणों को जंगल और उसमें रहने वाले जीवों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी.

“देश में शायद ही कोई टाइगर रिजर्व होगा जहां एआई लैब है. पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में एआई लैब की स्थापना की गई है. ग्रामीणों को एआई की ट्रेनिंग देने के लिए स्टार्टअप झारखंड के साथ अनुबंध किया गया है. एआई के माध्यम से लोग क्या कुछ सीख सकते हैं, जीवन में बदलाव ला सकते हैं यह सब कुछ जानकारी दी जाएगी. इस अभियान को पायलट मोड पर शुरू किया गया है. शुरुआत स्थानीय स्तर पर हुई है. धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर इसे ले जाया जाना है. बूढ़ापहाड़ जैसा इलाका पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में मौजूद है. यह इलाका प्राथमिकता में है. जितने भी कोर एरिया में गांव मौजूद है वहां के ग्रामीणों को एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी. एआई की ट्रेनिंग से युवाओं की आजीविका में बड़ा बदलाव आएगा और वह इस इलाके के लिए एक ब्रांड एंबेसडर भी बन जाएंगे.”- प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पीटीआर

एआई ट्रेनिंग से नक्सल इलाके में बदलाव लाने की तैयारी
पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में 207 के करीब गांव मौजूद हैं. पलामू टाइगर रिजर्व की बड़ी आबादी खेती और किसानी पर निर्भर है. एआई तकनीक के माध्यम स्थानीय लोगों को वैज्ञानिक तरीके से खेती की जानकारी दी जाएगी. स्थानीय लोगों को यह बताया जाएगा कि एआई टूल्स का इस्तेमाल कर वे खेती के बारे में समय पर कैसे जानकारी ले सकते हैं.
बूढ़ापहाड़ में अवस्थित सभी गांव को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए और इन्फ्लुएंसर बनाने में टूल्स किस प्रकार सहायक होगा इसकी भी जानकारी दी जाएगी. वैसे युवा जो रील्स बनाने में दिलचस्पी रखते हैं एआई उन्हें किस प्रकार मदद कर सकती है उन्हें यह सब जानकारी दी जाएगी. छात्र किस तरह पढ़ाई के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल कर सकते है इसकी भी जानकारी दी जाएगी.
“एआई टूल्स की आज के जमाने में काफी प्रासंगिकता है. इस चीज से यहां के युवा और ग्रामीण वंचित नहीं रहें, इसलिए इस बारे में जानकारी दी जा रही है. एआई रोजगार का बड़ा माध्यम भी बन सकता है. एआई खेती-किसानी में भी ग्रामीणों को मदद भी करेगी.”- माणिक कुमार, सदस्य, स्टार्टअप झारखंड

“एआई से कई टूल्स की जानकारी दी जानी है. जैसे इस इलाके के लोग खेती करते हैं, उन्हें एआई के बारे में जानकारी दी जाए तो खेती में कई बदलाव आ सकते हैं और इस क्षेत्र में बेहतर कर सकते हैं. अगर कोई कारोबार कर रहा है तो यह एआई टूल्स का इस्तेमाल कर वह अपने कारोबार को किस तरह बढ़ा सकता है और किस तरह लोगों को जोड़ सकता है यह सब जानकारी दी जाएगी.”-मंगलेश रंजन, ट्रेनर, स्टार्टअप झारखंड
एआई को लेकर उत्साहित हैं युवा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके के रहने वाले युवा काफी उत्साहित हैं. अब तक 110 से भी अधिक युवाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. एआई टूल्स की ट्रेनिंग प्रत्येक वीकेंड में दी जाएगी, ताकि ट्रेनिंग लेने वालों की पढ़ाई, रोजगार, खेती प्रभावित नहीं हो सके.
वहीं इस संबंध में गुड्डू प्रसाद नामक युवा ने बताया कि एआई टूल्स खेती और पढ़ाई में बड़ी सहायता करेगी. खेती से एआई को इंटीग्रेटेड कर दिया जाए तो फसलों में होने वाले बीमारी के बारे में जानकारी मिल जाएगी और समय रहते उसका समाधान भी किया जा सकता है. वहीं युवती निधि ने बताया कि एआई टूल्स के माध्यम से कैसे बदलाव ला सकेंगे यह जानकारी मिलेगी. इसको लेकर वह काफी उत्साहित हैं. वहीं छात्र दीपक कुमार ने कहा कि एआई टूल्स बदलते जमाने की मांग है. यह काफी अच्छी पहल है जिससे लोगों को कई जानकारी मिलेगी.
हुनर से रोजगार अभियान 2.0 है एआई ट्रेनिंग
दरअसल, बूढ़ापहाड़ का इलाका माओवादियों का ट्रेनिंग सेंटर रहा है. कई दशक तक बूढ़ापहाड़ की आबादी माओवादी विचारधारा से प्रभावित रही है. इस इलाके की आबादी को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सभी तंत्र अभियान चला रहे हैं. पलामू टाइगर रिजर्व ने भी बूढ़ापहाड़ के इलाके को अपने प्राथमिक श्रेणी में रखा है. इस इलाके के ग्रामीणों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कई कदम भी उठाए जा रहे हैं.
2023 में बूढ़ापहाड़ के इलाके से नक्सल खत्म हो गए हैं. जिसके बाद इलाके में कई योजना शुरू की गई है. दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व 2023-24 से हुनर से रोजगार अभियान की शुरुआत भी की है. इस अभियान से 600 से अधिक ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा गया है और कई ट्रेनिंग दी गई है. इसी कड़ी में हुनर से रोजगार अभियान के तहत एआई की ट्रेनिंग शुरू की गई है.
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